मुख्यपृष्ठखेलखेल-खिलाड़ी : एकदिवसीय या टी-२० क्रिकेट नहीं यह टेस्ट है!

खेल-खिलाड़ी : एकदिवसीय या टी-२० क्रिकेट नहीं यह टेस्ट है!

संजय कुमार
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज के धैर्य की कठिन परीक्षा होती है। स्कोरबोर्ड में बिना कोई खास रन जोड़े वह घंटा भर विकेट पर डटा रहता है। सधे हुए गेंदबाज मेडन के बाद मेडन ओवर डालते चले जाते हैं, लेकिन मझा हुआ बल्लेबाज रन बनाने के लिए जरा भी बेसब्र नहीं होता। वह बड़े धैर्य के साथ कमजोर गेंद की प्रतीक्षा करता है। हड़बड़ी भी क्यों, जब यह ५ दिनों का टेस्ट मैच है। कौन किसका धैर्य तोड़ पाता है, इसकी ही परीक्षा होती है। मझा हुआ बल्लेबाज गेंद को उसकी मेरिट पर खेलता है। सिवाय असाधारण परिस्थितियों के वह गेंद को हवा में नहीं खेलता है। बल्लेबाज इसमें अपारंपरिक शॉट विरले ही खेलता है। ऐसे बल्लेबाज के डिफेंस को भेदना गेंदबाज के लिए तनिक भी आसान नहीं होता। ऐसे मझे हुए बल्लेबाजों के बल्लों से जब स्क्वायर कट, कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव, कट शॉट, लेट कट शॉट, लेग ग्लांस, हुक, पुल शॉट वगैरह के जरिए रन बनते हैं तब वे क्रिकेट पैंâस के लिए दर्शनीय हो जाते हैं। उनके ये शॉट देखते ही बनते हैं।
टेस्ट क्रिकेट के स्वभाव को याद करने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि हाल ही में टीम इंडिया २ टेस्ट मैचों की श्रृंखला के तहत खेले गए पहले टेस्ट में दक्षिण अप्रâीका से पारी और ३२ रनों से बुरी तरह हार गई। ३ दिन में ही समाप्त हुए इस टेस्ट मैच के पहली पारी में २४५ रन और दूसरी पारी में मात्र १३१ रन बनाने वाली भारतीय टीम के खिलाफ दक्षिण अप्रâीका ने इसी विकेट पर ४०८ रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इससे साफ जाहिर हुआ कि इंडिया की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही कमजोर साबित हुई। वैसे सर्वकालीन महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर की नजर में टीम इंडिया की हार के पीछे उसके दक्षिण अप्रâीका के वातारण में टेस्ट मैच खेलने से पहले एक भी प्रैक्टिस मैच नहीं खेलना है। क्रिकेट के जानकार, बेशक गावस्कर के इस मत से इत्तेफाक रखेंगे। टेस्ट मैच खेलने से पहले प्रैक्टिस मैच खेलने का कार्यक्रम नहीं बनाना बड़ी गलती कही जाएगी।
खैर भारत की इस टीम में अधिकतर खिलाड़ी वे ही थे, जिन्होंने पिछले महीने समाप्त हुए विश्वकप टूर्नामेंट के फाइनल को छोड़ सभी मैच जीते थे। हां, लेकिन ये प्रदर्शन एकदिवसीय क्रिकेट में देखने को मिला था। एकदिवसीय, टी-२० और टेस्ट क्रिकेट, इन तीनों के स्वभाव बिल्कुल अलग हैं। एक स्वभाव से निकलकर दूसरे स्वभाव में प्रवेश करने और फिर प्रभावी प्रदर्शन करने की क्षमता केवल चैंपियन क्रिकेटर के बस की ही बात कही जाएगी। इसी वजह से कई खिलाड़ियों को हर स्वभाव के क्रिकेट खेलने के लिए टीम इंडिया में नही चुना गया। बहुत कम ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनमें तीनों फॉर्मेट के क्रिकेट में प्रदर्शन करने की योग्यता आंकी गई इसीलिए उन्हें टीम इंडिया में जगह दी गई, मगर ऐसी योग्यता रखने वाले की खिलाड़ियों ने भी निराश किया।
पहले टेस्ट में हुई हार का आकलन करने के बाद शृंखला के दूसरे और अंतिम टेस्ट में इंदौर के तेज गेंदबाज आवेश खान को टीम इंडिया में शामिल किया गया है। आवेश ने अभी तक भारत के लिए टेस्ट मैच नहीं खेला है, लेकिन वे दक्षिण अप्रâीका के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई एकदिवसीय श्रृंखला में सफल गेंदबाजी कर चुके हैं। उन्होंने तीन मैचों में छह विकेट लिए थे। ऐसे में पहले टेस्ट में महंगे साबित हुए प्रसिद्ध कृष्णा और शार्दुल ठाकुर से बेहतर गेंदबाजी करने की उम्मीद आवेश खान से की जा सकती है। वे दक्षिण अप्रâीका के वातावरण से ज्यादा परिचित हो चुके हैं। सोचने वाली बात ये है कि क्या सिर्फ कमजोर गेंदबाजी के कारण ही टीम इंडिया की हार हुई। जी नहीं, टीम इंडिया में अपनी जगह को बरकरार रखने के लिए ऊपरी क्रम से यशस्वी जायसवाल, रोहित शर्मा, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर को अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित करना ही होगा। दक्षिण अप्रâीका एकमात्र देश है, जहां टीम इंडिया अभी तक एक भी टेस्ट शृंंखला नहीं जीती है। इस बार भी नहीं जीत पाएगी। टीम इंडिया दूसरा और अंतिम टेस्ट जीतकर शृंखला को केवल ड्रॉ कर सकती है।

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