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बच्चों के जीवन में आएगी बहार!… थैलेसीमिया के इलाज के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

• जांच के लिए जर्मनी भेजे गए सभी के नमूने
• २३० बच्चों का होगा बोनमैरो ट्रांसप्लांट
सामना संवाददाता / मुंबई । थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के जीवन में बहार लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाया है। इस रोग को हराने के लिए राज्य के २३० थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया गया है। इसके पहले क्रॉस मैचिंग करने के लिए बच्चों के नमूने जांच के लिए जर्मनी भेज दिए गए हैं। राज्य सरकार की इस पहल से थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों पर होनेवाले लाखों के खर्च से उनके परिजनों को मुक्ति मिली है।
क्रॉस मैचिंग अनिवार्य
थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट करने से पहले क्रॉस मैचिंग करना अनिवार्य होता है। थैलेसीमिया के शिकार एक बच्चे का क्रॉस मैचिंग जांच कराने के लिए परिजनों को ६० से ७० हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा बच्चे की अन्य जांचों सहित संपूर्ण उपचार पर उन्हें लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
परभणी में आयोजित दो दिवसीय शिविर में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए २३० बच्चों के नमूनों को लेकर क्रॉस मैचिंग जांच के लिए उन्हें जर्मनी भेज दिया गया है। इस दौरान बीमारी से जूझ रहे बच्चों को अपने जीवन को बढ़ाने के लिए कई टिप्स दिए गए। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के शिविर आगे भी होते रहे तो आनेवाले चंद सालों में राज्य थैलीसीमिया को पूरी तरह से हरा सकेगा।
हर साल हजारों बच्चे होते हैं पीड़ित
समूचे हिंदुस्थान में हर साल हजारों बच्चे थैलेसीमिया का शिकार होते हैं। शरीर में खून की कमी से होनेवाली इस बीमारी की वजह से कुछ बच्चों की मौत भी हो जाती है। जो बच्चे सर्वाइव करते हैं, वह भी सामान्य जीवन नहीं बिता पाते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है। यह माता-पिता से उनके बच्चों में पैâलती है। बच्चे के जन्म से छह से आठ महीने बाद ही उसमें इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से खत्म होने लगती हैं। साथ ही नई सेल्स नहीं बनती हैं। इस वजह से उसके शरीर में खून की कमी रहती है। इस बीमारी में आरबीसी की उम्र १० से २५ दिन रह जाती है, जबकि सामान्य शरीर में यह १२५ दिन तक रहती है। इस वजह से हर २० से २५ दिन में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

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