मुख्यपृष्ठस्तंभश्री-वास्तव उ-वाच : सबसे सुंदर कूड़ा पर्वत

श्री-वास्तव उ-वाच : सबसे सुंदर कूड़ा पर्वत

अमिताभ श्रीवास्तव

अब यदि कोई कहे कि कूड़ा करकट भी कोई सुंदर होता है? तो लोग उसे पागल कहेंगे। और यदि वो कहे कि यह सच है सच ही नहीं, बल्कि सच का पहाड़ है तो? जी हां, यह दुनिया का सबसे सुंदर वो पहाड़ है। दरअसल, कूड़े का ढेर है। दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों की जब-जब बात होती है तो उसमें रोम का नाम जरूर शामिल किया जाता है। शायद इसी वजह से कहते हैं- रोम एक दिन में नहीं बना था। यहां पर कई ऐतिहासिक स्मारक हैं, जिसे देखने के लिए लाखों लोग आते हैं। इसमें एक ऐसा पर्वत भी है, जो इस जगह की खूबसूरती में दाग की तरह से है। पर यह दाग भी सुंदर दाग है। यहां २,००० साल पुराना कूड़े का ढेर है। नेशनल जियोग्राफिक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, रोम के बाहरी इलाके होरिया गैलबे के पास, टाइबर नदी से कुछ ही दूर एक छोटा सा पहाड़ है, जिस पर घास और पेड़ लगे हुए हैं। दूर से देखने पर ये आपको एक मामूली पहाड़ सा लगेगा पर असल में ये एक प्राचीन लैंडफिल, यानी कूड़ा फेंकने की जगह हुआ करती थी। प्राचीन रोम में यहां पर कूड़ा फेंका जाता था, इस वजह से इसे गुजरे जमाने का सबसे बड़ा डंपिंग ग्राउंड भी माना जाता है।

खेत बन गया बिल्ली
खेत तो चावल का था, मगर बना दिया बिल्ली। वैâसे हुआ यह अनोखा चमत्कार? धरती से आप जैसे ही ऊपर उड़ेंगे और नीचे देखेंगे तो चावल के खेत एक बिल्ली की शक्ल में नजर आएंगे। जी हां, यह अद्भुत कलाकारी थाईलैंड के एक किसान की है। थाई किसान ने अपनी इस कलाकारी को अंजाम देने के लिए २०० लोगों के साथ मिलकर ये काम किया, जिन्होंने पूरे खेत में अलग-अलग रंग और अलग-अलग तरह के बीज डाले। थाई किसान ने बताया कि सही जगह पर बीजों को डालना आसान नहीं था, क्योंकि चावल धीरे-धीरे अपने शेड्स बदल लेता है। ये जांचने के लिए एक ड्रोन की मदद ली गई। जो इस बात की मॉनिटरिंग करता रहा कि बीज सही जगह पर डाले जा रहे हैं और बिल्ली का आकार बन रहा है या नहीं। इस आर्टवर्क को देखने के लिए कई विजिटर्स आ रहे हैं। वो ठीक से बिल्ली बना हुआ आर्टवर्क देख सकें इसलिए टावर्स भी लगाए जा रहे हैं। थाईलैंड, इंडिया के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा राइस एक्सपोर्टर है। इस आर्टवर्क को बनाने वाले किसानों का मानना है कि इस फील्ड को देखने के बाद आर्ट और टेक्नोलॉजी में तो लोगों की रुचि बढ़ेगी ही साथ ही टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। है न कमाल।

अंगीठी बन रही मौत
क्या कभी कोई अंगीठी मौत का कारण भी बन सकती है? जी हां, बिल्कुल बन सकती है। बन भी रही है। तो सावधान हो जाने की जरूरत है। दरअसल, इन दिनों देश के अनेक भागों में कड़ाके की ठंड पड़ने से तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है। ऐसे में ताप के लिए चंद लोग कमरों में अंगीठी जला कर सोने के कारण जहरीला धुआं चढ़ने से लोग मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी जलाकर रखने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और कार्बन मोनोआक्साइड सीधे दिमाग पर असर डालती है, जो सांस के जरिए पूरे शरीर में पैâल जाती है। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसी दिसंबर माह में ऐसी कई मौतें हुई हैं। शामली उत्तर प्रदेश की घटना हो या लखनऊ के जियामाऊ की या फिर पटना के पैठानी चक गांव की खबर हो या जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग की। ऐसे ही अरुणाचल प्रदेश, हजारीबाग, पूर्णियां आदि से खबरें आर्इं कि सर्दी से बचने के लिए जलाई गई अंगीठी के कारण मौतें हो गर्र्इं। ध्यान रखें, अंगीठी बंद कमरे में न जलाएं और न ही इसे जलाकर सोएं।

रात जो खत्म नहीं होती
ये तो सब जानते हैं कि पृथ्वी गोल है, जो सूर्य के चक्कर लगाती है और जिस हिस्से में सूरज होता वहां दिन और जिस हिस्से में नहीं वहां रात हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं एक ऐसी जगह है, जहां रात खत्म ही नहीं होती। पूरे तीन महीने केवल रात होती है यहां। जी हां, स्वालबार्ड नामक जगह है यह। स्वालबार्ड आर्कटिक महासागर में बसा है। ये कई आइलैंड का एक समूह है, जो नॉर्वे के सबसे उत्तर में बसा है। बात करें इसके जियलोजिकल बनावट की तो यह मेन लैंड से ४०० मील दूर है। वैसे तो ये नॉर्वे का हिस्सा है, लेकिन यहां उनकी सेना नहीं रहती। ये जगह कई पोलर बियर्स और रेनडियर्स से भरा हुआ है। इस जगह को लेकर और भी कई चौंकाने वाले पैâक्ट्स सामने आए हैं। इस जगह पर सिर्फ चालीस लोग ही रहते हैं। इसके अलावा अगर आप नॉर्दर्न लाइट्स देखना चाहते हैं तो ये उसके लिए बेस्ट प्लेस है। कहा जाता है कि इस जगह पर लोगों को मरने की अनुमति नहीं है। दरअसल, अगर किसी की यहां मौत होगी तो उसकी बॉडी यहां डिकंपोज नहीं हो पाएगी। तापमान की वजह से ऐसा होता है। इस वजह से जब किसी का आखिरी समय आता है तो उसे यहां से बाहर भेज दिया जाता है। है न दिलचस्प।

लेखक ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। धारावाहिक तथा डॉक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

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