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श्री-वास्तव उ-वाच : कैदी गणपति बाप्पा

  • अमिताभ श्रीवास्तव

कैदी गणपति बाप्पा
न-न गणपति बाप्पा कैदी नहीं, बल्कि कैदियों के गणपति बाप्पा हैं ये जो उनके साथ रह रहे हैं। दरअसल, खंडवा की ब्रिटिश कालीन जेल में बंद कैदियों ने जेल के अंदर जेल प्रशासन के साथ मिलकर गणेश उत्सव पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है। कैदियों ने मिलकर पहले तो गणपति जी का पंडाल सजाया, उसमें लाइटिंग की, उसके बाद जेल प्रशासन की मदद से पंडाल में करीब २ फीट की गणेश प्रतिमा की स्थापना की। अब रोज यहां कैदी मिलकर गणेश जी की आरती गाते हैं। खास बात यह है कि गणपति की पूजा करने वाले भी कैदी ही हैं। आरती के दौरान ढोलक बजाने वाले भी कैदी ही है। आरती के समय जेल प्रशासन के लोग कैदियों को एक निश्चित स्थान पर जहां गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई है लाकर उनके साथ पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा करने के पीछे कैदियों का तर्क है कि भगवान गणेश की स्थापना करने के बाद उनके मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है और उनके मन से बुराइयां दूर निकलने लगी है।
जेल में ‘मिल’
शीर्षक से कोई यह न समझे कि जेल में मिल यानी वहां मिलना है किसी को। ये मिल मतलब भोजन से है और अक्सर देखा गया है कि जेल का भोजन घटिया स्तर का होता है। मगर अब ऐसा नहीं है। जेलों के भोजन की गुणवत्ता सुधारने के क्रम में यहां की पाकशालाओ को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि स्वादिष्ट भोजन कैदियों के लिए परोसा जा सके। और ऐसा करने वाले एक जेल को ५ स्टार प्रदान भी किए गए हैं। क्योंकि इस बात को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जेल ने सही साबित कर दिया है। इस तरह से फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल यह उपलब्धि हासिल करने वाली यूपी की पहली जेल बन गई है। फर्रुखाबाद की जिला कारागार की रसोई को आधुनिक कर दिया गया है। जेल के अंदर इस नई पाकशाला में खाना बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लग गई हैं। इनमें हाथ के बजाय अब मशीनों से खाना तैयार हो रहा है। यही वजह है कि बंदियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन देने और खाद्य सामग्रियों के बेहतर रख-रखाव के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण ने प्रमाण पत्र प्रदान किया है, जिसमें फाइव स्टार रेटिंग है।
आफत न बन जाए ये बीमारी
पूरा विश्व अभी भी कोरोना जैसी बीमारी से दो हाथ कर रहा है और ऐसे में यदि कोई रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप बढ़ जाए तो आफत का पहाड़ ही टूट पड़ना है। ऐसा हुआ भी है। अर्जेंटीना में अज्ञात मूल के निमोनिया से एक तीसरे व्यक्ति की मौत हो गई है। उत्तर-पश्चिमी तुकुमान प्रांत में नौ लोग सांस की रहस्यमय बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें एक निजी क्लिनिक के आठ चिकित्सा कर्मचारी भी शामिल हैं। इससे पहले दो स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हुई थी और अब क्लिनिक में एक मरीज ने भी दम तोड़ दिया है। अधिकारी बीमारी के स्वरूप पर परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड -१९, फ्लू, इन्फ्लूएंजा-ए और बी, लेगियोनेला वायरस और हंटा वायरस की आशंकाओं को चिकित्सकों ने पहले ही खारिज कर दिया है। मरीजों के लक्षणों में उल्टी, तेज बुखार, दस्त और शरीर में दर्द शामिल है। अभी तक कोई कारण पता नहीं चल सका है।
सुस्ती लाए सेरोटोनिन
ये सेरोटोनिन क्या है? सुस्ती क्यों लाता है? क्या आपको खाना खाने के बाद सुस्ती आती है? क्यों आती है? पता भी है? दरअसल भोजन के बाद हमारी आंत और पूरा शरीर काम करने लगता है, यह तो सब जानते हैं। मगर सुस्ती क्यों आती है? ब्लड शुगर का लेवल कम होना इसकी वजह हो सकती है, क्योंकि ज्यादा शुगर वाला खाना खाने के बाद हमारा ब्लड शुगर बढ़ता है और फिर तेजी से घट सकता है, जिससे थकान अनुभव होता है। हालांकि इसके पीछे हॉर्माेन भी अहम भूमिका निभाते हैं। खाने के बाद हमारे शरीर में सेरोटोनिन यानी फील गुड हॉर्माेन तेजी से बढ़ता है। इसकी वजह से आपको नींद का अनुभव होता है। स्पोट्र्स मेडिसिन जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक खाने के बाद की सुस्ती सेरोटोनिन हॉर्माेन से जुड़ी हुई है। डॉक्टर शॉर्ट के मुताबिक जिन खाने की चीजोेंं में ट्रिप्टोफैन नाम का अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में होता है, उसे खाने से नींद ज्यादा आती है। ये अमीनो एसिड पनीर, अंडा, टोफू जैसी हाई प्रोटीन वाली चीजों में होता है। इसके अलावा जिन चीजों में मेलाटोनिन का स्तर ज्यादा होता है, उससे भी नींद आ सकती है।

लेखक सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व दूरदर्शन धारावाहिक तथा डाक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

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