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श्री-वास्तव उ-वाच : जब टीचर ने ही बेच दी क्लास

  • अमिताभ श्रीवास्तव

जब टीचर ने ही बेच दी क्लास
हमारे देश में बड़े-बड़े ठग बैठे हैं। मिस्टर नटवरलाल की तरह। अब देखिए एक मास्टर साहब ने अपने ही स्कूल  की एक क्लास रूम को ही बेच डाला। है न हास्यास्पद ठगी। मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का है जहां के कुंदरकी विकास खंड क्षेत्र के गांव पीतपुर नैयाखेड़ा में तैनात अध्यापक मुजाहिद हुसैन ने सरकारी स्कूल में बने एक अतिरिक्त कक्ष को ही बेच डाला। इतना ही नहीं जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा वह उसे तुड़वा भी दिया। टीचर ने इस कक्ष को ३० हजार रुपए में बेचा, जिसके बाद प्रधान ने अध्यापक के खिलाफ एक्शन लेते हुए शिकायत की। शिकायत होने पर जांच करने पहुंचे खंड अधिकारी ने भी शिकायत सही पाई और इसकी रिपोर्ट बीएसए को भेज दी है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालय में मुजाहिद हुसैन अध्यापक हैं। विद्यालय में साल २०१० में एक अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कराया गया था। जिसे मुजाहिद हुसैन ने क्षेत्र के एक व्यक्ति को ३० हजार रुपए में बेच दिया। हुसैन साहब धर लिए गए हैं अब।
पंचायत है या बेवकूफीयत?
स्त्री शिक्षा या स्त्रियों को खुला आसमान मिले, ऐसी योजनाएं बन रही है। देश की लड़कियां ओलिंपिक आदि खेलों में नाम कमा रही हैं मगर आज भी ऐसे गांव हैं जहां लड़कियों को पाबंदी में डाला जा रहा है। उन पर एक्शन लिया जा रहा है। पंचायती राज का मजाक उड़ाया जा रहा है। अब देखिए न झारखंड की महिलाएं एक ओर खेलों में देश का नाम रोशन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर शिकंजा कसा जा रहा है। पर अब झुकती नहीं हैं महिलाएं। इसका उदाहरण है झारखंड की एक बेटी जिसे ट्रैक्टर भी चलाने नहीं दिया गया तो वो उठ खड़ी हुई। दरअसल एक युवती के ट्रैक्टर चलाने पर पंचायत ने उसके खिलाफ फरमान जारी किया है। उसके खिलाफ जुर्माना लगाया है और माफी मांगने को कहा है। उसे सामाजिक बहिष्कार करने की धमकी भी पंचायत द्वारा दी जा रही है, साथ  ही दोबारा ट्रैक्टर न चलाने को कहा जा रहा है। लेकिन युवती ने पंचायत का यह फरमान मानने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला राज्य के गुमला जिले के विशुनपुर प्रखंड के शिवनाथपुर पंचायत का है। यहां की रहनेवाली मंजू उरांव के ट्रैक्टर चलाने से बवाल मच गया है। पंचायत की बेवकूफीयत देखो युवती के ट्रैक्टर चलाने से महामारी पैâलती है जैसा अंधविश्वास पैâला रही है।
दूल्हों का बाजार
हमारा देश इसीलिए तो अजब है। परंपराएं ऐसी कि हैरान कर देती हैं। अब जानिए कि एक ऐसा गांव भी है जहां दूल्हों का बाजार लगता है और लड़कियां अपना पति चुनती हैं। बिहार के मिथिलांचल इलाके में हर साल दूल्हों का बाजार लगता है। जिसे सौराठ सभा कहते हैं। इसकी शुरुआत १३१० ईस्वी में हुई थी। यहां पर हजारों लड़के आते हैं और लोग अपनी बेटियों को भी यहां लेकर आते हैं। लड़कियां लड़कों को देखती हैं। घरवाले भी लड़के की पूरी डीटेल्स पता करते हैं। इतना ही नहीं इसके बाद दोनों का मिलन होता है, जन्मपत्री मिलाई जाती है। इसके बाद योग्य वर का चुनाव किया जाता है और फिर दोनों की शादी करवाई जाती है। कहा जाता है कि ७०० साल पहले कर्णाट वंश के राजा हरिसिंह देव ने सौराठ की शुरुआत की थी। इसके पीछे उनका मकसद था कि एक ही गोत्र में विवाह न हो, बल्कि वर-वधू के गोत्र अलग-अलग हो। इस सभा में सात पीढ़ियों तक ब्लड रिलेशन और ब्लड ग्रुप मिलने पर शादी की इजाजत नहीं दी जाती है। यहां बिना दहेज, बिना किसी तामझाम के लड़कियां अपने पसंद के लड़कों को चुनती हैं और उनकी शादी होती है। मिथिलांचल में ये प्रथा आज भी बहुत मशहूर है और हर साल इसका आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों युवा आते हैं।
वाह री पत्नी!
पति के साथ किसी दूसरी महिला को देखते ही भड़क उठती है पत्नियां। मगर यहां तो मामला ऐसा है जिसमें पत्नी ही अपने पति के लिए गर्लप्रेंâड की जॉब देना चाह रही है। जी हां, थाईलैंड की रहनेवाली ४४ साल की पत्थीमा नाम की महिला ने विज्ञापन दिया कि तीन पढ़ी-लिखी और खूबसूरत महिला की तलाश है जो पति को खुश रखें और काम में हाथ बंटा सके। इसके बदले में गर्लफ्रेंड को ३२ हजार रुपए प्रति महीने बतौर सैलरी मिलेगी। बैंकॉक अपार्टमेंट से पत्थीमा ने इस बारे में टिकटॉक वीडियो में बताया कि वह अपने पति के सात नहीं सो रही है यह उसे एक बुरी पत्नी की तरह महसूस करता है। तीन गर्लफ्रेंड की तलाश है जो चाहे तो पति के साथ सो सकती है और घर के कामकाज में हाथ बंटाए और बच्चों की देखभाल कर सके। पत्थीमा ने विज्ञापन में जो महिलाओं के लिए शर्त रखी वो कुछ इस तरह है। अप्लाई कर रही महिलाओं का एचआईवी टेस्ट जरूरी होगा। उम्र ३०-३५ साल के बीच होनी चाहिए। हाई  स्कूल या स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। महिलाओं को खाना-पीना और रहना फ्री होगा।

लेखक सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व दूरदर्शन धारावाहिक तथा डाक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

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