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श्रीवास्तव उवाच : गूगल सीआईडी

अमिताभ श्रीवास्तव। अब ये गूगल सीआईडी क्या है? दरअसल बड़ा दिलचस्प मामला है ये। गूगल यदि सीआईडी जैसा काम करे तो उसे यही कहेंगे न। जी हां, इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में ऐसी एक घटना हुई, जिसने गूगल को थैंक्स कहा होगा। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि एक शख्स साइकिलें चुराता है लेकिन पुलिस को इसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिल रहा था। पुलिस ने अपनी एक टीम को सक्रिय किया और गूगल अर्थ वैâमरे की मदद से शख्स के घर के पीछे बने गार्डन को देखा तो उसकी पोल खुल गई। पुलिस ने पाया कि शख्स के घर के पीछे साइकिलें ही साइकिलें दिख रही हैं। उसने इतनी साइकिलें चोरी कर ली कि उसका पूरा का पूरा बैक गार्डन ही उन चोरी की साइकिलों से भर गया। शख्स के घर से पुलिस ने ५०० से ज्यादा साइकिलें बरामद की हैं। पुलिस ने इस बारे में अपने एक बयान में बताया कि इस शख्स के खिलाफ कई बार पहले भी शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं लेकिन जब जांच की गई तो सारी बात सामने आई। है न फिर गूगल सीआईडी।
तरीका-ए-तलाक
समाज में भी अजीबोगरीब किस्से होते हैं। तरह-तरह के मामले आते हैं, मगर जब कोई ऐसा मामला हो जो बड़ा ही अनोखा लगे तो खबर बन जाता है। फिर यदि खबर उस देश की हो जहां कानून ही बड़े सख्त हो तो सोचने में आता है कि बड़ा ही गजब है। अब देखिए न एक तलाक में बीवी ने अपने शौहर को ऐसे फंसाया कि बेचारे के पास तलाक के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा। घटना सऊदी अरब के एक शहर की है। बीवी-शौहर के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया फिर यह कहासुनी इतनी आगे बढ़ गई कि तलाक की भी नौबत आ गई। पति तलाक के लिए राजी नहीं हुआ तो महिला ने दूसरा तरीका अपनाया। महिला ने अपने पति को धमकाया कि अगर वह तलाक के लिए राजी नहीं होगा तो वह सड़कों पर न्यूड होकर घूमेगी। इसके बाद पति की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसने अपनी पत्नी को बहुत मनाया लेकिन वो नहीं मानी। आखिरकार उसे तलाक देना पड़ा। हालांकि बाद में बाद पति शरिया कोर्ट भी गया और उसने कोर्ट में केस दायर करते हुए तलाक रद्द करने की अर्जी दायर की।
नाम अब्दुल है मेरा..
एक गाना है नाम अब्दुल है मेरा सब पर नजर रखता हूं..किंतु यहां जिस अब्दुल की बात है वो न केवल अपने ध्येय पर नजर रखता है बल्कि कमाल भी करता है। अभी ज्यादा उम्र नहीं है। मध्यप्रदेश के रतलाम का है और विश्व में अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। अब्दुल जब सात साल का था तो एक हादसे में उसने अपने दोनों हाथ गंवा दिए। घर-परिवार के लोग निराश थे लेकिन शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि एक दिन उनका अब्दुल अपने जज्बे से उनका नाम इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा देगा। अब्दुल आज स्विमिंग चैंपियन हैं। अब तक उन्होंने ११ मेडल अपने नाम किए हैं। अब्दुल एक बार फिर चैंपियन बनने को तैयार हैं। वो राजस्थान के उदयपुर पहुंच चुके हैं, जहां कल से २१वां नेशनल पैरा स्विमिंग टूर्नामेंट शुरू हो गया है। इस टूर्नामेंट में २३ राज्यों के ४०० पैरा स्विमर शामिल हो रहे हैं। टूर्नामेंट २७ मार्च तक चलेगा। यहीं अब्दुल करिश्मा दिखाएगा। हौसला हो तो आसमान भी झुक जाता है।
क्या आपके खून में प्लास्टिक है?
क्या आपके खून में प्लास्टिक है? ये सवाल पूछिए अपने आप से क्योंकि हो सकता है कि हो। ये अलग बात है कि सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद करने और इस्तेमाल नहीं किए जाने को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग अभियान चलाए जा रहे हैं। मगर अब एक नया अध्ययन सामने आया है, जिसके मुताबिक इंसानों के खून में भी प्लास्टिक के कण मिले हुए हैं। अध्ययन के हिसाब से ७७ फीसद लोगों के खून में माइक्रो-प्लास्टिक पाया गया है। डच शोधार्थियों ने एक अध्ययन में पाया कि प्लास्टिक के सबसे चर्चित रूप यानी पॉलीइथाइलीन टेरीप्थेलेट के कण इंसान के खून में मौजूद हैं। पीईटी का इस्तेमाल आमतौर पर पानी की बोतल, खाने और कपड़ों की पैंकिग में किया जाता है। यह अध्ययन वाकई में चिंता में डालने वाला है। यही नहीं प्लास्टिक के खून में मिलने से शरीर में क्रोनिक इंफ्लामेशन की शिकायत बढ़ सकती है। इस अध्ययन में शामिल २२ लोगों के खून के नमूनों की पांच तरह के प्लास्टिक की जांच के लिए जांच की गई। जिसमें पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्ट्रीन, पॉलीमिथाइल मेथाक्रायलेट, पॉलीथाइलिन और पॉलीथाइलिन टेरिप्थेलेट शामिल हैं। अब आप सोचिए आपको प्लास्टिक कितना यूज करना है?

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