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स्टेट बैंक का स्ट्रेट ड्राइव! …. मोदी सरकार को दिखाया हकीकत का आईना

• औसत से कम रहेगी जीडीपी की ग्रोथ रेट
• ५.८ फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाएगी जीडीपी
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की भाजपा सरकार हर फोरम पर देश में जोरदार विकास की डुगडुगी बजाने से बाज नहीं आती है। मगर पिछले कुछ दिनों से बजट पूर्व की तैयारियों के सिलसिले में जो खबरें आ रही हैं, उसे देखकर तो यही लगता है कि सरकार सिर्फ हवा में बातें कर रही है। अब देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने सरकार के विकासवाली गेंद पर क्रिकेट की भाषा में ‘स्ट्रेट ड्राइव’ लगाते हुए मोदी सरकार को हकीकत का आईना दिखा दिया है। एसबीआई का कहना है कि देश की जीडीपी ग्रोथ औसत से कम रहेगी और यह ५.८ फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाएगी।
बता दें कि एसबीआई की रिसर्च टीम ने जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर ५.८ फीसदी कर दिया है। अनुमान है कि यह और कम हो सकता है। बता दें कि सरकार की तरफ से जुलाई-सितंबर, २०२२ तिमाही के जीडीपी आंकड़े आज ३० नवंबर को जारी किए जाने हैं। एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष की अगुवाई वाली टीम के मुताबिक दूसरी तिमाही में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को छोड़कर बाकी कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में १४ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में ३५ प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में इन कंपनियों के राजस्व में वृद्धि दर अच्छी रही है लेकिन उनके लाभ में एक साल पहले की तुलना में करीब २३ प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र को छोड़कर अन्य लिस्टेड कंपनियों के मार्जिन पर दबाव भी देखा गया है। उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों का परिचालन मार्जिन दूसरी तिमाही में घटकर १०.९ प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह १७.७ प्रतिशत था।

एसबीआई रिसर्च टीम ने मैन्युपैâक्चरिंग सेक्टर में कमजोरी और मार्जिन के बढ़ते दबाव को देखते हुए जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान में कटौती की है। एसबीआई रिसर्च की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है। एसबीआई रिसर्च टीम के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ रेट करीब ५.८ प्रतिशत रह सकती है, जो औसत अनुमान से ०.३० प्रतिशत कम है।

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