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स्टेरॉयड ड्रॉप का आई फ्लू में हो रहा इस्तेमाल …छिन जा रही आंखों की रोशनी! …महाराष्ट्र में बढ़ी मरीजों की संख्या

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई और महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में आई फ्लू होने पर लोग घरेलू उपचार को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोग डॉक्टरी सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदकर आंख में डाल रहे हैं। इसी स्टेरॉयड के डंक से लोगों की आंखें भी छिन रही हैं। ऐसे ही दो मामले उत्तर प्रदेश में सामने आए हैं, जिसमें मरीज की आंखों की रोशनी चली गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आई फ्लू के शुरुआती लक्षणों में लापरवाही करना और डॉक्टर के पास न पहुंचना घातक हो सकता है। आंखों में होनेवाली खुजली, पानी या कीचड़ निकलने पर ज्यादा मलना या रगड़ना भी नुकसानदायक है।
मानसून के दौरान कंजंक्टिवाइटिस सबसे आम संक्रमणों में से एक है। हर साल मानसून शुरू होते ही आंखों में इंफेक्शन, कंजंक्टिवाइटिस की शिकायतें बढ़ जाती हैं। इस बार भी पूरे हिंदुस्थान में आई फ्लू के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यह बीमारी बहुत ज्यादा संक्रामक है और काफी दर्दनाक भी है। महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों में आई फ्लू से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र में कंजंक्टिवाइटिस वायरल के करीब साढ़े तीन लाख मरीज मिले हैं। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब साढ़े तीन लाख लोग कंजंक्टिवाइटिस वायरल यानी आई फ्लू की चपेट में आ चुके हैं। सबसे ज्यादा मरीजों की बाढ़ बुलढाणा जिला में आई है। बुलढाणा में सबसे ज्यादा ४४,३९८ मामले हैं। पुणे में कंजंक्टिवाइटिस के मरीजों की संख्या २८,०४२ तक रिपोर्ट की गई है। इसके साथ ही जलगांव में २२,४१७, नांदेड़ में १८,९९६, चंद्रपुर में १५,३४८, अमरावती में कंजंक्टिवाइटिस के १४७३८ मामले सामने आए हैं। मुंबई में कंजंक्टिवाइटिस के २,८६२ मरीज मिले हैं।
कितना खतरनाक है ये वायरस
इस फ्लू इंफेक्शन की वजह एडिनोवायरस है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों पर अटैक करनेवाला ये वायरस ज्यादा खतरनाक नहीं है। डेढ़ से दो हफ्ते में वायरस का असर खत्म हो जाता है। वैसे इस वायरस पर शोध जारी है, ताकि पता चल सके कि इस बार संक्रमण अधिक पैâलने का कारण वायरस का कोई नया स्ट्रेन तो नहीं है।
आई फ्लू से बचाव के तरीके
बचाव के लिए आंखों को साफ पानी से धोते रहें। यदि आंखें संक्रमित हो गए हैं तो पानी न छिड़कें, आंखों को गुनगुने पानी से साफ कर सकते हैं। चश्मा लगाकर ही घर से बाहर निकलें। दूसरे के रुमाल या चश्मे का प्रयोग न करें। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें। हाथों को साफ रखें और हाथ मिलाने और बारिश में भीगने से बचें।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
यदि आई फ्लू है तो बिना देर किए डॉक्टर के पास पहुंचें। डॉक्टर जो दवा लिखेंगे उसका असर देखने के लिए दोबारा बुलाते हैं। कई बार इलाज बदलना पड़ता है। इसलिए डॉक्टरी सलाह के बिना कोई दवा न लें। इससे आंख खराब होने का खतरा है।
-डॉ. शुभांगी अंबाडेकर, नेत्र रोग विशेषज्ञ

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