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पाकिस्तान से आए स्टिकी बम ने उड़ाई सुरक्षाबलों की नींद

  • अधिकारियों ने माना जम्मू-कश्मीर में है स्टिकी बमों की भरमार

सुरेश एस. डुग्गर / जम्मू

कश्मीर में स्टिकी बम मिलने से एक बार फिर सुरक्षा बलों की नींद उड़ गई है। बता दें कि कश्मीर में फिर से स्टिकी बम मिले हैं। इसने सुरक्षाबलों की चिंता को बढ़ा दिया है। हालांकि अधिकारी मानते थे कि प्रदेश में स्टिकी बमों की भरमार है जिनके इस्तेमाल के लिए पाक परस्त आतंकी मौके की तलाश में हैं।
उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर से एक हाइब्रिड आतंकवादी से पहली बार मैग्नेटिक आईईडी (स्टिकी बम) की बरामदगी से यह बात पक्की हो गई है कि अब कश्मीर में आतंकी संगठनों के हाथों में यह घातक हथियार पहुंच चुका है। पहली बार सोपोर से मैग्नेटिक आईईडी की बरामदगी ने घाटी में तैनात सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इसके बाद एजेंसियों के लिए चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि जम्मू में फरवरी माह में स्टिकी बम के बरामद होने के बाद से ही कश्मीर पुलिस जोन ने इससे निपटने की रणनीति पहले से तैयार कर ली थी। इस साल ५ जुलाई को रियासी से पकड़े गए लश्कर आतंकी की निशानदेही पर बरामद दर्जनभर स्टिकी बमों की बरामदगी कोई बड़ी खबर नहीं मानी गई थी जबकि चौंकानेवाली और दहशतजदा करनेवाली खबर यह है कि ऐसे दर्जनों स्टिकी बमों की प्रदेश में भरमार है जिनका मुख्य निशाना टूरिस्ट व वैष्णो देवी की यात्रा में शामिल होनेवाले हैं। हालांकि पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पाकिस्तान से तस्करी कर लाए गए स्टिकी बमों को एक गंभीर खतरा बताया था लेकिन यह भी कहा कि टूरिस्टों व वैष्णो देवी की यात्रा के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है जो सुचारु रूप से चल रही है। पर खुफिया अधिकारी स्थिति कुछ और ही बयान करते थे। उनका कहना था कि वैष्णो देवी यात्रा के साथ-साथ अब टूरिस्टों पर भी स्टिकी बमों का खतरा भयानक तौर पर मंडराया है। एक सूत्र के बकौल, रियासी से पकड़े गए दोनों आतंकियों ने पूछताछ के दौरान रहस्योद्घाटन भी किया था कि दर्जनों आतंकी स्टिकी बमों के साथ दोनों यात्राओं के मार्गों पर घुस चुके हैं और वे सिर्फ मौके की तलाश में हैं। तब इस रहस्योद्घाटन के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किए जाने के साथ ही श्रद्धालुओं के काफिलों के आसपास स्थानीय लोगों के अतिरिक्त टूरिस्टों को भी फटकने न देने के निर्देश दिए गए थे।
दरअसल इन मैग्नेटिक आईईडी को बहुत खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई थी जहां इसका इस्तेमाल टारगेट किलिंग के लिए किया गया था। हालांकि उन्होंने कहा कि कश्मीर में मैग्नेटिक आईईडी का आना कोई गंभीर बात नहीं है क्योंकि सुरक्षाबलों के पास पहले से ही मजबूत निगरानी तंत्र मौजूद है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को कम करने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई बैठकें बुलाई गईं हैं।
अधिकारी ने कहा कि टारगेट किलिंग में पिस्तौल का इस्तेमाल और मैग्नेटिक आईईडी का उपयोग उन प्रमुख चुनौतियों में से एक है जिनका वे सामना कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि फरवरी के महीने में जम्मू संभाग में मैग्नेटिक आईईडी मिली थी। उस दौरान अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़ी चुनौती रही लेकिन इससे निपटने के लिए जमीनी स्तर पर हर प्रयास किए गए थे और व्यापक योजनाएं तैयार की गई थीं। आगे भी इनसे निपटने को योजनाएं हैं पर इन योजनाओं की सच्चाई यह है कि सिवाय वाहन चालकों को खबरदार करने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया गया है।

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