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जम्मू कश्मीर में स्टिकी बम की वापसी

सुरेश एस. डुग्गर / जम्मू । एक साल के अरसे के बाद एक बार जम्मू-कश्मीर में स्टिकी बमों का खतरा मंडराने लगा है। कल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर बायपास में बत्रा अस्पताल के पास एक स्टिकी बम को निष्क्रिय करने के बाद
पुलिस का कहना था कि आतंकी आने वाले दिनों में ऐसे बमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

बता दें कि पिछले साल कश्मीर में स्टिकी बमों के दो हमले हुए थे। उसके बाद सांबा में बॉर्डर पर इसकी एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। हालांकि उसके बाद न ही इनकी कोई बरामदगी हुई थी और न ही कोई इस्तेमाल हुआ, जिस कारण सुरक्षाबल इनके प्रति लापरवाह हो गए थे।

दरअसल अभी आईईडी और हथगोलोेंं के कामयाब व नाकाम हमलोेंं से सुरक्षाबल जूझ ही रहे थे कि स्टिकी बमों की बरामदगी और कई खेपों के जम्मू-कश्मीर में पहुंच जाने की खबरों ने सभी को दहशतजदा कर दिया है। इसके प्रति सुरक्षाधिकारियों ने चेताते हुए कहा है कि यह भयानक और शक्तिशाली भी हो सकते हैं और आतंकी इनसे तबाही मचा सकते हैं।

पिछले साल मार्च महीने में कश्मीर में एक टिप्पर को स्टिकी बम से उड़ाने की नाकाम कोशिश के बाद कुछ स्टिकी बम बरामद हुए तो खुफिया अधिकारियों ने कहा था कि अब आतंकी ग्रेनेड व आईईडी के स्थान पर स्टिकी बमों को तरजीह दे सकते हैं। इसके पीछे के कारणों को सुरक्षाधिकारी कुछ इस तरह से गिनाते थे कि ये बड़ी मात्रा में जम्मू-कश्मीर पहुंच चुके हैं, आसानी से छुपाए जा सकते हैं और मेटल डिटेक्टर की नजर से भी बच जाते हैं।

ऐसे में जम्मू–कश्मीर के नागरिकों का दहशतजदा होना जायज है। इसका भी कारण सुरक्षाधिकारियों की वह चेतावनी है,जिसमें वे कहते थे कि आतंकी इन स्टिकी बमों का इस्तेमाल आम नागरिकों के वाहनों पर चिपका–कर विस्फोट करने के इरादे लिए हुए हैं। दहशत का आलम सुरक्षाबलों के गलियारों में भी देखा जा सकता है,जो इन स्टिकी बमों को तलाश करने की तरकीबें तलाश रहे हैं तथा सुरक्षा बंदोबस्त में ऐसे उपकरण शामिल करने पर जोर देने लगे हैं,जिनसे इन स्टिकी बमों के हमलोेंं को रोका जा सके।

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