मुख्यपृष्ठनए समाचारपैसे देकर कराई पत्थरबाजी! ...कानपुर में नेताओं ने बांटे रुपए

पैसे देकर कराई पत्थरबाजी! …कानपुर में नेताओं ने बांटे रुपए

• बिरयानी खिलाकर उकसाया
सामना संवाददाता / कानपुर
यूपी के कानपुर में ३ जून को हुई हिंसा के दौरान बच्चों ने भी जमकर पथराव और बमबाजी की थी। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो की जांच से इस बात की पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर पुलिस ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बच्चों को पैसे देकर नई सड़क पर हिंसा कराई गई थी। हिंसा से पहले कई बार बिरयानी भी बांटकर बच्चों को खिलाई गई। साथ ही बच्चों को मजहबी कट्‌टरता का भी पाठ पढ़ाया गया था। कश्मीर में पत्थरबाजी करने के लिए आतंकी ऐसा करते रहे हैं। इलाके के मदरसे में पढ़नेवाले छात्र भी पुलिस के रडार पर हैं।

चैनल बनाकर बांटे गए रुपए
कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा को जांच का आदेश दिया था। पुलिस की जांच में सामने आया कि नाबालिग बच्चों को रुपए बांटकर हिंसा के लिए डायवर्ट किया गया। बच्चों तक फंड सीधे नहीं, बल्कि अलग चैनल से भेजे गए। यानी इलाके के नेताओं और गली-मोहल्ले के लोगों से रुपए बंटवाए गए। तय समय पर सैकड़ों नाबालिग हाथ में पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे और जमकर पथराव किया था।

फंडिंग की हो रही है जांच
पुलिस की जांच में सामने आया है कि कानपुर के नामी बिल्डर हाजी वसी समेत आठ बिल्डर हिंसा के मास्टर माइंड हयात जफर हाशमी को फंडिंग करते थे। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि बिल्डरों की फंडिंग की रकम तो हिंसा पैâलाने के लिए इस्तेमाल नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा।

जांच के दायरे में मदरसों के छात्र
हिंसा में शामिल बच्चों की जांच कर रही टीम के रडार पर इलाके के मरदसे भी हैं। वायरल वीडियो और सीसीटीवी वैâमरे में वैâद बच्चों का फोटो और मदरसों में पढ़नेवाले बच्चों की शिनाख्त कराई जा रही है। फिलहाल अभी तक इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है। हिंसा प्रभावित क्षेत्र में एक-दो नहीं छह से अधिक बड़े मदरसे चलते हैं। इसमें कानपुर के अलावा कई जिलों के बच्चे पढ़ाई करते हैं।

हिंसा की आग में बच्चों को झोंका
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि बच्चों को इसलिए आगे किया गया कि पुलिस इन पर कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकती है। इसके साथ ही हिंसा के लिए इन्हें आसानी से मोटिवेट किया जा सकता है। पुलिस बच्चों से पूछताछ के लिए ज्यादा सख्ती नहीं कर सकती है। हिंसा के लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट भी हैं। इसके चलते बच्चों को हिंसा के लिए फंडिंग करके उकसाया गया।

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