शोध पर रोक!

 केंद्र का ‘मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप’ के साथ सौतेला व्यवहार

 उच्च शिक्षा नीति के तहत सरकार द्वारा दी जाती है छात्रवृत्ति

देश भर के लगभग ३० विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और डॉक्टरेट छात्रों ने मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप (एमएएनएफ) के तहत मौजूदा पेâलो के लिए छात्रवृत्ति बढ़ाने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। छात्रों ने छात्रवृत्ति देने में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य सभी शोध पेâलोशिप के लिए छात्रवृत्ति राशि हाल ही में बढ़ा दी गई है, जबकि छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को दी जाने वाली एमएएनएफ की छात्रवृत्ति राशि वही है।
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी ने हाल ही में संसद में विभिन्न समान छात्रवृत्तियों की ओवरलैपिंग का हवाला देते हुए एमएएनएफ को बंद करने के वेंâद्र के पैâसले की घोषणा की थी। शोधकर्ताओं के एक संगठन, ऑल इंडिया रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन (एआईआरएसए) ने ईरानी को लिखे अपने पत्र में कहा कि शोध देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसमें निवेश करना और पेâलोशिप को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। पत्र में कहा गया है, ‘यह योजना क्रीमीलेयर आय से नीचे आने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए एक वरदान की तरह थी, ताकि उन्हें वित्तीय बाधाओं की चिंता किए बिना पीएचडी और एमफिल जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।’ शोधकर्ताओं ने कहा कि छात्रवृत्ति का अंतिम संशोधन २०१९ में किया गया था, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा जनजातीय मामलों के मंत्रालय जैसे अन्य मंत्रालयों द्वारा वितरित अन्य सभी छात्रवृत्तियों को इस वर्ष संशोधित किया गया था। विपक्षी दलों के छात्र संगठनों एनएसयूआई और एसएफआई ने भी इस मामले को उठाया है। एसएफआई के महासचिव मयूख विश्वास ने कहा, ‘आगामी बैचों के लिए एमएएनएफ को बंद करने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मौजूदा एमएएनएफ फेलो के लिए राशि में वृद्धि नहीं करके अल्पसंख्यक छात्रों के खिलाफ भेदभाव जारी रख रही है।’

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