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चिह्न की चिंता छोड़ो… शरद पवार ने लिया पार्टी के पुनर्निर्माण का संकल्प

सामना संवाददाता / मुंबई

चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और चुनाव चिह्न को अजीत पवार गुट को दिए जाने पर शरद पवार ने कहा था कि देश ने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी कि जिसने पार्टी बनाई, उसे ही पार्टी से निकाल दिया गया हो, लेकिन राकांपा के साथ ऐसा हुआ। शरद पवार ने अपनी पार्टी के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उन्होंने आगे कहा कि न केवल पार्टी का नाम बल्कि राकांपा का प्रतिष्ठित ‘घड़ी’ चिह्न भी छीन लिया गया, जो कानून के अनुरूप नहीं है। हर कोई जानता है कि राकांपा की स्थापना किसने की। पवार ने आगे कहा कि सिंबल खोने को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं अब तक १४ चुनाव लड़ चुका हूं। उनमें से पांच ‘बैलों की जोड़ी’, ‘गाय और बछड़ा’, एक ‘चरखा’, ‘हाथ’ और अंत में ‘घड़ी’ के चिह्न पर थे। चुनाव चिह्न छीनने का मतलब यह नहीं कि संगठन खत्म हो गया।
शरद पवार ने अपनी पार्टी का सिंबल किया लॉन्च
शरद पवार ने रायगढ़ में अपनी पार्टी का सिंबल लॉन्च किया। भारत के चुनाव आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार के प्रतीक के रूप में ‘तुतारी (एक पारंपरिक तुरही) बजाता हुआ आदमी’ आवंटित किया था।
चुनाव चिह्न में एक आदमी को उल्टे ‘सी’ के आकार में एक लंबा, घुमावदार, तुरही जैसा वाद्ययंत्र बजाते हुए दिखाया गया है, जिसे धागे या स्ट्रिंग से सजाया गया है। तुतारी को तुरही या तुरतुरी के रूप में भी उच्चारित और लिखा जाता है और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में इसका स्वरूप कुछ हद तक भिन्न होता है। पहले यह उपकरण बैल की सींगों से बनाया जाता था। प्राचीन काल में तुतारी को औपचारिक रूप से बजाने से राजाओं, रईसों और अन्य उच्च गणमान्य व्यक्तियों के आगमन की सूचना मिलती थी। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के दरबार में तुतारी एक लोकप्रिय वाद्ययंत्र था।

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