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फर्जी दस्तावेजों की कहानी, बांग्लादेशी बन रहे हैं हिंदुस्थानी!

सामना संवाददाता / रांची
घुसपैठ करनेवाले बांग्लादेशी हिंदुस्थान के लिए एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। प्रशासन में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों एवं अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति करनेवाले नेताओं की मदद से घुसपैठिए बांग्लादेशी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राविंग लाइसेंस और पासपोर्ट तक हासिल कर ले रहे हैं। हिंदुस्थानी बनने के लिए बांग्लादेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हिंदुस्थानी नागरिक बनने के बाद बांग्लादेशी लोग सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर रहे हैं और सरकारी संसाधनों का फायदा ले रहे है।
बांग्लादेशियों के बढ़ते प्रभाव पर गृह विभाग को भी झारखंड से रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में जिक्र था कि बांग्लादेशी बिहार और बंगाल के रास्ते झारखंड आ रहे हैं। इसमें अवैध प्रवासियों को चिह्नित करने के लिए टास्क फोर्स गठित करने की सिफारिश की गई थी। आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि बांग्लादेश के करीब स्थित झारखंड के जिलों में मुस्लिम आबादी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। मसलन, पाकुड़ में २००१ में मुस्लिम आबादी ३३.११ प्रतिशत थी जो २०११ में ३५.८७ प्रतिशत हो गई। बांग्लादेशी नागरिक को हिंदुस्थानी पासपोर्ट जारी कर दिए जाने जैसे छिटपुट मामले हर महीने-दो महीने में सामने आते रहते हैं। जांच में पता चला कि ऐसे लोगों के पास बांग्लादेश और हिंदुस्थान दोनों देशों की नागरिकता होती है। खुफिया एजेंसियों ने भी समय-समय पर सरकारों को ऐसी रिपोर्ट भेजी है, जिनमें बांग्लादेशियों के घुसपैठ के तौर-तरीकों के बारे में विस्तृत ब्योरा दर्ज है। गृह विभाग को भेजी ऐसी ही एक रिपोर्ट में बताया गया है कि संथाल परगना के साहिबगंज में जमात-उल-मुजाहिदीन, बांग्लादेश व पॉपुलर प्रंâट ऑफ इंडिया और अंसार-उल-बांग्ला जैसे प्रतिबंधित संगठनों की पकड़ बढ़ रही है।

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