मुख्यपृष्ठखबरेंबिहार में सियासत की कहानी, भाजपा के चिराग, जदयू के साहनी!

बिहार में सियासत की कहानी, भाजपा के चिराग, जदयू के साहनी!

सामना संवाददाता / पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। नीतीश सरकार के मंत्री और वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी ने अपनी ही सहयोगी पार्टी भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। मुकेश साहनी के बयानों में भाजपा के खिलाफ तल्खी साफ-साफ नजर आ रही है। साहनी के लिए सियासी जानकार यही कह रहे हैं कि वह लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान के रास्ते पर चल पड़े हैं, जो काम २०२० के बिहार विधानसभा में चिराग पासवान ने किया था, वही काम एमएलसी चुनाव में एनडीए में रहकर मुकेश साहनी कर रहे हैं।
चुनाव में चिराग की राह थी अलग
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए से बात नहीं बनने पर चिराग पासवान ने अपनी राहें अलग कर ली थी। उन्होंने विधानसभा का चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ा था। हालांकि भाजपा चिराग को पार्टी में रखने के पक्ष में थी लेकिन नीतीश कुमार उन्हें किसी भी कीमत पर एनडीए में नहीं रखना चाहते थे। चिराग पासवान ने जेडीयू के हर उम्मीदवार के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारा था, जिस वजह से नीतीश की पार्टी को कई सीटों पर नुकसान हुआ था।
भाजपा का होगा नुकसान
जानकारी के अनुसार इस बार पंचायत प्रतिनिधि के २४ सीटों पर एमएलसी का चुनाव हो रहा है। इसमें इतिहास को एक बार फिर दोहराया जा रहा है। मुकेश साहनी के उतर प्रदेश चुनाव में भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार उतारने और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी से भाजपा बेहद नाराज थी लेकिन एनडीए में रहने के बावजूद साहनी को एक भी सीट नहीं मिली। ऐसे में भाजपा को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कई सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं, जहां भाजपा के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है। उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार का खुलकर समर्थन भी किया है।
मोर्चेबंदी में साहनी आगे
मुकेश साहनी के लिए वैसा ही झटका न दे जाएं जैसा २०२० के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने जेडीयू को दिया था। मुकेश साहनी के इस रवैए से भाजपा के नेता बेहद नाराज हैं। खबर है कि इसका खामियाजा मुकेश साहनी को मंत्रिमंडल से बाहर होकर न चुकाना पड़ जाए। सियासी जानकार तो यह भी कहते हैं कि अगर इसी तरह की मोर्चेबंदी में साहनी आगे भी रहे तो जिस तरह इस वक्त चिराग पासवान बिहार के सियासत में अलग-थलग पड़े हुए हैं, ठीक ऐसा ही हाल मुकेश साहनी का भी न हो जाए।

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