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तनाव, दबाव, जजों की कमी और काम का बोझ मी लार्ड ‘खफा’ हैं! मोदी राज में हर साल दो जज दे रहे हैं इस्तीफा

देश के न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के विभिन्न न्यायालयों में ५ करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसकी एक वजह है न्यायालयों में जजों के खाली पद। मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश में हाई कोर्ट के जज ‘खफा’ होकर इस्तीफा दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के आकंड़ों पर नजर डालें तो मोदी राज में हर साल औसतन दो जज अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ के जज जस्टिस रोहित देव ने गत शुक्रवार की सुबह अपने इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह ‘व्यक्तिगत कारणों’ से पद छोड़ रहे हैं।
जस्टिस रोहित बी देव ने ओपन कोर्ट में कथित तौर पर यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया कि वे आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकते। जस्टिस देव को जून २०१७ में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जब वह महाराष्ट्र के महाधिवक्ता थे। अप्रैल २०१९ में उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह ४ दिसंबर, २०२५ को सेवानिवृत्त होने वाले थे। हालांकि, जस्टिस देव ऐसे पहले जज नहीं हैं, जिन्होंने रिटायरमेंट से पहले ही पद छोड़ा है। आंकड़ें बताते हैं कि वर्ष २०१७ के बाद से विभिन्न हाई कोर्ट्स के कम से कम १२ जजों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। यानी औसतन हर साल दो जजों ने इस्तीफा दिया है। न्यायिक मामलों की रिपोर्टिंग करनेवाले बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट सबसे आगे है। वहां सबसे ज्यादा जजों ने इस्तीफा दिया है। यदि अतिरिक्त न्यायाधीशों के इस्तीफों को शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या १६ हो जाती है। जजों के पद छोड़ने या इस्तीफा देने के कारणों में अधिकांश ने स्वैच्छिक और व्यक्तिगत कारण बताए हैं। कुछ जजों के कारणों में तबादला या मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति से इनकार शामिल है। काम का तनाव, दबाव, जजों पर काम का बोझ आदि भी उन प्रमुख कारणों में शामिल हैं, जो जजों के काम पर असर डाल रहे हैं। जहां तक जस्टिस रोहित देव का सवाल है तो उन्होंने कहा कि वे ‘व्यक्तिगत कारणों’ से पद छोड़ रहे हैं। हालांकि, ऐसी अटकलें हैं कि उन्होंने स्थानांतरण की संभावना के कारण इस्तीफा दिया है। वह अपने मूल उच्च न्यायालय को नहीं छोड़ना चाहते थे।
जस्टिस जयंत पटेल ने चीफ जस्टिस न बनाकर दूसरे हाईकोर्ट में भेजे जाने से खफा होकर २०१७ में इस्तीफा दे दिया था। तब वे कर्नाटक हाई कोर्ट में तैनात थे। वह मूलत: गुजरात हाई कोर्ट से थे। २०१८ में हैदराबाद हाई कोर्ट के जस्टिस नक्का बालयोगी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति ने उसे स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन इस्तीफा प्रभावी होने की तारीख से पहले उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।
महिला जज भी शामिल
इस्तीफा देने वालों में दो महिला जज भी शामिल हैं। जस्टिस वी ताहिलरमानी २०१८ में मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनाई गई थीं। ११ महीने बाद ही उनका तबादला मेघालय कर दिया गया था, इससे नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। बाद में देश के चीफ जस्टिस ने उनके खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। एक अन्य महिला जज जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने अपने रिटायरमेंट से एक महीने पहले ही मई २०२० में इस्तीफा दे दिया था। तब वह दिल्ली हाई कोर्ट में तैनात थीं।
इन जजों ने दिया इस्तीफा
जस्टिस जयंत पटेल (२०१७)
जस्टिस नक्का बालयोगी (२०१८)
जस्टिस वी ताहिलरमानी (२०१९)
जस्टिस अनंत बिजय सिंह (२०२०)
जस्टिस एससी धर्माधिकारी (२०२०)
जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल (२०२०)
जस्टिस सुनील कुमार अवस्थी (२०२१)
जस्टिस शरद कुमार गुप्ता (२०२१)
जस्टिस दामा शेषाद्रि नायडू (२०२१)
जस्टिस अजय तिवारी (२०२२)
जस्टिस चंद्र भूषण बारोवालिया (२०२२)
जस्टिस रोहित बी देव (२०२३)

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