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भाजपा सरकार में जोरदार भ्रष्टाचार!

केंद्र की भाजपा सरकार देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने की बात करती है। भाजपाशासित राज्यों में विकास की गंगा बहने का ढोल पीटा जाता है। हालांकि, धरातल पर कुछ और है। भाजपाशासित राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार जोरों पर है। एक तरफ एमपी के जबलपुर में सरकारी कर्मचारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कंपनी के कर्ताधर्ता के साथ मिलीभगत करके करोड़ों रुपए की मूंग खा गए। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में कई ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारी ट्रांसफर होने के बाद भी सरकारी बंगले पर कुंडली मारकर बैंठे हुए हैं।
यूपी के कई आईएएस, आईपीएस सरकारी बंगले पर कुंडली मारकर बैठे हैं!
सामना संवाददाता / नोएडा
नोएडा में जो एक बार आता है, वह कहीं और जाने का नाम नहीं लेता और अगर उसका ट्रांसफर भी हो जाता है तो वह सरकारी बंगले पर कुंडली मारकर बैठा रहता है। नोएडा प्राधिकरण की पूर्व सीईओ रितु माहेश्वरी के नोएडा अथॉरिटी पद से ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने घर खाली नहीं किया तो विवाद बढ़ने लगा था। अब इसी क्रम में नोएडा अथॉरिटी ने ४ आईएएस और २ आईपीएस के घर के बाहर नोटिस लगाया है कि ७ दिन के अंदर घर खाली कर दें।
बताया गया है कि इन अफसरों का काफी पहले ही नोएडा से दूसरे जिलों में ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन अभी तक इन्होंने घर खाली नहीं किया है। अफसरों को बंगला खाली करने के लिए सात दिन का समय दिया है, जिसकी मियाद भी खत्म हो गई है। अब ऐसे में अधिकारी बंगला खाली न करने के लिए सिफारिश लगा रहे हैं। आईएएस आराधना शुक्ला, जो नोएडा प्राधिकरण में अगस्त २०१५ से जून २०१८ तक तैनात रहीं। इस दौरान प्राधिकरण ने उनके लिए बंगला आवंटित किया था, लेकिन तबादला होने के बाद भी उन्‍होंने बंगला नहीं छोड़ा। दूसरी आईएएस मोनिका गर्ग हैं। ये अगस्त २०१६ से मार्च २०१७ तक नोएडा प्राधिकरण में रहीं। अभी प्रदेश में कहां तैनात हैं, इसकी जानकारी प्राधिकरण अधिकारियों को भी नहीं है। इन्होंने भी अभी तक बंगला खाली नहीं किया है। एक आईएएस राजेश प्रकाश भी हैं। ये अक्टूबर २०१४ में नोएडा प्राधिकरण आए और जुलाई २०१६ में इनका ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल २०१७ एडिशनल कमिश्नर एनसीआर गाजियाबाद में तैनात रहे। अब तक इन्होंने नोएडा का बंगला नहीं छोड़ा है। इसके अलावा आईएएस अनुराग श्रीवास्तव दिसंबर २०१७ से जनवरी २०२० तक नोएडा में रहे। इन्होंने भी अभी तक सरकारी बंगला खाली नहीं किया है।
एमपी में करोड़ों रुपए की मूंग खा गए अधिकारी!
सामना संवाददाता / भोपाल
जबलपुर जिले में एक एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कंपनी के कर्ताधर्ता और सरकारी कर्मचारी ६ करोड़ रुपए की मूंग खा गए। इस मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि मूंग गायब करने का खेल और बड़ा है, जिस पर पर्दा डाला जा रहा है। सिहोरा तहसील के एसडीएम धीरेंद्र सिंह के मुताबिक जबलपुर में वेयरहाउस संचालक और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से मूंग खरीदी में करोड़ों रुपए का घोटाला पकड़ा गया है।
दरअसल, मझौली थाना क्षेत्र के रानीताल में अमरलता एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कम्पनी को मूंग खरीदी का काम मिला था। यहां बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग की टीम ने छापा मारा। सियाराम वेयरहाउस में खरीदी की तुलना में ८ हजार क्विंटल मूंग गायब मिला। इसके साथ ही मौके पर बोरियों में मिट्टी भरकर पैकिंग की जा रही थी।
इसके अलावा जो मूंग भंडारित थी, वह भी अमानक मिली। अधिकारियों ने गोदाम के चप्पे-चप्पे की पड़ताल की तो उन्हें वहां पर कई प्रकार की गड़बड़ियां मिली हैं। इसके साथ ही मौके पर बोरियों में मिट्टी भरकर पैकिंग की जा रही थी, वहीं मौके पर केवल ३२ हजार क्विंटल मूंग भंडारित मिली। सियाराम वेयरहाउस और मूंग खरीदी करने वाले ग्रुप की जांच की गई तो ८ हजार क्विंटल मूंग गायब थी। इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में ३१ करोड़ रुपए की मूंग खरीदी में गड़बड़ी की आशंका है। जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे तौर पर बचा लिया गया है।

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