मुख्यपृष्ठग्लैमर`संघर्ष ही जीवन है!'-राजपाल यादव

`संघर्ष ही जीवन है!’-राजपाल यादव

एन एस डी से बॉलीवुड का सफर तय करने वाले कलाकार राजपाल यादव फिल्म इंडस्ट्री के काफी उम्दा व सम्मानित अदाकार रहे हैं। तकरीबन दो दशक से भी ज्यादा लंबे समय से अपने उत्कृष्ट अभिनय व कॉमेडी से फिल्म जगत में अपनी अलग जगह बनाई है। राजपाल यादव ने अपने जीवन में खूब संघर्ष देखा है। सफलता उन्हें इतनी आसानी से नहीं मिली। कॉमेडी और शानदार अभिनय से सबके दिलों पर राज करनेवाले राजपाल यादव ने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की कई दिलचस्प बातें हिमांशु राज से साझा की। प्रस्तुत है बातचीत का प्रमुख अंश-

ओटीटी प्लेटफॉर्म आपके लिए पलकें बिछाए बैठा है। ओटीटी से इतनी नाराजगी क्यों?
ओटीटी से कोई प्रॉब्लम नहीं है। ओटीटी ने बहुत सारे अच्छे कंटेंट व कांसेप्ट को जन्म दिया है। ओटीटी गांव के आखिरी आदमी जिसके पास मोबाइल है वहां तक पहुंचने में बहुत बड़ी सहभागिता निभाई है और बोलते हैं कला जितनी तपती है उतनी निखरती है। ओटीपी जो है कला के फ्यूचर में एक महत्वपूर्ण भूमिका आगे भी निभाएगा, यह पूरा विश्वास है। पर उन कांसेप्ट को लेकर मेरा विरोध था, जिनमें गाली-गलौज होती है। मैं उसका हिस्सा नहीं बनना चाहता और उससे भगवान ने मुझे बचा लिया। गाली व अभद्र भाषा छोड़ दी जाए तो आई लव ओटीटी।

 राजपाल यादव की एंट्री से ही दर्शकों में एक प्रसन्नता का माहौल बन जाता है। फिल्मों में कॉमेडी को आज के परिप्रेक्ष्य में आप किस तरह देखते हैं?
आप जिसे कॉमेडी कहते हैं, हम तो इसको मनोरंजन मानते हैं। मनोरंजन अच्छे कांसेप्ट का हो तो वह दर्शकों के दिलों को गुदगुदाता है और सार्थक भी होता है। अच्छा लगता है और बच्चे, बूढ़े तथा नौजवान सब को मजा भी आता है मैं तो हमेशा ब्लड सरकुलेशन का एक बहुत अच्छा माध्यम मानता हूं मनोरंजन को। मनोरंजन में नवरस होते हैं उसमें हास्यरस की बड़ी प्रधानता होती है और आज के जीवन में प्रकृति में हर जगह हास्यरस विद्यमान रहता है। जहां हास्यरस रहता है वहां माहौल खुशनुमा ही रहता है।

 काफी उतार-चढ़ाव भरा संघर्ष आपने अपने जीवन में देखा है। संघर्ष काल का कोई ऐसा वाकया जो आप साझा करना चाहेंगे?
ऐसे एक किस्सा को बता पाना बड़ा मुश्किल है लेकिन हजारों किस्से हैं, जिन्होंने बहुत कुछ सिखाया है और संघर्ष ही जीवन है। संघर्ष जब तक है तब तक आपके जीवन में बहुत सारी प्रोग्रेस है। आदमी के जीवन में संघर्ष चलते ही रहना चाहिए और हमेशा उन्नति की तरफ बढ़ते रहना चाहिए

आपने अपने नाम के साथ अपने पिता का नाम जोड़ लिया है राजपाल नवरंग यादव। कोई विशेष कारण ?
पिताजी का नाम क्या, सब पिता जी का ही है। ऐसे एक दिन बैठे थे तो ऐसा लगा कि जीवन में कहीं भी अकेले आप हो लेकिन एक नाम जो हमेशा साथ में चलता है। चाहे सात समंदर पार कहीं जाओ आपके साथ आपके पिता का नाम जुड़ा रहता है। मुझे ऐसा लगा कि मैं ५० वां बर्थडे मनाया तो क्या कर सकते हैं? ५० साल में जो भी उपलब्धि प्राप्त हुई वो पिता जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुई, वो उन्हीं को अर्पित की जाए। मां की कृपा से अपने पिता को अपना नाम समर्पित किया। मेरा परम् सौभाग्य होगा कि पिताजी का नाम हम से भी बड़ा हो हमेशा।

हर नेता में एक अभिनेता कहीं न कहीं होता है। क्या आप इस बात से सहमत हैं?
बिल्कुल आप सही कह रहे हैं कि नेता हो या अभिनेता, दोनों में अभिव्यक्ति ही उपयोग आती है। नेता जो है वह सड़क पर जनता के बीच सेवा करते हुए अपनी अभिव्यक्ति सबके सामने रखता है और अभिनेता पर्दे के माध्यम से, टीवी के माध्यम से, मंच के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति रखता है तो नेता और अभिनेता एक दूसरे के पूरक हैं।

हंगामा २ में आपके काम को दर्शकों खूब सराहा। आपके आनेवाले प्रोजेक्ट्स क्या-क्या हैं?
थैंक यू सो मच हंगामा टू के लिए और अभी हमारी `भूल भुलैया टू’ २० मई को रिलीज हो रही है। इसके अलावा अर्ध भी अगले एक-दो महीने में रिलीज होने वाली है। बाकी पांच से सात प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं जिसमें तीन-चार वेब सीरीज है, तीन चार फिल्में हैं।

 एक पति और पिता के रूप पर आपका जीवन कैसा रहा है?
मुझे यह नहीं मालूम है कि मैं पति वैâसा हूं या पिता वैâसा हूं लेकिन एक पिता के रूप में अपने बच्चों से बहुत कुछ सीखने को मिला तो एक पति के रूप में अपनी वाइफ से बहुत कुछ समझने को मिला। बोलते हैं कि अगर दोनों में कम्युनिकेशन अच्छा होना चाहिए। दोनों को एक दूसरे का सम्मान करना बहुत जरूरी है। पुत्री है तो उसकी बात सुनना बहुत जरूरी है और पत्नी है तो उसके विचारों को समझना भी बहुत जरूरी है।

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