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‘ईडी’ की जांच में फंसी … ‘ब्रिक्स’ करेगी विद्यार्थियों को भोजन की आपूर्ति! … हसन मुश्रीफ के दामाद की है विवादित कंपनी

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य सरकार ने कल ‘ईडी’ की जांच में फंसी एक विवादित कंपनी को विद्यार्थियों का भोजन आपूर्ति करने का काम सौंपा है। कंपनी का मालिक सरकार में मंत्री हसन मुश्रीफ के दामाद हैं। महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के कारण इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।
ब्रिक्स इंडिया नाम की इस कंपनी के मालिक वर्तमान चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ के दामाद मतीन मंगोली हैं। जब मुश्रीफ महाविकास आघाड़ी सरकार में थे, तब भाजपा ने मंगोली की इस कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए थे। महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान भाजपा द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि अप्पासाहेब नलावडे को बिना किसी अनुभव के अवैध रूप से चीनी मिल संचालित करने की अनुमति दी गई थी और इसमें वित्तीय हेराफेरी हुई थी। आरोप के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। हसन मुश्रीफ अब राज्य सरकार में मंत्री हैं इसलिए सरकार ने अब समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने का ठेका ब्रिक्स इंडिया को दिया है। विपक्षी विधायकों ने पूछा है कि महाविकास आघाड़ी के दौरान ब्रिक्स इंडिया के मुद्दे पर सवाल पूछने वाले नेता अब चुप क्यों हैं?
राकांपा विधायक रोहित पवार ने संबंधित ठेका देने के सरकार के पैâसले को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है। उन्होंने पूछा है कि क्या भाजपा अब राजनीतिक सुविधा के लिए झूठे आरोप लगाकर लोगों को गुमराह करने के लिए जनता से माफी मांगेगी। इसे लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खडसे ने भी भाजपा की आलोचना की है। अब जब मुश्रीफ भाजपा के साथ सत्ता में हैं तो ब्रिक्स इंडिया कंपनी को ठेका देकर क्यों स्वच्छ किया गया? अब आरोप कहां गए? जांच का क्या हुआ? ऐसा कड़ा सवाल भी उन्होंने पूछा।

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