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अजीत पवार के बयान पर भड़के छात्र!

सामना संवाददाता / नागपुर

सरकार के विभिन्न संस्थानों के माध्यम से पीएचडी करने के इच्छुक छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। सारथी संस्था के माध्यम से मराठा छात्रों को शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इस वर्ष सारथी से पीएचडी करनेवाले अनुदानित विद्यार्थियों की संख्या २०० कर दी गई है। जिसे लेकर कांग्रेस विधायक सतेज पाटील ने एक दिन पहले विधान परिषद में मुद्दा उपस्थित करते हुए कहा कि यह नियम एक वर्ष बाद लागू किया जाता तो शायद अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सकता है, क्योंकि करीब १,३०० छात्र इसके लिए पहले ही आवेदन कर चुके हैं। सरकार के इस नए नियम के बाद से मात्र २०० छात्रों को लाभ मिलेगा जबकि ९०० से अधिक छात्र वंचित होंगे। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार से मांग की कि नए बदलाव को अगले साल से लागू किया जाए और इस साल छात्रों की संख्या बढ़ाई जाए, लेकिन उपमुख्यमंत्री का जवाब तो छात्रों के घाव पर नमक लगाने जैसा था। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीएचडी करके ये छात्र कौन सा दीया जलाएंगे। अजित पवार के इस बयान को लेकर बड़ी संख्या में पीएचडी करनेवाले छात्रों ने नाराजगी व्यक्त की है। उनके बयान के प्रति कई जगह छात्र अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं और पीएचडी करने के लिए इच्छुक छात्र अजीत पवार के बयान पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। महाराष्ट्र टीचर्स असोसिएशन ने भी इसका विरोध किया और परिपत्र जारी कर नाराजगी व्यक्त की है।

छात्रों का गुस्सा

मुंबई यूनिवर्सिटी के सीनेट मेंबर विजय पवार ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार के बयान पर कई लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं। इस बयान पर छात्र अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। यह बयान गैरजिम्मेदाराना है। शोध को पूरे देश में मान्यता है और इस बयान के लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। अजीत पवार क्या जानें कि शोध क्या है।

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