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सटायर : …फ्लाइंग किस

डॉ. रवींद्र कुमार

‘किस’ कैसा भी हो प्रेम, वात्सल्य और स्नेह का प्रतीक होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ‘किस’ की तुलना में हाथ मिलाने से कहीं अधिक जीवाणु ट्रांसफर होते हैं अत: हाथ मिलाना `किस’ की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक है। मगर वैज्ञानिकों की बात हम मानते कहां हैं और गाहे-बगाहे ‘किस’ करते फिरते हैं। शम्मी कपूर जी कि फिल्म का एक गाना है ‘किस… किस… किस… किसको प्यार करूं!’ कहते हैं कभी हिंदी फिल्मों में ‘किस’ आम बात थी देविका रानी और हिमांशु राय का किस आज तक याद किया जाता है। ये और बात है कि देविका और हिमांशु पति-पत्नी थे। किंतु क्योंकि ये किस पर्दे के पीछे न होकर परदे पर था अत: मात्र रिकॉर्ड की बात ही बनकर रह गया।
सुना है विदेशों में लंबे-लंबे ‘किस’ की प्रतियोगिताएं होती हैं। खैर, भारत में ऐसी प्रतियोगिताओं का कोई महत्व या भविष्य नहीं है। हमारे यहां ‘किस’ को एक अलग अंदाज से देखा जाता है। यदि आपको ‘किस’ करते हुए किसी पुलिस के सिपाही ने या समाज के स्वघोषित सिपाही ने देख लिया तो आपकी पिटाई तय है। हो सकता है मुकदमा चले और जेल हो जाए। हमारे यहां आप खुले में लड़-भिड़ सकते हैं, खून-खराबा कर सकते हैं, मर्डर, आगजनी कर सकते हैं मगर ‘किस’? ना बाबा ना। हमारे यहां ‘किस’ को ‘किस ऑफ ड्रेगन’ माना जाता है घातक और जानलेवा। देख लीजिए, खजुराहो के देश में हम कहां से कहां आ गए।
‘किस’ के भी अदब हुआ करते हैं गालिब ये नहीं कि बगैर देश-काल का खयाल किए आप ‘किस’ करने लग जाएं। हमारे यहां प्रेम करना एक अपराध है और ‘किस’ उसी के प्रदर्शन का एक माध्यम है। मुझे नहीं लगता कि ‘किस’ का आविष्कार या खोज हुई होगी यह तो एक सहज मानवीय भावना है। अब जीवाणु अपना-अपना देख लें यहीं रहेंगे या पार्टनर के साथ जाएंगे।
‘किस’ अनेक तरह का होता होगा। किसी विशेषज्ञ ने इस पर जरूर अपनी रिसर्च लिखी होगी भारत में नहीं तो विदेश में। किंतु इस बात की संभावना ज्यादा है कि इस पर मौलिक काम देश में हुआ होगा कारण हमारे यहां इस विषय पर बहुत अंधकार है। अत: रिसर्च और नवीन खोज की अपार संभावनाएं हैं। विदेश में सुपरमैन और स्पाइडरमैन हुए हैं जो फ्लाई करते हैं। हमारे यहां फ्लाइंग सिख हुए हैं। फ्लाइंग रानी ट्रेन है। उड़ता पंजाब हुआ है। जितनी भी ‘किस’ होंगे उसमें ‘फ्लाइंग किस’ मैं समझता हूं सबसे अधिक निरापद है। लेकिन यह `भद्र लोक’ को ‘ऑफेंड’ भी कर सकती है। जब किसी से ‘फ्लाइंग किस’ के बारे में विचार पूछा तो उत्तर था, ‘मैं ऐसे निहायत आलसी लोगों से सख्त नफरत करता हूं।’ आहा! नफरत! नफरत, हमारी राष्ट्रीय हॉबी है। हम किस-किस से नफरत करते हैं इस पर हर भारतीय ‘माई हॉबी’ टाइप एक निबंध लिख सकता है। टीचर, पड़ोसी, ऑफिस का कुलीग, बॉस, रिश्तेदार आपका लोकल नेता। कहां तक गिनाऊं।

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