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कांग्रेस से मोहभंग के बाद सुलतानपुर आए थे सुभाष बाबू! चटर्जी बंगले में हुई थी ‘चाय पार्टी’

विक्रम सिंह / सुलतानपुर
देश के प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शीर्षस्थ राजनेता रहे नेताजी सुभाषचंद्र बोस के समर्थकों की सुलतानपुर में बड़ी तादाद थी। सन १९३९ के त्रिपुरी अधिवेशन में महात्मा गांधी के प्रत्याशी कहे जानेवाले डॉ.पट्टाभि सीतारमैय्या के खिलाफ जब वे दोबारा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में उतरे तो उन्हें वोट देने सुल्तानपुर से चौदह कांग्रेसी डेलीगेट सैकड़ों किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करके वहां पहुंचे थे। तभी से सुलतानपुर के लिए सुभाष बाबू के दिल में खास जगह बन गई और जब उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर देश भ्रमण शुरू किया तो सुलतानपुर भी पहुंचे। इलाहाबाद रोड स्थित खैराबाद के चटर्जी बंगले में (अब वो जगह मैरिज लॉन में तब्दील हो चुकी है) उनकी चाय पार्टी में सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों के भी कांग्रेसी शिरकत करने पहुंचे। इस चाय पार्टी ने कांग्रेस में भूचाल ला दिया। कहा जाता है कि यहीं पर नेताजी ने कांग्रेस छोड़कर फॉरवर्ड ब्लॉक गठित करने का मूड बना लिया था। सुभाष बाबू कांग्रेस के उन कद्दावर नेताओं में थे, जिन्होंने अपने दम पर राष्ट्रीय राजनीति में जगह बनाई थी। यूं तो महात्मा गांधी को पहली बार `राष्ट्रपिता’ कहने वाले सुभाष बाबू उनके प्रति विशेष आदर भाव रखते थे, लेकिन १९३९ में लोकतांत्रिक मर्यादा के लिए बापू के प्रत्याशी माने जानेवाले डॉ. पट्टाभि सीतारमैया को कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में चुनौती दे डाली। संपूर्ण देश में कांग्रेस के भीतर उथल-पुथल सी मच गई। सुलतानपुर में भी नेताजी को चाहने वालों की कमी नहीं थी। जिले से ताल्लुक रखनेवाले पार्टी के १४ डेलीगेट ऐसे थे, जो नेताजी के पक्ष में वोट देने के लिए साइकिल से त्रिपुरी (जबलपुर) पहुंचे। हालांकि चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित होने के बावजूद गांधी जी के सम्मान में सुभाष बाबू ने पद से त्यागपत्र दे दिया, लेकिन `सुलतानपुर’ हृदय में बस गया। इसके कुछ माह बाद नेताजी स्वराज की अलख जगाने जब देश भ्रमण में निकले तो सुलतानपुर भी आए थे। यहां उनकी जिस `चटर्जी बंगला’ में चाय पार्टी हुई वह आज भी धरोहर के रूप में विद्यमान है। अब मैरिज हाल में तब्दील हो चुका चटर्जी बंगला उस स्वर्णिम दास्तान को मानों अब भी बयां कर रहा है। उस वक्त के तमाम दिग्गज बाबू गनपत सहाय, सुंदरलाल गुप्ता, संगमलाल, बैजनाथ सिंह आदि तमाम लोग इस चाय-पार्टी में शरीक हुए थे। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बताते हैं, सुभाष बाबू यहां एक दिन ठहरे भी थे। यहां के राजनीतिज्ञों से उनका विशेष लगाव था।यहीं से जाने के बाद उन्होंने `फारवर्ड ब्लॉक’ नाम से नई पार्टी बना नई शुरुआत की।

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