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कंपकपाती ठंड और रात के बाद निकलेगा सूरज! …विक्रम और प्रज्ञान के लिए १४ दिन हैं खास

सही-सलामत काम रहा तो भारत के लिए होगा बोनस

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हिंदुस्थान का चंद्रयान-३ के एलएम ‘विक्रम’ ने तय समय पर बुधवार को शाम छह बजकर चार मिनट पर चांद की सतह को छुआ, जिससे पूरा देश जश्न में डूब गया। इसरो ने इससे पहले कहा था कि २६ किलोग्राम वजनी छह पहियों वाले रोवर को लैंडर के अंदर से चांद की सतह पर उसके एक ओर के पैनल को रैंप की तरह इस्तेमाल करते हुए बाहर निकाला जाएगा। चंद्रयान-३ के लिए आने वाले १४ दिन बहुत अहम होने वाले हैं। दरअसल, १४ दिनों के बाद चांद पर रात हो जाएगी। यह रात कोई एक दिन के लिए नहीं, बल्कि पूरे १४ दिनों तक के लिए होगी। रात होते ही यहां बहुत अधिक ठंड होगी। चूंकि, विक्रम और प्रज्ञान केवल धूप में ही काम कर सकते हैं, इसलिए वे १४ दिनों के बाद निष्क्रिय हो जाएंगे। हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर फिर से सूरज उगने पर विक्रम और प्रज्ञान के काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। अगर दोनों १४ दिन बाद सही-सलामत काम करते हैं तो यह भारत के चंद्र मिशन के लिए बोनस होगा।
अहम जानकारी भेजेगा
संजीव सहजपाल का कहना है कि सिर्फ रोवर ही नहीं बल्कि लैंडर के माध्यम से भी सूचनाएं और पूरी तकनीकी जानकारियां मिलती रहेंगी। वह बताते हैं कि लैंडर और रोवर १४ दिनों तक पूरी सक्रियता के साथ हमें सूचनाएं भेजेगा। उनका कहना है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार किए जाने वाले लैंडर और रोवर के पावर बैकअप की क्षमता १४ दिनों तक सबसे ज्यादा होती है। उसके बाद की सूचनाएं या तो मिलनी बंद हो जाएंगी या उनकी स्पीड न के बराबर हो जाएगी। हालांकि, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि १४ दिनों के भीतर मिलने वाली सूचनाएं अंतरिक्ष में चांद पर की जाने वाली तमाम संभावनाओं की सबसे महत्वपूर्ण जानकारियां होंगी।

चांद पर अंकित होंगे अशोक स्तंभ के चिह्न
अब नजरें प्रज्ञान रोवर पर हैं, जो स्थितियां सामान्य होने के बाद चांद की सतह पर चलेगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजीव सहजपाल कहते हैं कि योजना के मुताबिक, सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही लैंडर और रोवर चांद की सतह पर अपना काम करना शुरू कर देंगे। लैंडर के साथ ही चांद की सतह पर उतरने वाले रोवर अपने पहियों वाले उपकरण के साथ वहां की सतह की पूरी जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों को देना शुरू कर देगा। इन पहियों पर अशोक स्तंभ और इसरो के चिह्न उकेरे गए हैं, जो प्रज्ञान के आगे बढ़ने के साथ चांद की सतह पर अपने निशान छोड़ेंगे। इसी के साथ इसरो और अशोक स्तंभ के चिह्न चांद पर अंकित हो जाएंगे।

प्रज्ञान ने किया मून वॉक
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चंद्रमा की सतह पर रोवर प्रज्ञान के मून वॉक करने की जानकारी खुद ट्वीट करके दी। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-३ रोवर भारत में चांद के लिए बनाया गया है। अभी यह लैंडर से बाहर निकला और भारत ने चांद पर चहलकदमी की है। इसरो ने बताया है कि लैंडिंग से पहले लैंडर ने अपने उतरने के लिए एक ऐसे स्थान का चयन किया जो कि समतल था। लैंडर का एक पैर और उसके साथ की परछाई भी दिखाई दी। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-३ ने चंद्रमा की सतह पर अपेक्षाकृत एक समतल क्षेत्र को चुना। उसने यह भी बताया कि लैंडर और इसरो के यहां मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स) के बीच संचार भी स्थापित हुआ है।

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