मुख्यपृष्ठस्तंभसंडे स्तंभ : बंगलों की बस्ती, हो रही है वीरान

संडे स्तंभ : बंगलों की बस्ती, हो रही है वीरान

विमल मिश्र
मुंबई में आज भी ‘चार बंगला’ और ‘सात बंगला’ जैसे नामों के इलाके हैं और खोताजीवाडी, म्हातारपाखडी, मरीन ड्राइव, ओवल, दादर, बांद्रा, जुहू और मढ़ जैसे इलाकों में बंगलों की पूरी कॉलोनियां। पर खूबसूरत विला और बंगलों की इस समृद्ध जीवन शैली की अब चला-चली की बेला है। शहर के नक्शे से इसे ओझल करने में लगा है बढ़ता व्यवसायीकरण।

खुली हवा, फलों के बोझ से झूलते पेड़, कोयल की कूक, गिलहरी की सरगोशियां और खरगोश की उछल-कूद बंगलों में आज भी देखने को मिलेंगे। जुहू और म़ढ़ के बंगले हों तो सुनने को भी मिलेगा-समुद्र की लहरों का संगीत। बांद्रा के ‘डिजायरी’ व ‘चेज माउस’, कफ परेड के ‘तारापोरवाला’ और दादर की पारसी कॉलोनी के विला और बंगलों को विशेष बनाती हैं आर्ट डेको सहित उनकी विशिष्ट शैलियां।
शांत परिवेश, खुलापन, ऊंचे पैडिस्टल पर बने मुख्य लिविंग हाउस को ले जाती खुली दोहरी व घुमावदार सीढ़ियां, मैनिक्योर्ड बागीचे, टेरेस गार्डन व आउट हाउस, लंबे-चौड़े संगमरमरी बरामदे, ऊंची सीलिंग, सजी-संवरी बॉलकनियां व छतें, ड्राइव-वे, स्टेंड ग्लास खिड़कियां, आर्च व कॉलम, पत्थर, कास्ट आयरन व बर्म टीक का बेहतरीन काम-विला और बंगलों के इस वैभव को कोई भी मिस करेगा। लालभाई हाउस, राऊत रेजिडेंस, माउंट नैपियन, मेयर बंगलों व म्यूनिसिपल कमिश्नर बंगलों जैसे बड़े बंगलों का ही नहीं, भूलेश्वर, नल बाजार, ऑपेरा हाउस, खोताचीवाड़ी, कार्माइकल रोड, मरीन ड्राइव, ओवल, दादर, बांद्रा, आदि जगहों के पुर्तगाली प्रभाव व पुराने पैâशन के बंगलों का सौंदर्य भी बेतरतीब उग आए आस-पास के गगनचुंबी भवनों के बीच आज तक बरकरार है। बंगले के बेडरूम को सड़क से जोड़ने वाली लकड़ी की सीढ़ियां आपको यहीं दिखेंगी। खोताचीवाड़ी स्थित एक बंगले के मालिक जेम्स फरेरा ने यहां कितनी पार्टियां की हैं उन्हें याद नहीं। तीन सौ साल पुराने मझगांव गांवठण में गारे में गुड़ और चीनी डालकर बनाए गए म्हातारपाखडी के बंगले आज भी उतने ही बुलंद हैं, जितने उस जमाने में थे, जब यहां से लजीज आमों के टोकरे के टोकरे भरकर मुगल बादशाहों के दरबार में जाया करते थे।

१९वीं सदी की देन
१९वीं शताब्दी में जब मुंबई का क्षितिज विक्टोरियन शैली की सरकारी इमारतों से भर रहा था, नियोगोथिक डिजाइन के बहुत से विला और बंगले बने। कालचक्र में कुछ जीर्ण-शीर्ण हो गए और कुछ को कंक्रीट-जंगल निगल गया। गोदरेज, रुइया, टाटा जैसे उद्योगपति और अमिताभ बच्चन व शाहरुख खान जैसे फिल्म स्टार्स बंगलों में रहते रहे, पर बाकी शहर मैच बॉक्स किस्म के फ्लैट्स से भर गया। थोड़े से जो विला और बंगले बच पाए उनके चिह्न आज मलबार हिल, कफ परेड, मरीन ड्राइव, क्वींस रोड, कंबाला हिल, ब्रीच वैंâडी, गिरगांव, मझगांव और बोरिवली, मालाड, सांताक्रुज, बांद्रा जैसे सबर्ब्स में दिखते हैं। मलबार हिल में महाराष्ट्र के मंत्री जहां रहते हैं उनमें कुछ बंगले १९वीं सदी के उत्तरार्ध के हैं। मध्य रेल के महाप्रबंधक के मलबार हिल स्थित ‘ग्लेनीगल्स’ जैसे कई बंगले देश के बदलते इतिहास का साक्षी रहे हैं। बांद्रा का ‘ताज विला’, वर्ली सी फेस पर ‘लक्ष्मीकुंज’, चेंबूर का ‘विला एमीलिया’, नैपियन सी रोड का ‘माउंट नेपियन’, मलबार हिल का ‘डुनेडिन’, पैडर रोड पर ‘वैâटबरी हाउस’, जुहू-विले पार्ले में ‘गोदरेज बंगला’, मुंबई के कुछ अन्य प्रसिद्ध बंगले हैं। और तो और ‘चार बंगला’ और ‘सात बंगला’ जैसे नामों के इलाके भी।

बिड़ला हाउस और जिन्ना हाउस
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के १९३० के दशक में बने मलबार हिल के शानदार ‘जिन्ना हाउस’ और महात्मा गांधी के मुंबई निवास ‘बिड़ला हाउस’ के बारे में सभी को मालूम है। मुंबई में ऐसे कितने ही भव्य-दिव्य बंगले हैं, जो कभी महाराजाओं के महल के रूप में प्रयोग में आ चुके हैं। बिक चुका नैपियन सी का किलाचंद हाउस कभी मुंबई में महाराजा पटियाला का महल रह चुका है। पैडर रोड का अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (वांकानेर पैलेस), जिंदल मैंशन (दरभंगा नरेश की कोठी), मलबार हिल पर अंबानियों का आवास रहा ‘हवेली’ (कश्मीर हाउस) और ‘जल दर्शन’ (बड़ौदा नरेश का महल) रह चुका है, पर इसे जानने वाले कितने हैं? कितनों को यह मालूम है कि मलबार हिल क्लब और एक वक्त मुंबई की सबसे महंगी संपत्ति रही आई. एल. पलाज्जों सर डेविड ससून की भूतपूर्व इस्टेट का अंग हैं! पैडर रोड का ‘गुलशन महल’ फिल्मी संग्रहालय बन चुका है और सोफिया कॉलेज महल से कॉलेज।
म्हातारपाखडी इलाका रोमन वैâथलिक ईस्ट इंडियन की बहुतायत वाले समुदाय के बंगलों का गुलजार ठिकाना है। तंग गलियां, लंबे बरामदे, मेहराबदार छतें, पुर्तगाली वास्तु शैली में चौड़े अहाते और बाहरी सीढ़ियों वाले लकड़ी से बने ६५ बहुमंजिले खूबसूरत बंगले-खोताची वाडी शहर की सबसे प्रसिद्ध वाडी है, जहां २०० वर्ष पुराना इतिहास आज भी सांस लेता है।

जीवन शैली का हिस्सा
एक बार आदी हो जाने के बाद सारी जहमतें झेलकर कहीं और रहना कितना मुश्किल काम है यह असल बंगलेवाला ही जानता है। तभी जब सारे पड़ोसी डिवलपर्स से मिलने वाली मोटी रकम के लालच में एक-एक करके फ्लैट्स के बाशिंदे हो रहे हैं, बड़े ही नहीं, मीडियम और स्माल साइज के बंगलों के मालिक अभी भी वहां जमे हैं, भले ही उनका हिस्सा किराए पर उठा देना पड़े। अफसोस, मुंबई में ऐसे गुणग्राहक अब गिनती के ही बचे हैं।
बांद्रा की पेरी क्रॉस रोड का १९३० के दशक में बना बाग-बागीचों से घिरा ऐसा ही एक हेरिटेज बंगला है नीलवर्ण ‘पीस हैवेन’। इसे इंग्लैंड में काम कर रहे वेलंटाइन ने अपनी खूबसूरत बीवी को शादी के गिफ्ट के रूप में दिया था। ‘पीस हैवेन’ बेचने के लिए बहुत से ‘करोड़ी’ प्रलोभन आए, पर बंगले की मालकिन बीट्रिस क्लिफोर्ड (७१) टस से मस नहीं हुर्इं। अपनी शामें बच्चों को गिटार सिखा बिंदास बिता रहे गिरगांव की कोटाचीवाड़ी के विल्प्रâेड फिलिजार्डो को डॉयमंड मर्चेंट का नौ करोड़ का ऑफर ठुकराने के लिए सोचने की जरूरत नहीं पड़ी। यही है बंगलों का ‘ओल्ड वर्ल्ड चार्म’ बंगलेवाले जिसका मोह छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं। ओल्ड कुर्ला के सौ साल पुराने बंगले के एक निवासी ने फरमाया, ‘ज्वाइंट पैâमिली में, गांव जैसे माहौल में रहने का अलग ही मजा है।’
(अगले अंक में जारी)
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर
संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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