मुख्यपृष्ठस्तंभसंडे स्तंभ : इतिहास न बन जाएं मुंबई के बंगले!

संडे स्तंभ : इतिहास न बन जाएं मुंबई के बंगले!

विमल मिश्र

परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के मलबार हिल स्थित ‘मेहरानगीर’ पर अब बहुमंजिली इमारत है और ब्रीच वैंâडी का आलीशान ‘लिंकन हाउस’ पुणे के कारोबारी साइरस पूनावाला का घर बनने वाला है। डर यह है कि बंगलों के रूप में पुरानी मुंबई की बची-खुची यादों का ठिकाना भी कल इतिहास न बन जाए।

पुणे के कारोबारी साइरस पूनावाला ने करीब आठ वर्ष पहले ब्रीच वैंâडी में दो एकड़ में पैâला अमेरिकी काउंसुलेट लिंकन हाउस को ७५० करोड़ रुपए में खरीदा था, तब मुंबई में यह जमीन जायदाद का सबसे बड़ा सौदा था। इसने रीयल इस्टेट क्षेत्र में ब्रिकी के कई कीर्तिमान ध्वस्त किए। इसके आगे-पीछे मुंबई में बंगलों के कई बेशकीमती सौदे हुए। हिंदुस्थान के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा का मलबार हिल स्थित ‘मेहरानगीर’ बंगला, नेपियन सी रोड पर स्थित माहेश्वरी मैंशन, मलबार हिल का जटिया हाउस, बांद्रा बैंडस्टैंड बांद्रा पारसी कंवैलेसेंट होम ट्रस्ट का विशाल बंगला और वर्ली का गुलिटा हाउस ३७२ करोड़ से ५०० करोड़ रुपए के बीच बिके। हाल के वर्षों में बिके बेशकीमती बंगलों में सिनेमा के सबसे चमकदार स्टार रहे देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर के जुहू, पाली हिल और चेंबूर के बंगले भी शामिल हैं। पर, जिस हिसाब से शहर में रीयल इस्टेट की कीमतें आसमान पर चढ़ रही हैं कोई आश्चर्य नहीं, लिंकन हाउस का बनाया यह कीर्तिमान भी जल्दी ही टूट जाए।
कई ऐतिहासिक बंगले बिक गए
हिंदुस्थान के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा का मलबार हिल स्थित ‘मेहरानगीर’ बंगला अब बहुमंजिली इमारत में बदल चुका है। ‘मेहरानगीर’ नाम होमी के माता-पिता के नाम मेहरबाई और जहांगीर से लिया गया था। १९६६ में उनकी मृत्यु के बाद बंगला होमी के भाई जमशेद को सौंप दिया गया था। जमशेद नेशनल सेंटर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) के संस्थापक थे और बंगला कंपनी को देना चाहते थे। कुछ वर्षों के बाद संगठन ने कस्टोडियन के रूप में बंगले की नीलामी कर दी और ३७२ करोड़ रुपए की बोली लगाकर उद्योगपति जमशेद गोदरेज की बहन स्मिता कृष्णा गोदरेज बंगले की मालिक बन गर्इं। नेपियन सी रोड पर स्थित तीन मंजिला बना माहेश्वरी मैंशन उद्योगपति सज्जन जिंदल ने २०१२ में ५०० करोड़ रुपए में खरीदा। वर्ली में उद्योगपति मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी और उनके दामाद आनंद पीरामल का घर ‘गुलिटा’-जो २०१२ में ईशा के ससुर अजय पीरामल ने इसे हिंदुस्थान यूनिलीवर से ४५० करोड़ रुपए में खरीदा, किसी राजमहल से कम नहीं है। मलबार हिल का ३,००० वर्ग मीटर में फैला जटिया हाउस २०१५ में हुई एक नीलामी में आदित्य बिड़ला ग्रुप के मुखिया कुमार मंगलम बिड़ला ने ४२५ करोड़ रुपए में खरीदा। बांद्रा बैंडस्टैंड में पारसी कंवैलेसेंट होम ट्रस्ट का विशाल बंगला अब रुस्तमजी ग्रुप के पास है, जो उन्होंने ३५० करोड़ रुपए में खरीदा।
सांताक्रुज के गजदर प्राइवेट स्कीम में १९४८ में बना आर्ट डेको शैली का ‘फेलस्टीड विला’ लग्जमबर्ग की एक कंपनी ने ८६.५१ करोड़ में खरीद‌ लिया है। गिरगांव में मशहूर दानवीर किलाचंद देवचंद के दोमंजिला ‘किलाचंद हाउस’, गांवदेवी के ‘बैरी विला’, वालकेश्वर में ‘सौभाग्य महल’ और ‘जयकिशन मैंशन’, मलबार हिल का ‘कोजी कॉर्नर’, नैपियन-सी रोड के नैपियन पैलेस व नैपियन हाउस, कफ परेड के ‘तारापोरवाला मैंशन’, पाली हिल पर डॉ. सलीम अली का बंगला, सांताक्रुज में डेढ़ एकड़ में पैâले ‘तुलसी भवन’ और गोरेगांव में ‘पानी वाली ताई’ मृणाल गोरे का आवास रहे ‘टोपीवाला बंगला’ की जगह अब बहुमंजिली इमारतें तनी हुई हैं। रीडिवलपमेंट की आंधी रोमन वैâथलिक ईस्ट इंडियन की बहुतायत वाले म्हातारपाखडी के २१ बंगलों को निगल गई है, जिनमें स्वतंत्रता सेनानी जोसेफ बैप्टिस्टा का बंगला भी है।
मुकदमों में फंसे बंगले
नैपियन-सी रोड के रामजी मैंशन जैसे कई ग्रेडेड हेरिटेज बंगलों के किराएदार बंगला मालिकों और डिवलपर्स से लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। जिन्ना के १९३० के दशक में बने मलबार हिल के शानदार ‘जिन्ना हाउस’ का भविष्य उनकी पोती दीना वाडिया की बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल अपील के कारण मालिकाना हक के विवाद में अटका है, जबकि यहीं का ‘बिड़ला हाउस’ यश बिड़ला के निवेशकों से चल रहे विवाद के कारण एक बार महाराष्ट्र के गृह विभाग द्वारा जब्त किए जाने की नौबत से गुजर चुका है।
अपने हेरिटेज संरक्षण प्रॉजेक्ट्स के लिए बहुप्रशंसित और पुरस्कृत आर्किटेक्ट विकास दिलावरी ने कहा, ‘बंगले आज केवल अलीबाग, खंडाला-लोणावला, जैसी जगहों पर बनते हैं। मुंबई से तो सिर्फ जा रहे हैं।’ बंगलों की बस्ती कहलाने वाले कफ परेड, मलबार हिल, अल्टामाउंट रोड, नैपियन सी रोड, पैडर रोड और कार्माइकल रोड-जो टाटा, बिड़ला, मफतलाल, डहाणुकर और सोली सोराबजी जैसों के आलीशान बंगलों के लिए जानी जातीं हैं, वहां भी अब ५० से अधिक बंगले नहीं होंगे। यही हाल दादर की पारसी और हिंदू कॉलोनियों का है। एक अनुमान के अनुसार, मुंबई में अब मुश्किल से ३०० बंगले बचे हैं, इनमें कई विरासत महत्व के हैं। बांद्रा बैंडस्टैंड का बांद्रा पारसी कंवैलेसेंट होम ट्रस्ट के विशाल बंगले की कीमत ३५० करोड़ रुपए लगी। वर्ली सी फेस के किशोरी कोर्ट की कीमत आज ७०० करोड़ से ज्यादा की आंकी जाती है। मलबार हिल के ‘पुरातन बंगलो’ को गिराकर १८ मंजिला अपार्टमेंट में भी कुछ मंत्रियों के आवाहस हैं।
मुंबई के कई बंगले अभी कायम हैं, पर बदले रूप में। मझगांव में सर जमशेदजी जीजीभॉय मैंशन अब सेल्स टैक्स ऑफिस, भायखला की लव लेन में पुराने रईस प्रेमचंद रायचंद का १८वीं सदी का राजसी बंगला प्रेमोद्यान, जिसका मार्क ट्वेन ने अपने यात्रा वृत्तांतों में जिक्र किया है, अब रेजिन पासीस कान्वेंट का बालिका अनाथालय और हिल रोड, बांद्रा का भल्ला हाउस स्कूल बन गया है। पैडर रोड का ‘गुलशन महल’ फिल्मी संग्रहालय है और इसी रोड का करीब सौ वर्ष पुराना एक प्रसिद्ध मैंशन दरभंगा नरेश का महल, बैरिस्टर रहीमतुल्ला का ‘कुसुम मैंशन’, कमला मिल के मालिकों का ‘कमला मैंशन’ १९८२ में उद्योगपति जिंदल घराने द्वारा खरीदे जाने के बाद ‘जिंदल मैंशन’ बन गया है। सज्जन जिंदल द्वारा ३०० करोड़ रुपए में खरीदा गया और कार्माइकल रोड का ‘मोरेना हाउस’ तो ग्रेड २-बी की हेरिटेज प्रॉपर्टी है। नैपियन सी का भव्य किलाचंद हाउस का चौथाई हिस्सा जो देवचंद किलाचंद के बेटे चिन्नूभाई ने कौड़ियों के मोल-महज १५ करोड़ रुपए (बाजार मूल्य १७५ करोड़ रुपए) में बेच दिया-कभी मुंबई में महाराजा पटियाला का महल रह चुका है। पैडर रोड का अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (लिंकन हाउस), जिंदल मैंशन (दरभंगा नरेश की कोठी), मलबार हिल पर अंबानियों का आवास रहा ‘हवेली’ (कश्मीर हाउस) और ‘जल दर्शन’ (बड़ौदा नरेश का महल) रह चुका है। कई बंगले फिल्मी शूटिंग या कला प्रदर्शनियों का ठिकाना बन गए हैं। कई बंगले पुलिस और रेलवे अधिकारियों के आवास हैं। वर्सोवा के बहुत से बंगले नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर बनाए गए हैं।
(समाप्त)
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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