मुख्यपृष्ठस्तंभसंडे स्तंभ : कालातीत सौंदर्य! ...कायाकल्प की तैयारी में सीएसएमटी

संडे स्तंभ : कालातीत सौंदर्य! …कायाकल्प की तैयारी में सीएसएमटी

विमल मिश्र

भाग- एक
गुरुवार को प्रधानमंत्री ने विश्व विरासत मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के मेकओवर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। इसके साथ ही महानगर की भव्यतम इमारत कायाकल्प की राह पर बढ़ चली है।
‘कोई मुझे बताए क्या यह सचमुच रेलवे स्टेशन ही है!’ बैकपैक ढीला कर सुस्ताते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) की खूबसूरती देखकर अवाक थीं ऑस्ट्रेलियाई शजार रॉबिंसन। उन हजारों पर्यटकों में एक, जो रोज मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के सामने बने सेल्फी पॉइंट से या ऐसे ही मुंबई की इस विश्व विरासत के साथ अपनी फोटो खिंचाकर इतराते हैं। सैर का यह आनंद ‘आगुमेंटेड रियलिटी मैजिक मिरर’ से वर्चुअल उठानेवालों की तादाद तो करोड़ों में होगी।
सिर चढ़ आए सूरज की झक रोशनी, शाम के ढलते साये, रातों में झरती चांदनी और फ्लैशलाइट के चौंधियाहट में क्रॉफर्ड मार्वेâट, धोबी तालाव, डिमेलो रोड व फोर्ट साइड की चौड़ी सड़कों और वैâपिटल की साइड वाली गलियों से सीएसएमटी की हौलनाक भीड़ में गुम होते हुए … कभी फुरसत लेकर फोर्ट में तनिक इस बुलंद इबारत को नई नजरों से देखिए, जो विश्व की सबसे खूबसूरत इमारतों में ही अपनी गणना नहीं कराती, बल्कि जो देश का व्यस्ततम रेलवे स्टेशन भी है और ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ भी। सीएसएमटी हिंदुस्थान में रेल की शुरुआत की जगह और एशिया का पहला रेल टर्मिनस भी है। मार्च, १९९६ से पहले यह विक्टोरिया टर्मिनस कहलाता था और २०१७ से मौजूदा नाम में है।
जय हो …
‘दिव्य-मुग्ध कर देनेवाला सौंदर्य!’ लंदन से आई पर्यटक एम्मा बी. सीएसएमटी के पूर्व और पश्चिम स्थापत्य शैलियों के अनन्य मिश्रण के साथ मालाड और पोरबंदर पत्थरों से निर्मित विक्टोरियन नियो गोथिक आर्किटेक्चर को वैâमरे में वैâद करते हुए विभोर थीं। १,५०० फुट का अग्रभाग, ३३० फुट ऊंचे बुर्ज व गुच्छेदार खंभे, नोकीले मेहराब व मीनारें, मंगलोर टाइल्स से बनी छत, घेरेदार सीढ़ियां, अर्धवृत्ताकार तोरण व कलश, कंगूरेदार सजावट व गोल गुंबद व पच्चीकारीदार फूल-पत्तियां-सीएसएमटी अपने- आप में कालजयी कला है। मनमोहक कलाकृतियों का संगम-सबर्बन सेक्शन का बुकिंग ऑफिस ‘स्टार चैंबर’ की बनावट लंदन स्थित पैलेस ऑफ वेंस्टमिनिस्टर से मिलती है तो डाइनिंग हॉल के पास वैंâटीलीवर्ड सेंट्रल स्टेयरवेल ताजमहल होटेल के स्टेयरवेल की याद दिलाता है। पूरे परिसर की विस्मयकारी जीवंतता सहसा ही यहां फिल्माए गए मल्टी ऑस्कर विनर ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ का कोरस ‘जय हो…’ जुबान पर ला देती है। बिल्डिंग की संवरी काया पिछले वर्षों में अनेकों बार किए रीस्टोरेशन का परिणाम है। इस बार रीस्टोरेशन को ‘मेकओवर’ और ‘एक्सटेंशन’ का भी साथ मिला है- खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों।
एक नजर सीएसएमटी के सबसे ऊंचे बीच वाले अष्टकोणीय गुंबद और उस पर मौजूद प्रतिमा पर डालिए। एक हाथ में मशाल और दूसरे में पहिया थामे साढ़े सोलह फुट ऊंची ‘प्रोग्रेस’- जिसे थॉमस इर्प ने बनाया है- सचमुच देश की प्रगति का इतिहास का परिचायक है। इसे दर्शाती हैं इमारत के सुंदर गुंबदों पर मौजूद पोरबंदर पत्थरों से निर्मित ‘अग्रीकल्चर, ‘शिपिंग एंड कॉमर्स’ तथा ‘इंजीनियरिंग एंड साइंस’ सरीखी मूर्तियां भी। ‘प्रोग्रेस’ १९ जून, १९६९ को बिजली गिर जाने से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट के जे. जे. मांजरेकर ने सुधार कर फिर से खड़ा कर दिया। लगभग पौनी सदी पहले महारानी विक्टोरिया की भव्य प्रतिमा उपनिवेशवाद का चिह्न समझ निकाल दी गई है। इमारत की नक्काशी में जीआईपी रेलवे के दसों निदेशकों (भारतीय निदेशक सर जमशेदजी जीजीभॉय और सर जगन्नाथ शंकरशेठ सहित) और रेल यात्रियों के सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करनेवाले साफे व टोपियां पहिने यात्रियों के मस्तक, इंजन, पशुओं जैसे उत्कीर्ण प्रतीक हैं- सिंह पूर्व ब्रितानी साम्राज्य का और चीता भारत का। साउथ विंग में ‘पोस्ट ऑफिस’ का लोगों लिए शेर और बाघ की मूर्तियां भी देखने को मिलेंगी। सीएसएमटी का इंटरनल और आउटर डेकोरेशन जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स के उन दिनों के निदेशक विख्यात लेखक रुडयार्ड किपलिंग के पिता लॉकवुड किपलिंग, प्राचार्य ग्रिफिथ, उनके विद्यार्थियों गोमेज, आदि की देन है। इसके कुछ नमूने यहां मौजूद हेरिटेज गैलरी में दिखते हैं। प्रतीक्षालय व वैंâटीन के रंग-संयोजन का काम सिनॉर गिबोले ने किया है। मुख्य भवन की कई जगहों पर आपको स्पेन से आयातित रंगीन कांच के आयातित पैनलों और ‘स्टेंड ग्लासेज’ में लाल और नीले रंगों का प्राचुर्य दिखेगा। यानी दिन में आर्टिफिशियल लाइटिंग की जरूरत ही नहीं। इन्हीं पैनलों के बीच आपको तत्कालीन जीआईपी रेलवे का प्रतीक चिह्न भी नजर आएगा।
कायाकल्प की तैयारी
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की योजना के अंतर्गत ३६ हेक्टेयर क्षेत्र में १९ जनवरी को जिस मेकओवर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया, उसका मूल उद्देश्य है सीएसएमटी को विश्व स्तर का सर्व सुविधा संपन्न स्टेशन बनाना। लागत (१,८१३ करोड़ रुपए) के लिहाज से यह महानगर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है। २०२६ तक आप इसे उसी रूप में देखेंगे, जिसमें वह १९३० के दशक में नजर आता था। मेकओवर का अंग होंगे फूड कोर्ट, वेटिंग लाउंज, उपनगरीय और दूर की ट्रेनों के यात्रियों के लिए तथा सभी सबर्बन और लंबी दूरी वाले प्लेटफॉर्मों को जोड़नेवाला पटरियों के ऊपर २२,६०० वर्ग फुट में फैला सबर्बन रूफ प्लाजा। साथ में होंगे हेरिटेज क्षेत्र के लिए स्कॉईवॉक की तर्ज पर वॉकवे, अलग-अलग आगम और निकास, पैदल यात्रियों और दिव्यांगों के लिए विशेष सु‌विधाएं। मॉल व कारोबारी सुविधाओं के निर्माण के साथ सौर ऊर्जा और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के बेहतर उपयोग की व्यवस्था होगी।

कीर्तिमान
 सीएसएमटी एलीफेंटा केव्ज के बाद यूनेस्को द्वारा घोषित मुंबई में ‘विश्व विरासत’ वाला दूसरा स्मारक है। यह गौरव हासिल करनेवाला विश्व का पहला प्रशासकीय और अभी तक कार्यशील ऑफिस। यह विश्व के सबसे खूबसूरत छह स्टेशनों में शुमार है। सभी १८ प्लेटफॉर्मों को जोड़नेवाला ३६४ मीटर लंबा इसका फुट ओवरब्रिज भारतीय रेल का सबसे लंबा ओवरब्रिज है।
 ताजमहल के बाद देश की दूसरी इमारत, जिसकी तस्वीर सबसे अधिक खींची गई है।
 सीएसएमटी दुनिया के व्यस्ततम भवनों में से है। मुख्य भवन और उससे सटे मध्य रेल के कार्यालयों में १,००० से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
 इंडियन ग्रीन बिल्डिंग कौंसिल की ‘गोल्ड रेटिंग’। भारत के दस चुनिंदा प्रतिष्ठित स्थलों में स्वच्छता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ घोषित।
क्या आपको मालूम है?
 प्रथम विश्वयुद्ध में सीएसएमटी के पार्श्व का एक हिस्सा घायल सैनिकों के उपचार के लिए अस्पताल के रूप में काम में लाया गया।
 सीएसएमटी में एक तहखाना भी है, जिसका उपयोग कभी टिकट बिक्री से प्राप्त धन को रखने में किया जाता था।
 सीएसएमटी का दक्षिणी छोर पोस्ट ऑफिस गेट के रूप में जाना जाता है, जहां कुछ वर्ष पहले बने कुरुचिपूर्ण निर्माणों को विरासतदानों की आपत्ति के बाद तोड़ना पड़ा। पोस्ट ऑफिस गेट इसलिए नहीं कि यह मुंबई जीपीओ के पास है, बल्कि इसलिए कि इस जगह सचमुच पोस्ट ऑफिस था।

(क्रमश:)
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर
संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

अन्य समाचार