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संडे स्तंभ : खोताची वाडी: इतिहास जहां सांस लेता है

  • विमल मिश्र तंग गलियां, लंबे बरामदे, मेहराबदार छतें, पुर्तगाली वास्तु शैली में चौड़े अहाते और बाहरी सीढ़ियों वाले लकड़ी से बने ६५ बहुमंजिले खूबसूरत बंगले … गिरगांव जैसे भीड़-भरे इलाके में कोयल की वूâक और गौरैयों की चहचहाहट वाली ऐसी शांत जगह भी हो सकती है, कल्पना करना मुश्किल है। खोताची वाडी के हेरिटेज वॉक पर हम ऐसे ढेर सारे पर्यटकों को देखते हैं, जिनमें कई विदेशी भी हैं।
    मुंबई की सबसे मशहूर यह वाडी रह-रहकर खबर में आती रहती है। कभी फिल्मों की शूटिंग के ‌लिए, कभी मेकओवर परियोजना के लिए। पिछले दिनों ही यह रीडेवलपमेंट की कोशिशों की वजह से यहां का मूलभूत सौंदर्य बिगड़ने को लेकर विरोध आंदोलनों से गुजरी है। इन दिनों यह समाचार के वेंâद्र में है यहां के एक हेरिटेज बंगले की ‘डिजाइन गैलरी’ में लगी प्रदर्शनी के लिए, जिसमें यहां के २०० वर्षों के इतिहास की मनोरम झलक है। इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर हैं यहां के वयोवृद्ध निवासी आंद्रे बैप्टिस्टा।
    खोताची वाडी के बाशिंदों ने एकजुट होकर पिछले दिनों हेरिटेज बंगलो नंबर २८ (फर्नांडीज हाउस) को अवैध ढंग से ध्वस्त कर रीडेवलपमेंट की कोशिशों के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराकर आवाज उठाई और मुंबई महानगरपालिका को बंगले के नए मालिक को ‘स्टॉप कर्क ’ की नोटिस जारी करने को विवश कर दिया। मामला सुलटा तो तय हुआ कि निर्माण के दौरान बंगले के हेरिटेज लुक से छेड़खानी नहीं की जाएगी। पर इससे यहां के निवासियों की खिन्नता गई नहीं। डिजाइन गैलरी की प्रदर्शनी का उद्देश्य मुंबई के लोगों को यहां के गौरवशाली इतिहास और परंपराओं से परिचित कराने के साथ सामूहिक एकता के इजहार का भी प्रयास है।
    पठारे प्रभुओं ने बसाया
    गिरगांव की सबसे पुरानी इस वाडी को विकास के अराजक हमले से बचाने के लिए लंबी अदालती लड़ाई लड़नेवाले मैरेनियल बैप्टिस्टा हमें १९वीं सदी के भयानक प्लेग की याद में बनाए गए ५३ वर्ष पुराने चर्च, १२३ वर्ष पुराने गिरगांव कैथोलिक क्लब और ७१ वर्ष पुराने आइडियल वेफर हाउस के बारे में बताने लगे हैं। बैप्टिस्टा इतिहास की अपनी जानकारियों से हमारे ज्ञान में भी इजाफा करते हैं। मसलन, खोताची वाडी को १८वीं सदी में मुंबई के मूल निवासी कहलाने वाले पठारे प्रभुओं में से एक दादोबा वामन खोत ने बसाया था। सौ साल बाद उनकी कुछ जमीन ईस्ट इंडियन क्रिश्चियंस ने खरीद ली। पुर्तगाली शैली के चटकीले रंगों वाले बंगलों के अलावा यहां तीन चालें भी बनाई गईं , जिनमें एक खासतौर पर इन बंगलों को बनानेवाले मजदूरों के रहने के लिए थी।
    खोताची वाडी के बंगलों में रहनेवाले कैथोलिक और महाराष्ट्रीय हिंदुओं में ज्यादातर इन्हीं पठारे प्रभुओं के वंशज हैं। खासकर उनके सात परिवारों का यहां की अनूठी संस्कृति के साथ १९वीं और २०वीं सदी में मुंबई के विकास में भारी योगदान है। धीरे-धीरे मूल निवासियों के दूसरी जगहों पर शिफ्ट होने से अब यहां गुजराती और मारवाड़ी चेहरे भी नजर आने लगे हैं। ‘खोताची वाडी मुंबई ही नहीं, देश की विरासत है’, बताते हैं राहुल श्रीवास्तव। यहां गठित खोताजी वाडी वेलफेयर  ऐंड हेरिटेज ट्रस्ट की सक्रियता बनाए रखने में राहुल का बड़ा हाथ है। यहां के निवासियों को उनके बंगले के नंबर से पहचाना जाता है। ४७-उ बंगले के मालिक जेम्स फरेरा बताते हैं, ‘खोताची वाडी को बनाए रखने की जिम्मेदारी अंतत: हमारी है।’ उन्हें मालूम है संरक्षण और पुनरोद्धार का यह काम सिर्फ  खोताजी वाडी को प्रासंगिक बनाए रखकर ही किया जा सकता है। यह काम फरेरा करते हैं अपने बंगले में उन पुरातन वस्तुओं, चित्रों और परिधानों की प्रदर्शनी लगाकर। उनका यह बंगला इन दिनों होम स्टूडियो में बदल जाता है, जहां देश भर से आए कलाकार अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाते हैं। घूमने के लिए सबसे मुफीद वक्त है ‘खोताची वाडी उत्सव।’ डिजाइन गैलरी यहां के व्रैâस्टो होम के छह कमरों में मौजूद है।
    होगा कायाकल्प
    खोताची वाडी में कुछ चॉलें भी हैं। बासु चटर्जी ने ‘पिया का घर’ और सई परांजपे ने ‘कथा’ कुछ असली पात्रों के साथ गिरगांव की ऐसी ही एक वास्तविक चॉल में ही फिल्माई थी। मुंबई के सामुदायिक जीवन और सह-अस्तित्व की सबसे बड़ी मिसाल मुंबई की अलबेली विरासत ये चॉलें गिरगांव के मशहूर हेरिटेज बंगलों और वाडियों (अन्नपूर्णावाडी, भटवाडी, जितेकर वाडी, गायवाडी, कांदेवाडी, भूताची वाडी, उरणकर वाडी, फणसवाडी, पिंपल वाडी, आदि) की तरह जहां लुप्त होने के करीब है, देशप्रसिद्ध खोताची वाडी को अलग पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। खोताची वाडी के ६५ बहुमंजिले खूबसूरत बंगलों (इन्हें ग्रेड-३ का हेरिटेज निर्माण घोषित किया गया है) में से अब २८ से भी कम बच रहे हैं। बाकी कब तक बचे रहेंगे पता नहीं!
    खोताची वाडी के निवासियों के सामुदायिक जीवन और विरासत सुरक्षित रखने के प्रयासों के तहत मुंबई महानगरपालिका ने खोताची वाडी ट्रस्ट और खाकी हेरिटेज फाउंडेशन की मदद से यहां के मेकओवर की योजना बनाई है। उद्देश्य है यहां के निवासियों के बीच इस स्थान के लिए गौरव और सहकार की भावना विकसित करना। मेकओवर के तहत यहां प्रवेशद्वार के रूप में एक तोरण और रास्तों का फर्शी पत्थरों से निर्माण करने के साथ बेंच, लैंप, जैसे स्ट्रीट फर्नीचर से लैस किया जाना है। राजा रवि वर्मा सरीखे यहां के गौरवशाली नागरिकों के सम्मान के लिए यहां एक ‘वॉल ऑफ फेम ’ और म्यूजियम के निर्माण की भी योजना है।
    (लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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