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संडे स्तंभ : मुंबई का स्वतंत्रता मार्ग

विमल मिश्र 

देश के स्वतंत्रता की ७५वीं वर्षगांठ के समारोह शुरू हो चुके हैं। चलिए ग्रांट रोड और चर्नी रोड के उन ऐतिहासिक स्मारकों के ‘देशभक्ति वॉक’ पर, जहां स्वतंत्रता संग्राम की अनगिनत यादें हिलोरें मारती हैं। दो किलोमीटर लंबा यह इलाका है देश का ‘प्रâीडम ट्रेल’ (स्वतंत्रता मार्ग), इन दिनों जिसे प्रशस्त करने में लगी है मुंबई मनपा की एक महत्वाकांक्षी योजना।
स्वतंत्रता संग्राम के लिहाज से मुंबई की सबसे नामचीन सड़क कौन-सी है? निश्चित रूप से अगस्त क्रांति मार्ग। नाना चौक से अगस्त क्रांति मैदान होते हुए तेजपाल रोड तक जानेवाली वह सड़क, जिसका पुराना नाम ‘गवालिया टैंक रोड’ अभी तक जुबान से उतरा नहीं। केवल सड़क नहीं, समूचा ग्रांट रोड और चर्नी रोड इलाका ही देश के स्वतंत्रता संग्राम की यादों से भरा है। जल्द ही दो किमी लंबा यह इलाका ‘प्रâीडम ट्रेल’ यानी ‘स्वतंत्रता मार्ग’ का अंग बनने जा रहा है, जिसके लिए मुंबई मनपा की एक महत्वाकांक्षी योजना इन दिनों प्रगति पर है।
अगस्त क्रांति मैदान, गवालिया टैंक मैदान का ही पूर्व नाम है। आज यह बिल्कुल साधारण मैदान जैसा ही लगता है। यह कल्पना करके ही रोमांच हो जाता है कि आज से ८० वर्ष पहले ८ अगस्त, १९४२ को महात्मा गांधी ने अपने भाषण में सबसे पहले ‘अंग्रेजों, भारत छोड़ो’ का शंखनाद यहीं से किया होगा। लैबर्नम रोड स्थित मणि भवन अगस्त क्रांति मैदान के बिल्कुल पास है। बापू का निवास होने से मणि भवन एक लंबे कालखंड तक सारे देश के स्वतंत्रता संग्राम का वेंâद्रबिंदु बना रहा। जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जन्मभूमि कहलाता है, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है। पांच भागों में बंटे अगस्त क्रांति मैदान का प्राचीन गौरव अब अतीत बन चुका है। अब केवल १५ अगस्त, २६ जनवरी और २ अक्टूबर जैसे दिनों तक। वर्ष के बाकी समय इस मैदान और मुंबई के दूसरे मैदानों में कोई फर्वâ नहीं नजर आता। यहां मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने आए बुजुर्गों में भी किसी को १९४२ के उन हंगामे वाले दिनों की याद नहीं बची है।
पाट दिया गया तालाब
जैसा कि नाम से ही प्रकट है, देश की स्वतंत्रता का मूर्तिमान प्रतीक बनने से पहले गवालिया टैंक वह तालाब था, जहां गायों को नहलाया जाता था। पास का इलाका भी चरागाह होने के कारण चरनी रोड (चर्नी रोड) कहलाया, जहां इन गायों को नहलाया जाता था। तालाबों की बहुतायत और धान और चकोतरे के खेतों के साथ एक जमाने में यह पूरा इलाका जंगलों से घिरा था। वन्य पशु (यहां तक कि शेर भी) कभी दिखाई दे जाते थे। गवालिया टैंक मशहूर ट्रॉम टर्मिनस भी था, जहां से एक आना देकर आप शान से प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम घूमने जा सकते थे। पेड़ों से आच्छादित यह जगह पुराने ढर्रे के घरों के अलावा एक संस्कृत पाठशाला के लिए मशहूर थी। १९वीं सदी के मध्य में घरों को नलों के जरिए पानी सप्लाई शुरू होने के बाद मुंबई में जो तालाब पाट दिए गए उनमें गवालिया टैंक भी था। स्वतंत्रता की निशानियों के साथ स्वतंत्रता मार्ग पर दूसरी पुरानी यादें भी छिटकी हुई हैं। विली ऊनवाला के घरवालों ने याद किया कि किस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के जमाने में अप्रैल, १९४४ में मुंबई गोदी में जब एक विदेशी जहाज में विस्फोट हुआ तक एक किलो वजन के सोने की र्इंट उड़कर उनके फ्लैट में धम्म से आ गिरी। आज यह पूरी जगह ऊंची-ऊंची रिहायशी और कारोबारी इमारतों के झुरमुट से घिरी है। इनमें ४५ मंजिला श्रीपति आर्वेâड भी है। खलुकदिना टेरेस के पास डागली कोट में एन.एम. पेटिट की प्रतिमा आज भी वैसी ही शानदार दिखती है। विश्वविख्यात संगीतकार जुबिन मेहता के बाप-दादों का घर इसी इलाके में हुआ करता था। सोनाजी अगियारी, चाइनीज रेस्ट्रा ‘निश’, अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी, न्यू आइडियल ईरानी रेस्टोरेंट और ग्रैंड सेंटर यहां की पहचान बन गए हैं।
देशभक्ति वॉक
अगस्त क्रांति मैदान से गिरगांव चौपाटी तक दो किलोमीटर इलाके में निर्माणाधीन ‘प्रâीडम ट्रेल’ यानी ‘स्वतंत्रता मार्ग’ बोस्टन में मौजूद ऐसे ही मार्ग के तर्ज पर है, जिसके माध्यम से मुंबई मनपा देशवासियों को महान स्वतंत्रता सेनानियों के कृतित्व से परिचित कराएगी। मणि भवन और अगस्त क्रांति मार्ग के अलावा स्वतंत्रता संग्राम के लिहाज से महत्वपूर्ण पंडित रमाबाई गल्र्स होस्टल, जहां से महिला शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के कई कार्य आरंभ हुए और आर्य समाज महिला छात्रावास व सेंट कोलंबा हाईस्वूâल भी इस मार्ग पर अवस्थित है। बिड़ला हाउस, जो मणि भवन के बाद बापू का मुंबई में दूसरा घर रहा, हीरा बाग, जहां दक्षिण अप्रâीका से मुंबई लौटने पर उनका पहला भाषण हुआ, केशवजी नाईक चॉल, जहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा आरंभ पहला सार्वजनिक गणेशोत्सव हुआ, गिरगांव चौपाटी, जहां तिलक महाराज का अंतिम संस्कार हुआ और लोकमान्य तिलक स्मारक है, जहां नमक आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने नमक बनाया और खिलाफत आंदोलन का वेंâद्रीय स्थल रहा खिलाफत हाउस भी इस जगह से ज्यादा दूर नहीं है।
दो चरणों में पूर्ण होनेवाले ‘प्रâीडम ट्रेल’ पर ३० करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। योजना के पहले चरण में अगस्त क्रांति मैदान के पुनरोद्धार का कार्य पिछले महीने शुरू हो चुका है। इसके तहत मैदान के सौंदर्यीकरण के साथ यहां स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारक बनाने की बात है, जिसमें इन सेनानियों की प्रतिमाएं होंगी। पास के पुâटपाथों की दीवारों पर १९४२ के आंदोलनकारियों के बारे में चित्रमय जानकारी देने की भी योजना है। ‘प्रâीडम ट्रेल’ के दूसरे चरण का काम अभी शुरू होना है। इसे अगले वर्ष गणतंत्र दिवस तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मानसून की वजह से पुनरोद्धार कार्य में विघ्न पड़ा, फिर भी परियोजना के सलाहकार जाने-माने विरासत संरक्षण विद पंकज जोशी ने बताया कि ‘भारत छोड़ो’ दिवस और ‘स्वतंत्रता दिवस’ तक इसका एक हिस्सा पूर्ण कर लेने की तैयारी है।
जिन्होंने दिया ‘भारत छोड़ो’ का नारा
यह संयोग की ही बात है कि ‘भारत छोड़ो’-‘साइमन, गो बैक’ का नारा देनेवाले समाजवादी नेता यूसुफ मेहरअली अगस्त क्रांति मार्ग के पास राघवजी रोड पर विक्टोरियन शैली की ‘बॉम्बे व्यू’ बिल्डिंग के ही वासी थे। ‘बॉम्बे व्यू’ की तरह राघवजी रोड पर ‘बोटावाला बिल्डिंग’, ‘आशा बिल्डिंग’ और ‘रिले चैंबर्स’ ३० और ४० के जमाने में बनी ‘व्यू’ नाम की बिल्डिंग्स की बहार है – ‘हिल व्यू’, ‘ईस्ट व्यू’, ‘रॉक व्यू’, ‘बेस्ट व्यू’ (जिसकी वासी स्वरूप संपत भी बनीं।) यूसुफ मेहरअली की विरासत संभाली डॉ. जी.जी. पारीख सरीखे समाजवादी नेताओं ने, जो इन दिनों डॉ. यूसुफ मेहरअली स्टडी सेंटर देखते हैं, वे देश के सबसे उम्रदराज स्वतंत्रता सेनानियों में से हैं। विडंबना देखिए, जिसके नाम पर इस रोड का नाम है उस १०० से अधिक पुरानी राघवजी बिल्डिंग के निवासी भी राघवजी के कृतित्व से वाकिफ नहीं हैं। राघवजी के बारे में हमें मालूम पड़ा कि वे एक कच्छी सेठिया थे, जिनकी इस इलाके में काफी जमीन-जायदाद थी। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के परिवार के कुछ लोग अब भी यहां रहते हैं। राघवजी रोड का रेले चैंबर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अध्यक्ष आर्माइटी देसाई का भी घर रहा है।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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