मुख्यपृष्ठस्तंभसंडे संकल्प : दृढ़ संकल्प करके आगे बढ़ें

संडे संकल्प : दृढ़ संकल्प करके आगे बढ़ें

उदय पंकज,
कल्याण

हर मानव की इच्छा सफल जीवन जीने की होती है। इसे पाने के लिए वह प्रयत्न भी करता है, परंतु हर मनुष्य अपने प्रत्येक कार्य में सफल नहीं हो पाता। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग एक ही कार्य में सफल होना चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग ही सफल हो पाते हैं। व्यक्ति यदि अपनी प्रबल इच्छा से चाहे तो अनुकूल परिस्थितियां न होने बावजूद दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है।
यदि इंसान चाहे तो असंभव को भी संभव बना सकता हैं, क्योंकि हमारी आज की जो उपलब्धियां होंगी वो आने वाली पीढ़ी के लिए बीते कल की जमा-पूंजी होगी। आज आप वहीं पर हैं, जहां बीते कल के विचार आपको ले आए हैं और आप आने वाले कल में वहीं पर होंगे, जहां आपकी सोच आपको ले जाएगी। जब हम किसी महान, सफल और प्रतिष्ठित व्यक्ति के बारे में जानते हैं, पढ़ते हैं या किसी प्रेरक वक्ता के द्वारा उनके बारे में सुनते हैं तो उनके जीवन से जुड़ी बातों में एक बात कामन होती है। वह है उनके जीवन में असंभव नाम की कोई चीज का नहीं होना।
उन सभी सफलता पाने वाले व्यक्तियों ने अपनी निर्बल सोच को प्रबल बनाए रखा। अपने उचित निर्णय और संकल्प के बाद लक्ष्य को पाने के लिए पूरे हौसले, लगन, मेहनत के साथ सपने को साकार करने में जुट गए और असंभव को संभव बनाया। अच्छी योग्यता होने के बाद भी असफल हो जाना योग्यता पर सवाल नहीं हो सकता। सफलता पाने के लिए एक निर्धारित लक्ष्य और लक्ष्य के लिए संचित विचार और उचित निर्णय द्वारा किए गए प्रयास का नाम ही संकल्प है।
हम बिना सोचे-समझे और बिना संकल्प के जब कोई कार्य करते हैं तो उसमें सफलता नहीं मिल पाती है। हर व्यक्ति में एक शक्ति होती है, जो विवेकपूर्ण लक्ष्य की दिशा में बढ़ाने का कार्य करती है। सफल होने के लिए इसी शक्ति को पहचानना एक उचित प्रयास होगा। असंभव के शब्द के पहले अक्षर को हटा दिया जाए तो वह संभव हो जाता है। अधिकतर लोग इसी एक अक्षर को हटाने का प्रयास सही तरीके से नहीं कर पाते और जीवन में असफलता मिलने पर खुद को निराशा, हताशा में डुबो देते हैं।
महानता पाने के लिए व्यक्तित्व और व्यवहार का अच्छा होना भी आवश्यक है। जीवन में कुछ भी बिना संघर्ष के नहीं पाया जा सकता। असंभव मार्ग पर चलकर ही अपना मुकाम प्राप्त किया जा सकता है। जिन वैज्ञानिकों ने अब तक जितने भी अविष्कार किए हैं, वे असंभव से नाता तोड़ने के बाद ही किए हैं। इस शब्द से दूर रहकर ही वैज्ञानिक आसमान की ऊंचाई और सागर की गहराई को नाप सके हैं।
जीवन में रोज-रोज कई इच्छाएं जागृत होती ही रहती हैं, इन्ही इच्छाओं के झुंड में से उस इच्छा पर अपना ध्यान केंद्रित करें, जो हमारे अपने जीवन के लिए आवश्यक हैं। दृढ़ संकल्प करें और अपने सपने को पूरा करने में मेहनत और लगन के साथ जुट जाएं।

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