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प्रदूषण से निपटने में नाकाम सरकार को ‘सुप्रीम’ फटकार!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

इन दिनों देश में सांस-सांस में संकट की स्थिति पैदा हो चुकी है हिंदुस्थान की आधी से अधिक आबादी वायु प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं। यही वजह है कि मौजूदा साल सर्दियों में प्रदूषण से निपटने में नाकाम रही राज्य सरकारों पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जमकर फटकार लगाई और कहा, कम से कम अपनी अगली सर्दियों को बेहतर बनाने का प्रयास करें। सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और केंद्र सरकार को दो महीने में प्रदूषण पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि हलफनामे से पता लगा है कि पर्यावरण उप कर की ५३ फीसदी वसूली हुई है। इसमें तेजी लानी होगी। मुद्दा यह है कि खेतों में लगने वाली आग अभी भी गंभीर मुद्दा है, यह सब रुकना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने एक्यूएम इंडेक्स पर उठाए जाने वाले कदमों और सचिवों की बैठकों पर केंद्र सरकार द्वारा एक मसौदा प्रस्तुत किया है। सर्वोच्च अदालत ने आदेश दिया कि हम राज्य सरकारों को दो महीने के भीतर एजी के नोट के संबंध में कदम उठाने और एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हैं। रिपोर्ट में अन्य पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को भी आवश्यकतानुसार, रिपोर्ट लागू कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस दौरान एक वकील ने कहा कि आज एक्यूआई ३७६ है। ऑड-ईवन से केवल वाहन कम हुए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीएक्यूएम को कचरा जलाने के मुद्दे पर गौर करने को कहा गया, ताकि यह गंभीर न हो और अगली सर्दियों में इसकी पुनरावृत्ति न हो। ऐसे में यह उचित होगा कि निगरानी और रिपोर्ट रखने के लिए एक समिति की मौजूदगी में भी इस मामले को दोबारा सूचीबद्ध किया जाए।

बता दें कि देश में आनेवाले दिनों में सर्दियां बढ़नेवाली हैं। इसी बीच जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ को अटॉर्नी जनरल ने वैâबिनेट सचिवालय के नेतृत्व वाली बैठकों की जानकारी दी। जस्टिस कौल ने कहा कि इस पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कम से कम आनेवाली अगली सर्दियों को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति कौल, जो २४ दिसंबर को कार्यालय के लिए सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ने टिप्पणी की `आइए हम कम से कम अपनी अगली सर्दियों को बेहतर बनाने का प्रयास करें।’अदालत ने कहा कि दिल्ली में पराली जलाने के उल्लंघन और वायु गुणवत्ता सूचकांक की निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।

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