मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसुप्रीम कोर्ट का 'सर्वोच्च' सवाल : देश किस दिशा में जा रहा...

सुप्रीम कोर्ट का ‘सर्वोच्च’ सवाल : देश किस दिशा में जा रहा है!

• विषैला प्रचार जारी है
• मूक दर्शक मत बनो
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश में पिछले कुछ वर्षों में ‘हेट स्पीच’ (नफरती बोल) के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ रहा है और देश का माहौल विषाक्त होता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए केंद्र की मोदी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए ‘सर्वोच्च’ सवाल किया है कि देश किस दिशा में जा रहा है! देश में विषैला प्रचार जारी है और आप मूक दर्शक बने हुए हैं।

हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषा एक जहर की तरह है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है। चैनलों पर बहस बेलगाम हो गई है। राजनीतिक दल सामाजिक सद््भाव की कीमत पर इसमें भी लाभ देख रहे हैं। राजनीतिक दल आएंगे और जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इसको लेकर कानून बनाने का इरादा है या नहीं? क्योंकि मौजूदा व्यवस्था ऐसे मामलों में निपटने के लिए अपर्याप्त है। जस्टिस एम. जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि केंद्र को ‘मूक दर्शक’ नहीं होना चाहिए। उसे इस समस्या से निपटने के लिए आगे आना चाहिए।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा था कि हेट स्पीच से संबंधित देश में कोई स्पष्ट कानून नहीं है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में आदेश पारित करना चाहिए। बहरहाल, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा हेट स्पीच या तो मेन स्ट्रीम टीवी के जरिए या फिर सोशल मीडिया के जरिए आ रहा है। मेन स्ट्रीम मीडिया में कम-से-कम एंकर का रोल अहम है।

जैसे ही कोई हेट स्पीच देने की कोशिश करता है, एंकर की ड्यूटी है कि उसे तुरंत रोक दे। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हमारे पास एक उचित लीगल प्रâेमवर्क होना चाहिए। बता दें कि जस्टिस एम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच के सामने कुल ११ अर्जियां हैं, जिनमें हेट स्पीच मामले को रेग्युलेट करने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई गई है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टीवी एंकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह किसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान नफरती भाषण पर रोक लगाए। पीठ ने भारतीय प्रेस परिषद और नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्रॉडकास्टर्स को अभद्र भाषा और अफवाह पैâलानेवाली याचिकाओं में पक्षकार के रूप में शामिल करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने मामले में भारतीय प्रेस परिषद और नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्रॉडकास्टर्स को पक्षकार बनाने की मांग की थी।

अन्य समाचार