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`सुप्रीम’ आदेश, मणिपुर हिंसा में जान गंवानेवालों का ७ दिनों में हो अंतिम संस्कार!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

मणिपुर हिंसा में मारे गए सैकड़ों लोगों के शवों का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। शवों के अंतिम संस्कार में राज्य सरकार, प्रशासन और कई सामाजिक संगठन रोड़ा अटका रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मणिपुर सरकार से राज्य में हिंसा में मारे गए ८८ लोगों के लावारिस शवों का अंतिम संस्कार (दाह संस्कार या दफन) सुनिश्चित करने को कहा। अदालत ने कहा कि यदि कोई दावेदार नहीं है, तो अधिकारियों को उनके डीएनए नमूने प्राप्त करने के बाद धार्मिक संस्कारों के साथ शवों का निपटान करना होगा। २८ नवंबर २०२३ को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वह मणिपुर हिंसा में जान गंवानेवाले लोगों को सम्मानजनक तरीके से दफनाने की उचित व्यवस्था करे। अदालत ने यह निर्देश न्यायमूर्ति गीता मित्तल के नेतृत्व वाली समिति द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के आधार पर दिया। मणिपुर हिंसा में पीड़ितों के मुआवजे और पुनर्वास जैसे मानवीय पहलुओं की निगरानी के लिए ७ अगस्त २०२३ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समिति का गठन किया गया था। बता दें कि मंगलवार को समिति की रिपोर्ट ने खंडपीठ को अवगत कराया कि राज्य में बिना दफनाए १७५ शव हैं। इनमें से १६९ शवों की पहचान की गई, इनमें से ८१ शवों पर रिश्तेदारों या निकट संबंधियों ने दावा किया, ८८ लावारिस थे और शेष छह शव मुर्दाघर में अज्ञात थे।

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