मुख्यपृष्ठनए समाचारस्वाइन फ्लू का कहर! पुणे में सबसे अधिक मामले, सर्वाधिक १३ मौतें

स्वाइन फ्लू का कहर! पुणे में सबसे अधिक मामले, सर्वाधिक १३ मौतें

सामना संवाददाता / पुणे
महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। पुणे के बाद मुंबई, ठाणे, नागपुर, कोल्हापुर और नासिक में स्वाइन फ्लू के सबसे अधिक संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक मध्य अगस्त तक राज्य में लगभग १,४४९ व्यक्तियों में स्वाइन फ्लू का पता चला है। इनमें से ४३ मरीजों ने संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया है। पुणे में सबसे अधिक १३ मौतें दर्ज की गर्इं। इसके बाद नासिक, ठाणे और नागपुर में क्रमश: ६ , ५ और ४ मौतें दर्ज की गई हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक २००९ में महामारी पैâलने के बाद से महाराष्ट्र में अब तक एच१एन१ वायरस के कारण ३,७३५ मौतें हुई हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के विश्लेषण के अनुसार पिछले १३ वर्षों में लगभग ३५,४०७ व्यक्ति स्वाइन फ्लू से संक्रमित हुए हैं। पुणे में इस साल संक्रमण के ३८२ मामले सामने आए हैं, जबकि मुंबई और ठाणे में क्रमश: २९१ और २४५ मामले सामने आए हैं।
महाराष्ट्र के निगरानी अधिकारी डॉ. प्रदीप आवटे ने बताया कि महाराष्ट्र का समग्र निगरानी और प्रयोगशाला नेटवर्क नियमित रूप से कोविड और स्वाइन फ्लू से संबंधित सैंपल्स कलेक्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू पहले आते-जाते रहनेवाला था, लेकिन अब एक स्थानीय रोग बन गया है। डॉ. दीपेंद्र त्रिपाठी (इंटेंसिविस्ट) ने कहा कि स्वाइन फ्लू में मृत्यु दर अधिकतम को-मॉर्बिड स्थितियों के साथ उच्च आयु वर्ग के लोगों में होती है और इसके मुख्य लक्षणों में बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द शामिल हैं।
डबल डिजिट तक पहुंचा मौत का आंकड़ा
साल २०१५ में सबसे अधिक ८,५८३ मामले सामने आए, जिनमें से ९०५ मरीजों की मृत्यु हुई। २०१८ में २,५९४ में स्वाइन ़फ्लू का संक्रमण पाया गया और ४६२ की मौत हुई। २०२० और २१ में एच१एन१ के क्रमश: १२१ और ३८७ लोग संक्रमित पाए गए। हालांकि इन दो सालों में मौत का आंकड़ा घट कर क्रमश: ३ और २ हो गया, लेकिन मौजूदा वर्ष के महज सा़ढ़े ७ महीने में ही संक्रमण के मामले १,४४९ हो गए और मौत का भी दो डिजिट में बढ़कर ४३ हो गया।
जांच के लिए भेजे जाते हैं नमूने
डॉ. प्रदीप आवटे के मुताबिक राज्य में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मरीजों को देखते हुए उनके सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं। इससे मरीजों को तत्काल इलाज उपलब्ध हो रहा है।

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