मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : आनंद-नीतिश जुगलबंदी

झांकी : आनंद-नीतिश जुगलबंदी

अजय भट्टाचार्य

पिछले शुक्रवार पूर्व सांसद आनंद मोहन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की सहरसा में हुई जुगलबंदी बिहार की सियासत में नए आयाम की आहट दे गया। पंचगछिया में आनंद मोहन के दादा स्वतंत्रता सेनानी राम बहादुर सिंह एवं चाचा पद्मानंद सिंह ब्रह्मचारी की मूर्ति का अनावरण इस जुगलबंदी का जरिया बना। यह दूसरा मौका था, जब आनंद मोहन के घर नीतीश कुमार पहुंचे थे। इस लोकार्पण समारोह के बाद रैली भी हुई। करीब छह महीने पहले आनंद मोहन रिहा हुए थे। अब वर्षों बाद नीतिश कुमार और आनंद मोहन एक साथ मंच पर दिखे। आनंद मोहन के मुताबिक, कोसी के गांधी के नाम से प्रख्यात राम बहादुर सिंह हमारे दादा थे। उन्हीं के साथ १९४२ के प्रखर क्रांतिकारी थे पद्मानंद सिंह ब्रह्मचारी, जिनके नाम से अंग्रेज कांपते थे। चर्चा है कि आनंद मोहन जदयू में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, कुछ दिनों पहले ही उनके बेटे अंशुमान आनंद ने इस बात को खारिज कर दिया था। कहा था कि मेरे भाई (चेतन आनंद) राजद के विधायक हैं आरजेडी से और वो राजद में ही रहेंगे। मां भी राजद में रहेंगी। रही बात मेरे पिता की तो जनवरी में जैसी रैली होगी उसके अनुसार देखा जाएगा कि आगे क्या करना है।

चाणक्य की मीटिंग टली
भाजपा के चाणक्य को सोमवार को इंदौर पहुंचना था। प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए १७ नवंबर को होने वाले मतदान के लिए पर्चा भरने का परसों आखिरी दिन था। इंदौर संभाग में भाजपा के चुनावी अभियान को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई में सोमवार को होने वाली समीक्षा और मूल्यांकन बैठक अचानक स्थगित कर दी गई। इस बैठक की नई तारीख अभी तय नहीं है। इंदौर संभाग में भाजपा के कई उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया। अब कहा यह जा रहा है कि नामांकन दाखिल करने के लिए उम्मीदवारों की रैलियों के आयोजन के मद्देनजर इंदौर संभाग चुनाव अभियान को लेकर शाह की अगुवाई वाली समीक्षा और मूल्यांकन बैठक स्थगित कर दी गई, जबकि इस अहम बैठक में इंदौर संभाग के ५० प्रमुख पदाधिकारियों को हिस्सा लेना था। किसानों और आदिवासियों की बड़ी आबादी वाले इस संभाग में कुल ३७ विधानसभा सीटें हैं। २०१८ के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को इस क्षेत्र में कांग्रेस के हाथों बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था। मौजूदा हालात और पूर्वानुमान संकेत देते हैं कि इंदौर में पार्टी महासचिव वैâलाश विजयवर्गीय की सीट भी खतरे में है।

समधी-समधन में फिर जंग
मध्य प्रदेश की डबरा विधानसभा सीट पर एक बार फिर समधी और समधन आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने सुरेश राजे को एक बार फिर अपना प्रत्याशी घोषित किया है। राजे का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गर्इं पूर्व मंत्री इमरती देवी से मुकाबला है। इमरती और राजे के बीच समधी और समधन का रिश्ता है। इमरती देवी डबरा से कांग्रेस की टिकट पर तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं। २०१८ में उनके मुकाबले भाजपा ने सुरेश राजे को ही मैदान में उतारा था लेकिन वे हार गए थे। २०२० में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत की तो इमरती भी विधायक पद से इस्तीफा देकर उनके साथ भाजपा में चली गई थीं। कमलनाथ मंत्रिमंडल की तरह ही उन्हें शिवराज मंत्रिमंडल में भी मंत्री बनाकर रखा गया। उपचुनाव में उन्हें डबरा से भाजपा की ओर से उतारा गया और उनका मुकाबला सुरेश राजे से ही हुआ, जो कि दल बदल कर कांग्रेस के प्रत्याशी बन गए थे। सुरेश राजे ने अपराजेय मानी जाने वाली अपनी समधन इमरती देवी को करारी शिकस्त देकर जीत हासिल की। अब दोनों लगातार तीसरी बार चुनावी मैदान में आमने-सामने होंगे। कुछ दिन पहले राजे से संबंधित एक सीडी सामने आई थी, जिसे राजे ने यह कहकर खारिज किया था कि डबरा कांग्रेस के ही कुछ नेता नहीं चाहते हैं कि वे विधानसभा चुनाव लड़ें। इसके लिए उनके द्वारा यह ओछी हरकत की गई है। बहरहाल, कांग्रेस ने सीडी कांड को एक तरफ रख फिर राजे को मैदान में उतारा है। पार्टी का पूरा नेतृत्व राजे के साथ खड़ा रहने के कारण राजे के हौसले बुलंद हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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