मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: मंत्रियों पर दांव, तृणमूल में घमासान, अंबाती का यू-टर्न

झांकी: मंत्रियों पर दांव, तृणमूल में घमासान, अंबाती का यू-टर्न

अजय भट्टाचार्य

मंत्रियों पर दांव

लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के कुछ मंत्रियों को उम्मीदवारी देने के मुद्दे पर कांग्रेस में मंथन चल रहा है। पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। १० जनवरी को हारे हुए उम्मीदवारों, विधायकों और ब्लॉक स्तर के नेताओं के साथ बैठक होगी। राजनीति में कुछ भी हो सकता है। कुछ मंत्रियों को लोकसभा चुनाव लड़ना पड़ सकता है, लेकिन यह पार्टी आलाकमान द्वारा तय किया जाएगा। आलाकमान ने लोकसभा चुनाव लड़ने वाले मंत्रियों की किसी भी सूची को स्वीकार नहीं किया है। बीती ४ जनवरी को नई दिल्ली में आलाकमान की बैठक में सिद्धारमैया और डीके ने कुछ मंत्रियों की संभावित उम्मीदवारों की एक रिपोर्ट सौंपी है जिन्हें २८ लोकसभा सीटों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में तीन से चार और कुछ स्थानों पर आठ से दस उम्मीदवारों के नाम हैं।

तृणमूल में घमासान

एक तरफ बंगाल में विभिन्न कारणों से ईडी, सीबीआई व अन्य केंद्रीय एजेंसियों के हमले झेल रहे तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हलाकान हैं तो दूसरी तरफ पार्टी में नेतृत्व की उम्र को लेकर भी घमासान मचा हुआ है। अभिषेक बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के लिए ऊपरी आयु सीमा की अवधारणा को पेश किया था। इस कारण पार्टी में पुराने नेताओं और नए चेहरों के बीच एक सामंजस्य की स्थिति नहीं बन सकी है। दोनों ही गुटों के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, ऊपरी आयु सीमा की अवधारणा के खिलाफ पुराने वफादारों ने काफी तीखी प्रतिक्रियाएं दी थींr, जिसके बाद गुटबाजी की संभावना काफी अधिक बढ़ सकती थी। पार्टी की स्थापना के बाद से तृणमूल कांग्रेस से जुड़े दिग्गज नेताओं में से एक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी ने १ जनवरी को तृणमूल भवन में पार्टी की २७वीं स्थापना दिवस की सालगिरह के जश्न के अवसर पर एक कार्यक्रम में इस मामले पर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की थी। इस पर अभिषेक बनर्जी के करीबी पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और अभिषेक बनर्जी के संबंध में बख्शी की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। घोष ने कहा, ‘अभिषेक बनर्जी मैदान में बने हुए हैं और अगर नेतृत्व उनकी बात सुनेगा तो पार्टी को फायदा होगा। मुझे प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कहे गए शब्दों पर गंभीर आपत्ति है।’ इसके बाद बयानों की बाढ़ आ गई और दोनों पक्षों के नेता सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक ममता बनर्जी द्वारा सख्त हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तब तक २०२४ के लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन के समय यह अंदरूनी कलह गंभीर रूप ले लेगी, जिसमें हर कोई अपने पक्ष में अधिकतम संख्या में उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।

अंबाती का यू-टर्न

एक हफ्ता पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की उपस्थिति में वाईएसआरसी में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर अंबाती रायडू ने एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में शनिवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने घोषणा करते हुए एक संदेश पोस्ट किया और कहा कि वे कुछ समय के लिए राजनीति से दूर रहेंगे। ‘यह सभी को सूचित करना है कि मैंने वाईएसआरसीपी छोड़ने और कुछ समय के लिए राजनीति से बाहर रहने का फैसले किया है। आगे की कार्रवाई के बारे में उचित समय पर सूचित किया जाएगा।’ अंबाती २८ दिसंबर, २०२३ को वाईएसआरसी में शामिल हुए थे। उस समय राजमपेट के सांसद पीवी मिथुन रेड्डी और उपमुख्यमंत्री के नारायण स्वामी मौजूद थे। उन्होंने १० दिनों के भीतर वाईएसआरसी छोड़ दिया। गुंटूर के रहने वाले रायडू ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। कई राज्य टीमों के लिए भी खेला और आईपीएल में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी का प्रतिनिधित्व किया। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने क्रिकेट छोड़कर राजनीति में आकर लोगों की सेवा करने का इरादा जताया था। हालांकि, उन्होंने बहुत जल्दी यू-टर्न ले लिया। खबर है कि अंबाती आगामी चुनाव में गुंटूर से चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रहे थे, उन्होंने अपनी संभावनाएं कम होते देख शायद पार्टी छोड़ दी है।

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