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झांकी : भयानी की घर वापसी

अजय भट्टाचार्य

गुजरात में विसावदर से आम आदमी पार्टी के विधायक रहे भूपेंद्र भयानी अपने समर्थकों सहित भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। राज्य अध्यक्ष सीआर पाटील की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने के बाद भयानी ने कहा कि यह मेरी घर वापसी है, क्योंकि विधायक बनने से पहले मैं इसी पार्टी का हिस्सा था। मैं फिर से भाजपा में इसलिए आया हूं, ताकि मेरे क्षेत्र का विकास हो सके। मैं पद या टिकट पाने के लिए भाजपा में नहीं आया हूं। विसावदर उपचुनाव के लिए भाजपा किसी को भी उम्मीदवार बनाए, यहां की जनता बड़े अंतर के साथ उसे जिताएगी। आप से इस्तीफा देते वक्त भी भयानी ने कहा था कि वो मोदी को पसंद करते हैं। भूपेंद्र भयानी आम आदमी पार्टी के उन पांच विधायकों में से एक थे, जिन्होंने २०२२ के गुजरात विधानसभा में जीत हासिल की थी। २०२२ के चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ था कि आम आदमी पार्टी को गुजरात के विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी। `आप’ से जुड़ने से पहले भयानी भेसन गांव के सरपंच थे।
मोदी की चुप्पी, भाजपाई निराश
ओडिशा में आगामी चुनावों में बीजद पर आक्रामक रूप से मुकाबला करने की तैयारी में जुटी भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी से परेशान है। पिछले दिनों संबलपुर के नए आईआईएम परिसर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को अपना `मित्र’ (मित्र) के रूप में संबोधित करने वाले मोदी ने राज्य में पार्टी तंत्र को भ्रमित कर दिया है। चूंकि राज्य में तेजी से नजदीक आ रहे चुनावों से पहले यह प्रधानमंत्री की पहली सार्वजनिक सभा था तो उम्मीद यह थी कि वह चुनाव अभियान के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को दिशा देंगे लेकिन मोदी के भाषण में कोई तेजी नहीं थी। उन्होंने बीजद सरकार के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा, जिससे पश्चिमी क्षेत्र के सात संसदीय क्षेत्रों के तहत ३५ विधानसभा क्षेत्रों से उन्हें सुनने आए भाजपा कार्यकर्ताओं को निराशा हुई। मोदी का अधिकांश भाषण २०१४ से पहले १० वर्षों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की उदासीनता के मुकाबले राज्य में उनकी सरकार के योगदान का तुलनात्मक बयान था। भाजपा विधायकों को सबसे ज्यादा हैरानी बीजद सरकार पर प्रधानमंत्री की चुप्पी से हुई। पिछले महीने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ अपनी पहली बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार के लंबे कार्यकाल को समाप्त करने के लिए उनकी तैयारियों को जानना चाहा था। मोदी ने उनसे कहा था कि राज्य में सरकार बनाने का यह उनके लिए सबसे अच्छा मौका है।
सामूहिक शादी फर्जीवाड़ा
उत्तर प्रदेश के बलिया में हुए अनोखे सामूहिक शादी समारोह की अब परत दर परत खुल रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सामने आया था। अब पुलिस जांच में पता चला है कि शादी करने ५६८ जोड़ों में कोई भाई-बहन था तो कोई पहले से ही शादीशुदा है। इतना ही नहीं टेंट वाले, हलवाई, राहगीर तक पकड़कर दूल्हे बनाए गए थे। पुलिस ने मामले में अभी तक कुल १५ लोगों को गिरफ्तार किया है। राज्य सरकार जरूरतमंद लड़कियों को शादी के लिए ५१,००० रुपए की राशि देकर मदद करती है। इस पैसों के लालच में आरोपियों ने इस पूरे घोटाले को रचा था। गिरोह गरीब लड़कियों को झूठी शादी करने के लिए पहले उनका ब्रेनवॉश करता फिर इस शादी समारोह में कुछ घंटों के लिए शामिल होने पर उनके परिजनों को दो से पांच हजार रुपए दिए जाते थे। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बलिया में ५६८ जोड़ों का सामूहिक शादी समारोह था। इस समारोह की कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुर्इं, जिसमें एक दूल्हे के सामने १० से ज्यादा दुल्हन खड़ी थींr। इसके अलावा वीडियो में लड़कियां दूल्हा नहीं होने पर खुद ही वरमाला पहनती नजर आ रहीं हैं। हद तो यह थी कि कुछ दुल्हनों के वेश में तो लड़के थे, जो घूंघट में खुद को छिपाए बैठे थे। वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस हरकत में आई और अब इस मामले में १५ लोगों को पकड़ा गया है। राज्य सरकार सामूहिक शादी करने के लिए आवेदन देखने के बाद उन्हें ५१ हजार रुपए तक की राशि देती है, जिसमें ३५ हजार रुपए लड़की को दिए जाते हैं। १० हजार रुपए लड़की के लिए शादी का सामान जैसे कपड़े, मेकअप का सामान आदि लेने के लिए होते हैं।

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