मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : नंगे आए, नंगे जाना है

झांकी : नंगे आए, नंगे जाना है

अजय भट्टाचार्य

बीते शनिवार को भाजपा उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तो खरगोन जिले की ३ बची हुई सीटों भगवानपुरा, खरगोन और भीकनगांव के उम्मीदवारों के नाम तय हुए। टिकट वितरण के बाद तीनों विधानसभाओं से भाजपा प्रत्याशियों के नाम तय होने के बाद सब कुछ सामान दिख रहा था। लेकिन बुधवार को जिला निर्वाचन कार्यालय नामांकन फॉर्म लेने पहुंचे भाजपा के भगवानपुरा विधानसभा के पूर्व विधायक जमुना सिंह सोलंकी अकेले ही झोला लेकर जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंचे। मीडिया से दार्शनिक अंदाज में बोले, `नामांकन फॉर्म लेने आया हूं। अकेले आए हैं, अकेले जाना है। नंगे आए हैं, नंगे जाना है। निर्दलीय फॉर्म भर रहा हूं। भाजपा ने तो जेल जाने वालों को टिकट दिया है।’ माना जा रहा है कि पूर्व विधायक सोलंकी को मनाने के लिए क्षेत्रीय सांसद गजेंद्र पटेल को भेजा जाना था, लेकिन उससे पहले ही सोलंकी ने अपने पट्टे खोल दिए। पटेल भगवानपुरा विधानसभा से चंदर सिंह वास्कले का नामांकन फॉर्म भरने उनके साथ हो लिए। सोलंकी का कहना है कि फॉर्म पार्टी से भी भर रहा हूं और टिकट नहीं बदला तो निर्दलीय लड़ूंगा। सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के समझाने के प्रयास के सवाल पर जमुना सिंह सोलंकी ने कहा, `वो (सांसद) समझाने आए तो, दो जूते लगाऊंगा।

तेलंगाना भाजपा को झटका
इधर भाजपा-कांग्रेस के नाराज नेताओं को पार्टी में शामिल करने का इंतजार कर रही थी, उधर कांग्रेस सेंधमारी कर तेलंगाना भाजपा के तेनालीराम को ले उड़ी। तेलंगाना में भाजपा जिस नेता को स्थानीय चाणक्य बनाकर चुनावी जंग जीतना चाहती थी, उन जी. विवेकानंद ने पार्टी से इस्तीफा देकर राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में घर वापसी कर ली है। पेद्दापल्ली के पूर्व सांसद विवेकानंद अगस्त २०१९ में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से भाजपा में शामिल हुए और भाजपा की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष थे। ६६ वर्षीय विवेकानंद ने २००९ में पेद्दापल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। फिर २०१४ में बीआरएस के बाल्का सुमन से हार गए थे। विवेकानंद के पिता जी. वेंकटस्वामी पेद्दापल्ली १९८९, १९९१ और १९९६ में जीतकर तीन बार सांसद रहे। विसाका इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष और वी६ तेलुगु समाचार चैनल और तेलुगु समाचार पत्रों के प्रमोटर विवेकानंद जून २०१६ में बीआरएस में शामिल हुए। उन्हें मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव द्वारा राज्य सरकार का सलाहकार नियुक्त किया गया था। २०१९ के चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होकर उन्होंने दुब्बाका और हुजूराबाद में हुए उपचुनावों में भाजपा की जीत के लिए योजना बनाने और रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मुनुगोडे उपचुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, भाजपा बीआरएस से हार गई। हाल ही में विवेकानंद ने भाजपा की गतिविधियों से अलग रहना शुरू कर दिया और पार्टी कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए। खबर है कि अपने और अपने बेटे जी वामसी के लिए कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं।

वारंगल में पहला उभयलिंगी उम्मीदवार
तेलंगाना की वारंगल-पूर्व विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में पहली बार एक उभयलिंगी उम्मीदवार ३० नवंबर को होनेवाले चुनाव के लिए बसपा के बैनरतले मैदान में हैं। बसपा ने चित्रपू पुष्पिता लाया को बी-फॉर्म दिया है। वारंगल के रामन्नापेट में प्रियदर्शिनी कॉलोनी की निवासी पुष्पिता ने एक स्थानीय कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। अपनी सामाजिक सेवा के लिए प्रसिद्ध लाया का लक्ष्य लोगों और उनके प्रतिनिधियों के बीच की दूरी को पाटना है। खासकर निर्वाचन क्षेत्र के निवासियों के सामने आनेवाले मुद्दों को संबोधित करना। अनुसूचित जाति संबद्ध पुष्पिता अपनी मां सुवर्णा के साथ रहती हैं। उसके पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाया रोजगार की तलाश में दिल्ली आ गर्इं। विशेषकर निजी क्षेत्र में नौकरी खोजने के उनके संघर्ष ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में एक कॉल सेंटर में ऑपरेटर के रूप में काम किया। दिल्ली में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने बीएसपी को भी पांच साल समर्पित किए और वारंगल लौटने पर उन्होंने पार्टी के साथ अपना जुड़ाव जारी रखा, जहां वह वंचितों के लिए सामाजिक सेवा गतिविधियों में शामिल थीं। उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम यह हुआ कि दो साल पहले उन्हें वारंगल पूर्व विधानसभा क्षेत्र का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया गया था। उन्होंने घर-घर जाकर अभियान शुरू कर दिया है और लोगों की प्रतिक्रियाओं से बेपरवाह वह हर घर तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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