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झांकी : राजभर को चुनौती

अजय भट्टाचार्य

उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ने सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश राजभर की इज्जत के साथ साथ उनके मंत्री बनने के सपने को भी तोड़ दिया है। उधर सुभासपा से अलग होकर बनी सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश राजभर ने सुभासपा प्रमुख को जहुराबाद विधानसभा से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। उनका कहना है कि जहुराबाद विधानसभा सीट पर ओमप्रकाश राजभर सिर्फ समाजवादी पार्टी के कारण जीत पाए हैं। वे इस्तीफा देकर फिर से इस सीट पर चुनाव लड़ लें, इसे जीत नहीं पाएंगे। पार्टी की प्रदेश प्रभारी उर्मिला राजभर ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें बृजेश राजभर पूरे जोश में कह रहे हैं कि जहुराबाद विधानसभा सीट उन की विरासत नहीं है। वो विरासत समाजवादी गठबंधन से आप जीते हो। ये बृजेश राजभर चैलेंज करता है, अगर ओम प्रकाश राजभर जहुराबाद विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दें और फिर करवा लें उपचुनाव, उनको छठी का दूध याद दिलवा देंगे। ओम प्रकाश राजभर पर निशाना साधने के साथ ही उन्होंने गद्दार तक कह दिया। बोले, `कम से कम दारा सिंह चौहान में एक गुण तो जरूर था, कि वह स्वाभिमानी था। वह ऐसे ही भागकर नहीं चला गया। वो इस्तीफा दिया फिर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और चुनाव हार गया। उसको उस गद्दारी की लिस्ट में नहीं देखा जाएगा। जितनी बड़ी गद्दारी ओम प्रकाश राजभर ने की।’

फोटो पर कयास
जी२० बैठक को लेकर राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे। सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की एक तस्वीर जबरदस्त वायरल हो रही है, जिसमें मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन से नीतीश कुमार की जान पहचान करवा रहे हैं। यह फोटो वायरल होने के बाद से बिहार की राजनीति गरमा गई है और वहां के नेता और पत्रकार कहने लगे हैं कि लगता है एक बार फिर से नीतीश कुमार पलटी मारने वाले हैं। कयास लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन में जा सकते हैं। अगर इंडिया गठबंधन द्वारा नीतीश कुमार को संयोजक नहीं बनाया जाता है तो कुछ भी संभव है। भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी संभव है। कल तक मोदी के आमने-सामने होने से गुरेज करते थे। अब चार घंटे तक साथ बैठे। ये अच्छा है। जीतन राम मांझी ने कहा कि जिस तरह से बाइडेन से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परिचय पीएम मोदी करा रहे हैं, यह आगे के राजनीतिक भविष्य के बारे में संकेत दे रहा है। क्या होगा यह आने वाले दिनों में देखिएगा। अभी सिर्फ कयास लगा सकते हैं।

वसावा गुस्से में
गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा में मतभेद सतह पर सामने आ रहे हैं और कई वरिष्ठ नेता खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। ताजा मामला भरूच से भाजपा सांसद मनसुख वसावा का है। कद्दावर आदिवासी नेता ने पिछले सप्ताह संसदीय बोर्ड की बैठक से यह आरोप लगाते हुए बहिर्गमन किया था कि कुछ लोग वरिष्ठ नेताओं के सामने उनके बारे में गलत बातें कर रहे थे। नाराज नेता ने कहा, `अगर मैं अब नहीं बोलूंगा तो मुझे निशाना बनाया जाएगा।’ वह यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि उनकी छवि साफ-सुथरी है और जो लोग उनके खिलाफ हैं, वे कई घोटालों और ठेकों में शामिल हैं। इस बीच गुजरात भाजपा के एक कद्दावर नेता ने दावा किया कि बुलबुला फूट रहा है और पार्टी को सतर्क रहना होगा और ऐसे मुद्दों का समाधान करना होगा। पार्टी विद अ डिफरेंस को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार बहुमत हासिल होने के बाद राज्य भाजपा अध्यक्ष सी आर पाटिल की नजर सभी २६ लोकसभा सीटों पर ५ लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल करने पर है। जबकि पार्टी के भीतर संशय बना हुआ है। हालांकि, जाति और राजनीतिक प्रभाव जैसे कारक मायने रखते हैं, जब पाटिल तथ्यों के साथ बोलते हैं, तो बहस के लिए बहुत कम जगह होती है। जाहिर है पाटिल से भी वरिष्ठ मूल भाजपाई नेताओं की पूछ परख कम होना भी इस असंतोष का कारण है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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