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झांकी : गिरगिट और टॉस

अजय भट्टाचार्य

बिहार में महागठबंधन की सरकार टूट चुकी है और एक बार फिर बिहार में राजग की सरकार बन गई/रही है। भाजपा सहित अन्य सहयोगी दल नीतिश कुमार के गुणगान में व्यस्त हैं। इसी बीच बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने नीतिश कुमार पर जमकर निशाना साधा और उन्हें गिरगिट रत्न से सम्मानित किया है। तेज प्रताप यादव ने ही नीतिश कुमार को पहली बार पलटू चाचा संबोधित किया था। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखते हुए तेज प्रताप यादव ने लिखा है कि ‘गिरगिट’ तो बस यूं ही बदनाम है..! रंग बदलने की रफ्तार से तो पलटिस कुमार को भी ‘गिरगिट रत्न‘ से सम्मानित करना चाहिए। तेज प्रताप से इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, मगर हमारे अंबरनाथ वाले दोस्त लालाजी की भी प्रतिक्रिया किसी से कम नहीं है। लालाजी ने लिखा कि आईसीसी अब क्रिकेट मैच के टॉस में गड़बड़ी को रोकने के लिए सिक्के की जगह नीतिश कुमार को उछालेगी, क्योंकि सिक्का पलटने में ज्यादा समय लेता है।
पहले इस्तीफा फिर समर्थन
महागठबंधन की गांठ तोड़कर भाजपा के साथ गलबहियां करने पहुंचे नीतिश कुमार पर भाजपा पूरा भरोसा कर रही है यह भी सच नहीं है। महागठबंधन छोड़ने से पहले नीतिश कुमार चाहते थे कि भाजपा उन्हें समर्थन पत्र सौंप दे, मगर इस पूरे ऑपरेशन में भाजपा भी फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही थी। राज्यपाल से मिलकर इस्तीफा देने से पहले भाजपा और जदयू के बीच नया खेल शुरू हो चुका था। भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के सामने शर्त रखते हुए कहा है कि पहले आप इस्तीफा दीजिए, तब हम आपका समर्थन करेंगे। दूसरी ओर जदयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि भाजपा द्वारा समर्थन पत्र दिए जाने पर ही नीतिश कुमार इस्तीफा देने जाएंगे। राजभवन जाते समय जदयू का एक दूत भाजपा दफ्तर पहुंचा और प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी को लेकर राजभवन की तरफ बढ़ा। दरवाजे पर खड़ी नीतिश की कार में सम्राट भी सवार हुए और राजभवन में जब नीतिश कुमार का इस्तीफा प्रसंग समाप्त हुआ, तब नीतिश के साथ ही मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़ गए। मजे की बात यह है कि नीतिश को गद्दी से उतारने तक पगड़ी न उतारने की कसम खाने वाले सम्राट अब भी पगड़ी पहने हुए थे/हैं।
सब पलटूमार
जनता दल यूनाइटेड के मुखिया नीतिश कुमार फिर एक बार पाला बदल चुके हैं। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि नीतिश कुमार द्वारा फिर से पलटी मारने की घटना ने साबित कर दिया है कि बिहार में सिर्फ नीतिश ही नहीं सभी दल पलटूमार हैं। उन्होंने दावा किया कि २०२५ के चुनाव तक ये गठबंधन भी नहीं चल पाएगा और इससे भाजपा को बड़ा नुकसान होगा। नीतिश कुमार अगले चुनाव में किसी गठबंधन से चुनाव लड़ें अगर उनकी पार्टी की २० सीट भी आ गई तो मैं अपने राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लूंगा। मैं एकमात्र व्यक्ति रहा हूं, जो पिछले एक साल से वैâमरे पर कहता रहा हूं कि नीतिश कुमार कभी भी पलट सकते हैं। हर जगह हमने कहा है कि यह नीतिश कुमार की राजनीति का हिस्सा बन गया है लेकिन आज जो घटना हुई है वह नीतिश कुमार के संदर्भ में नहीं है। नीतिश कुमार पलटूमार हैं या पलटूमार नेताओं के सरदार हैं यह बात तो जनता पहले से जानती है। इस घटना ने यह दिखाया कि पूरे बिहार में जितने राजनीतिक दल और नेता हैं सब पलटूमार हैं। इससे यह भी तय हुआ कि भाजपा भी उतनी ही बड़ी पलटूमार है, जो अभी २-४ महीने पहले कह रहे थे कि नीतिश कुमार के लिए बिहार में भाजपा का दरवाजा बंद है। ये पूरी राजनीतिक व्यवस्था पलटूमार है। कल तक भाजपा के जो समर्थक नीतिश कुमार को गाली दे रहे थे, वे आज से उनको सुशासन का नया प्रतिमूर्ति बताने लगेंगे। दूसरी तरफ राजद नीतिश कुमार को गाली देगी। उनको शराबबंदी में माफियागीरी दिखने लगेगी, भ्रष्टाचार दिखने लगेगा। इस घटना ने यह दिखाया कि नीतिश कुमार ने अपने ही रंग में बिहार की राजनीतिक व्यवस्था को रंग दिया है, जिसमें भाजपा और राजद भी उतने ही बड़े पलटूमार हैं, जितने नीतिश कुमार हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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