मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : दिग्गी का गढ़ पर दावा

झांकी : दिग्गी का गढ़ पर दावा

अजय भट्टाचार्य

कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां मध्य प्रदेश की २९ लोकसभा सीटों पर अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। इस बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। उनका गढ़ राजगढ़ माना जाता है, जहां कांग्रेस ऐसे उम्मीदवार को उतारना चाहती है, जो जीत हासिल कर सके। इसे लेकर दिग्विजय सिंह मंगलवार को रायगढ़ में थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस बार गुना से अच्छा प्रत्याशी उतारना है, इस पर सभा में मौजूद कार्यकर्ता बोले-हुजूर आप ही लड़ लीजिए। पिछले लोकसभा चुनाव २०१९ में उन्होंने भोपाल से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने हरा दिया था। ऐसे में वे इस बार राजगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं, क्योंकि यह लोकसभा सीट उनका गढ़ है। जब कार्यकर्ताओं ने कहा कि हुजूर आप चुनाव लड़िए, तब उन्होंने कार्यकर्ताओं की मांग पर कहा कि क्यों मुझे राजगढ़ से भगाना चाहते हो। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि हम सब लोग मिलकर संघर्ष करेंगे और लड़ाई लड़ेंगे। लोकसभा चुनाव २०२४ में कौन उम्मीदवार रहेगा? इस सभा के बाद चर्चा करेंगे। दिग्विजय सिंह ने बंद कमरे में पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस मीटिंग में राजगढ़ के लिए कांग्रेस का कौन प्रत्याशी होगा, इसे लेकर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह इस सीट से ताल ठोक सकते हैं।
छिंदवाड़ा की घेराबंदी
मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की न्याय यात्रा की तैयारियों के लिए हुई बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के शामिल होने के अगले दिन बुधवार को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में सूबे के वर्तमान मुखिया मोहन यादव रोड शो करने पहुंचे। इसी के मद्देनजर छिंदवाड़ा से सांसद नकुलनाथ ने मुख्यमंत्री का जिले में अपने अंदाज में स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, ‘मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेरे संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा आ रहे हैं। मैं छिंदवाड़ा की जनता की ओर से आपका स्वागत करता हूं। आपसे निवेदन करता हूं कि आप छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज जाकर कार्य की गति देखें, जो कॉलेज आज से लगभग ३ वर्ष पूर्व बनकर तैयार हो जाना था, भाजपा सरकार ने उसका फंड रोककर न सिर्फ हॉस्पिटल का कार्य रोका, बल्कि हजारों लोगों को बेहतर उपचार से वंचित रखा। अस्पताल का कार्य शीघ्र पूर्ण करवाने एवं कटे हुए बजट को पुन: स्वीकृत करें। इसके साथ ही छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी में भी व्यवस्थाओं का अभाव है, जिससे छात्र परेशान हैं एवं जिले के अनेक किसानों ने अतिवृष्टि से अपनी फसल खोई है। आपसे मेरा निवेदन है कि आप जल्द से जल्द इन महत्वपूर्ण मांगों पर अमल करेंगें, ऐसी अपेक्षा करता हूं।’ बहरहाल, मुख्यमंत्री ने नकुलनाथ की अर्ज सुनी या नहीं, अलबत्ता छिंदवाड़ा के डेढ़ हजार कांग्रेसियों को भाजपा का झंडा-डंडा थमाने में सफल रहे। भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेसी नेताओं में इसकी राज्य इकाई के महासचिव अजय सिंह उर्फ अज्जू ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय नेता प्रदीप जूनंकर और स्थानीय सिविल निकायों के कई सदस्य शामिल थे। इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने के साथ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट की सभी नगर पालिकाएं भाजपा के नियंत्रण में हैं। जाहिर है भाजपा कमलनाथ को उनके ही घर में घेरना चाहती है। पिछले लोकसभा चुनाव में यही सीट भाजपा जीत नहीं पाई थी।
कश्मकश
आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष तम्मीनेनी सीताराम इन दिनों बड़ी कश्मकश में फंसे हैं। चुनाव से पहले सत्तारूढ़ वाईएसआरसी के चार विधायक पाला बदलकर तेलुगू देसम पार्टी में चले गए हैं, जबकि दूसरी तरफ तेदेपा के भी चार विधायक वाईएसआरसी में शामिल हो गए हैं। पलटीमारी करने वाले वाईएसआरसी और तेदेपा के सभी विधायक अब अयोग्यता का सामना कर रहे हैं। हालांकि, स्पीकर ने आठों विधायकों को बार-बार बुलाया, लेकिन वे उनके सामने पेश नहीं हुए। कहा जाता है कि वाईएसआरसी के `बागी’ विधायक अनम रामनारायण रेड्डी ने सोमवार को अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होने के लिए अपनी अनिच्छा व्यक्त की थी और बदले में एक पत्र लिखकर वाईएसआरसी के मुख्य सचेतक द्वारा उनकी अयोग्यता पर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। अब अध्यक्ष ने `बागी’ विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों के साथ परामर्श करने का पैâसला किया है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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