मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : मामा से ड्रामा

झांकी : मामा से ड्रामा

अजय भट्टाचार्य

बीते रविवार को मध्य प्रदेश के मंत्री दिल्लीशाही की परिक्रमा में थे। प्रधानसेवक उस दिन वाराणसी यात्रा पर थे और सुल्तान नंबर दो एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में संसद में हुई ताजा कथित घुसपैठ पर बयान दे रहे थे। यही बयान संसद में देने में उनके पास समय नहीं था/है। तो यादवजी पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर वापस मप्र आ गए। अगले दिन शाम को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी दिल्ली में मत्था टेकने पहुंचे, मगर सुपर आलाकमान नंबर एक और दो से नहीं मिल सके। मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष नड्डा से उनकी मुलाकात होती है और मप्र के मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा भी। यह भाजपा का लोकतंत्र है, जिसमें मुख्यमंत्री की बजाय पूर्व मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल के संभावित नामों पर चर्चा होती है। फिलहाल, खबर यह है कि शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक पुनर्वास भी जल्द हो सकता है। शिवराज ने खुद बताया कि वह दक्षिण के राज्यों में जाएंगे। इससे यह माना जा रहा है उन्हें दक्षिण के किसी राज्य का लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारी बनाया जा सकता है। बड़ा जनाधार वाले नेता होने के चलते लोकसभा चुनाव में पार्टी मप्र व अन्य राज्यों में उनका उपयोग कर सकती है। अंदर की राजनीति यह बताती है कि जहां खुद मोदी के तमाम फार्मूले फेल हो गए, वहां का प्रभारी बनाकर मामा को पूरी तरह निपटा देना है।

ये दिल मांगे मोर
ये दिल मांगे मोर की तर्ज पर तेलंगाना विधानसभा चुनावों में हारे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब एमएलसी पद की मांग कर रहे हैं। उनमें से कुछ तो पार्टी से उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग भी कर रहे हैं। चुनाव में असफल रहने वाले प्रमुख नेताओं में प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष मधु यास्खी गौड़, कार्यकारी अध्यक्ष टी जयप्रकाश रेड्डी उर्फ जग्गा रेड्डी, पोडेम वीरैया, एमडी अली शब्बीर, एसए संपत और रामरेड्डी दामोदर रेड्डी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश नेता मांग कर रहे हैं कि उन्हें वर्षों से पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और सेवाओं के लिए मंत्री पद दिया जाए। पार्टी आलाकमान के साथ-साथ मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी को संबोधित एक पत्र में वीरैया ने कहा कि जब १२ कांग्रेस विधायक बीआरएस में शामिल होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने उनसे संपर्क किया और उन्हें ५० करोड़ रुपए और सरकार में वैâबिनेट रैंक का पद देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने सबसे पुरानी पार्टी के प्रति वफादार रहना चुना। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि, वे मुलुगू से मौजूदा विधायक थे, लेकिन उन्होंने २०१८ में दंसारी अनसूया उर्फ सीथक्का को सीट दे दी। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मैंने अपना पूरा जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि पार्टी के प्रति मेरी निष्ठा, प्रतिबद्धता और समर्पण को ध्यान में रखें और एमएलसी पद के लिए मेरे आवेदन पर विचार करें। वैâबिनेट में मुझे भी शामिल करें।

`तथ्य संग्रह करजौचि’
विधानसभा की कार्यवाही में प्रश्नकाल का विशेष महत्व होता है, क्योंकि विधायक पार्टी लाइन से हटकर मंत्रियों से जवाब मांगते हैं और उन्हें अपने विभागों के कामकाज के लिए जवाबदेह ठहराते हैं। सदन में रखी गई जानकारी और आंकड़े तथ्यात्मक रूप से सही माने जाते हैं। लेकिन कई सवालों के जवाब में अधूरी जानकारी या `आंकड़े (डेटा) एकत्र किया जा रहा है’ जैसे उत्तर अब आम बात हो गई है। ओडिशा में हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में कई प्रश्न अनुत्तरित रह गए थे और कई का लिखित उत्तर एक ही वाक्य था – `तथ्य संग्रह करजौचि’ (डेटा एकत्र किया जा रहा है)। विधानसभा में सरकार के `डेटा एकत्र किए जाने’ के नारे ने विधायकों की नाराजगी बढ़ा दी है। जिस तरह से मंत्री और उनके संबंधित विभाग महत्वपूर्ण मुद्दों पर कुछ महत्वपूर्ण सवालों का इलाज कर रहे हैं, उससे न केवल विधायक नाराज हैं, बल्कि इसने एक बुरी मिसाल भी कायम की है। ओडिशा विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के अनुसार, सदन में किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए कम से कम १४ दिन का नोटिस दिया जाता है। यदि अवधि पर्याप्त नहीं है तो नियमों को तदनुसार बदला जा सकता है। एक विधायक का कहना है कि मंत्रियों को यह कहकर सवाल नहीं छोड़ना चाहिए कि जानकारी या डेटा एकत्र किया जा रहा है। सत्ता से प्रश्न कार्यशील लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसे इतने हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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