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झांकी : कर्नाटक में खेल फेल

अजय भट्टाचार्य

उत्तर प्रदेश और हिमाचल की तरह कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा का खेल फेल हो गया और भाजपा-जेडीएस का पांचवां उम्मीदवार हार गया। भाजपा के दो विधायक सत्तारूढ़ कांग्रेस के साथ नजर आए। कांग्रेस को तीन सीटें मिलीं और भाजपा को एक सीट हासिल हुई। पूर्व केंद्रीय मंत्री और एआईसीसी कोषाध्यक्ष अजय माकन, कांग्रेस के सैयद नसीर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर, भाजपा के नारायणसा के भंडागे को ३ अप्रैल, २०२४ से छह साल के कार्यकाल के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। जेडीएस के पूर्व राज्यसभा सदस्य डी. कुपेंद्र रेड्डी को आवश्यक ४५ के मुकाबले ३६ वोट मिले और वे हार गए। निर्वाचित २२४ विधायकों में से २२२ ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और सभी वोट वैध थे। जहां येल्लापुर के भाजपा विधायक शिवराम हेब्बार अनुपस्थित रहे, वहीं सुरपुरा के कांग्रेस विधायक राजा वेंकटप्पा नाईक का रविवार को निधन हो गया। नतीजे अपेक्षित तर्ज पर थे, सिवाय उस नाटक के जिसमें भाजपा के दो बागी विधायक शामिल थे जिन्होंने कांग्रेस का पक्ष लेने के लिए पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, जिससे कोई फर्क नहीं पड़ा। यशवंतपुर विधायक एसटी सोमशेखर ने कांग्रेस के माकन के लिए क्रॉस वोटिंग की, जबकि हेब्बार नहीं आए। दोनों के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है।
डील बंगला
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिस वक्त सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पार्टी के विधायकों के साथ बैठक और डिनर का आयोजन कर रहे थे, उसी वक्त भाजपा सपा विधायकों को अपने पाले में करने में लगी हुई थी। समाजवादी पार्टी में तोड़-फोड़ के लिए भाजपा ने दयाशंकर सिंह के बंगले को अपना अड्डा बनाया। राज्यसभा चुनाव के पहले रातभर सपा के विधायक बंगले पर आते-जाते रहे और सभी डील इसी बंगले पर हुर्र्इं। भाजपा के आठवें प्रत्याशी संजय सेठ भी राज्यसभा चुनाव से पहले इसी बंगले पर डेरा डाले हुए थे। वोटिंग से पहले मनोज पांडेय का पार्टी से इस्तीफा भी तय था, इस्तीफा प्रहसन से पहले उन्होंने प्रधानसेवक मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी बात की। जल्द ही दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से उनकी मुलाकात का कार्यक्रम तय है। भाजपा उन्हें रायबरेली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। मनोज दयाशंकर सिंह के साथ राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान करने पहुंचे थे। मनोज पांडेय के अलावा पूजा पाल, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, अमेठी विधायक महाराजी देवी, विनोद चतुर्वेदी, पल्लवी पटेल और राकेश पांडेय भी भाजपा के पाले में पहुंच गए। राकेश पांडेय के बेटे रितेश पांडेय इस पालाबदल से पहले ही बसपा का हाथी छोड़कर कमल दल में शामिल हो चुके थे इसलिए राकेश पांडेय को भी पाला बदलना ही था। संख्याबल के हिसाब से न तो भाजपा के पास अपने ८वें उम्मीदवार को जिताने के लिए आंकड़े पूरे थे और न ही सपा के पास अपने तीसरे प्रत्याशी के लिए पर्याप्त संख्या बल। ऐसे में भाजपा के ८वें प्रत्याशी संजय सेठ की जीत बंगले के खेला का नतीजा है।
सीतारमण और जयशंकर भी अखाड़े में
आगामी लोकसभा चुनाव के अखाड़े में भाजपा ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लोकसभा चुनाव में उतारने का पैâसला किया है। दोनों नेता किस-किस सीट से चुनाव लड़ेंगे यह तय नहीं है। दोनों ही नेताओं ने अब तक चुनाव नहीं लड़ा है और वर्तमान में भी दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं। भीतरखाने की खबर यह है कि पार्टी इस बार दोनों को ही लोकसभा चुनाव में उतारने की योजना बना रही है। ऐसे संकेत हैं कि सीतारमण को कर्नाटक की किसी सीट से मैदान में उतार सकती है। सीतारमण फिलहाल कर्नाटक से ही राज्यसभा की सदस्य हैं, जबकि एस जयशंकर गुजरात से राज्यसभा भेजे गए थे। जयशंकर राजनयिक रह चुके हैं। २०१५ में वह विदेश सचिव के पद पर तैनात थे। २०१९ में उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्रालय सौंपा गया और पार्टी ने उन्हें गुजरात से राज्यसभा का टिकट दिया। २००८ में भाजपा में शामिल हुर्इं सीतारमण २०१४ तक पार्टी की प्रवक्ता रहीं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें जूनियर मंत्री बनाया गया था। उस समय उन्हें आंध्र प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। उन्होंने २०१७ से २०१९ के बीच देश के रक्षा मंत्री का पदभार संभाला। फिर अरुण जेटली के निधन के बाद उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मिली थी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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