मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : चुगलखोर आईपीएस

झांकी : चुगलखोर आईपीएस

अजय भट्टाचार्य

गुजरात पुलिस विभाग में चर्चा है कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रोजाना अपने राजनीतिक आकाओं को समाचार सुनाया करते हैं, जिनमें आका को पुलिस मुख्यालय, डीजीपी कार्यालय और राज्य पुलिस में दिन-प्रतिदिन की गतिविधि के बारे में भरपूर सूचनाएं होती हैं। कुछ आईपीएस अधिकारियों ने इस अधिकारी को `चुगलीखोर’ आईपीएस का नाम दिया है। ऐसी चर्चा है कि यह आईपीएस अधिकारी अक्सर अपने राजनीतिक आकाओं को अन्य आईपीएस अधिकारियों, ज्यादातर अधीनस्थों, के बारे में बेतुकी और गलत जानकारी देता है। चर्चा है कि इस आईपीएस अधिकारी ने भी एक महत्वपूर्ण विभाग मांगा था और काफी मान-मनौव्वल के बाद उसे उसका मनपसंद विभाग मिल भी गया। आखिर मुफ्त में कोई चुगली क्यों करेगा!

नीतिश का माफीनामा
बिहार विधान सभा में विवादित बयान को लेकर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार बैकफुट पर हैं और उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि अगर मेरी किसी बात से किसी को तकलीफ पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं और अपनी बातों को वापस लेता हूं। नीतिश कुमार के विवादित बयान को लेकर भाजपा ने कल सदन में जमकर हंगामा किया। माफीनामे के बाद भी विपक्ष के नेता शांत नहीं हुए और हंगामा करने लगे। लिहाजा सदन को स्थगित कर दिया गया। भाजपा नेताओं ने नीतिश कुमार से इस्तीफे तक की मांग कर दी। नीतिश कुमार ने भी भरी सदन में माफी मांगते हुए कहा कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। हमलोग तो महिलाओं के कल्याण के लिए हमेशा से काम करते आए हैं। हमने महिलाओं को नौकरी में आरक्षण दिया। फिर भी यदि किसी को मेरी बातों से ठेस पहुंची तो मैं माफी मांगता हूं। मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं। मैं न सिर्फ शर्म कर रहा हूं बल्कि खुद की निंदा भी करता हूं। अगर हमने कोई बात कही और इस पर इतनी निंदा हो रही है तो मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं। अगर कोई मेरी निंदा करता रहता था तो मैं उनका अभिनंदन करता रहता हूं।

बंगाल भाजपा में अंतर्कलह
पश्चिम बंगाल में अपने लिए सियासी जमीन तलाशने में जुटी भाजपा के लिए आंतरिक कलह चिंता का सबब बन चुकी है। आगामी लोकसभा चुनाव में बंगाल की ४२ में से ३५ सीटें जीतने का लक्ष्य बना चुकी भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी इससे परेशान है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी भी दी है। बीते एक साल में भाजपा के अंदर आंतरिक मतभेद तेजी से उभरे हैं। इन मतभेदों की जड़ में जिला स्तर पर संगठन में हुए बदलाव हैं। गौरतलब है कि न तो पंचायत चुनाव में भाजपा कोई असर डाल पाई और धुपगुड़ी विधानसभा उपचुनाव में भी उसे तृणमूल के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। राज्य में भाजपा नेता प्रदेश नेतृत्व के प्रति अपनी असंतुष्टि जाहिर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पार्टी में अनुभवी नेताओं के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस सिलसिले में केंद्र में शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष सरकार को भाजपा कार्यकर्ता पार्टी ऑफिस में बंद कर रोष जता चुके हैं। कार्यकर्ता मंत्री से इस बात को लेकर नाराज थे कि वह उन्हें तृणमूल के कथित अत्याचार से बचा नहीं पा रहे हैं। इसके बाद भी सुभाष के खिलाफ ही बांकुरा में प्रदर्शन हुए थे। तब उनके ऊपर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगा था। कुछ ऐसा ही ११ अक्टूबर को भी हुआ था, जब उत्तर २४ परगना जिले के बारासात के भाजपा कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कोलकाता के साल्ट लेक में पार्टी कार्यालय के बाहर हंगामा किया। उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला समिति के गठन का यह कहते हुए विरोध किया कि कुछ पदाधिकारी तृणमूल समर्थक हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का इस तरह का विरोध प्रदर्शन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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