मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: भाजपा-जदसे में जुगलबंदी

झांकी: भाजपा-जदसे में जुगलबंदी

अजय भट्टाचार्य

कर्नाटक में अगर सब कुछ ठीक रहा तो लोकसभा चुनाव आते-आते पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाला जद (एस) भाजपा की गोद में अंगूठा चूसता मिलेगा। इस अटकल को खुद पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, जो भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं, ने हवा दी है। बकौल येदियुरप्पा भाजपा २०२४ के लोकसभा चुनावों के लिए बन रही सहमति के तहत जद (एस) कर्नाटक में कुल २८ लोकसभा सीटों में से चार लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। चार बार के मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा के मुताबिक, भाजपा और जद (एस) के बीच एक सहमति होगी। अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) जद (एस) को चार लोकसभा सीटें देने पर सहमत हुए हैं। इससे हमें बड़ी ताकत मिली है और इससे हमें एक साथ २५ या २६ लोकसभा सीटें जीतने में मदद मिलेगी।’ उल्लेखनीय यह भी है कि हाल ही में जद (एस) सुप्रीमो देवेगौड़ा ने संकेत दिए थे कि पार्टी अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी। पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा ने २५ सीटें जीतकर परचम लहराया,जबकि उसके समर्थित निर्दलीय ने एक सीट जीती। कांग्रेस और जद (एस) एक-एक सीट पर विजयी रही थीं।

भाजपा में अपमानित लिंगायत
कर्नाटक में अभी तक विपक्ष का नेता नहीं चुना गया है। परंपरा के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कर्नाटक में विपक्ष का नेता बनता है। इस लिहाज से इस बार बसवराज बोम्मई को यह पद मिलना चाहिए था। सच्चाई यह है कि भाजपा ने उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्त नहीं किया है। पद खाली रखना दर्शाता है कि भाजपा बोम्मई सहित लिंगायतों का अपमान कर रही है। इस घटनाक्रम पर वीरशैव महासभा के सचिव रेणुका प्रसन्ना ने कहा कि वे (भाजपा) अन्य नाम प्रस्तावित कर रहे हैं, बोम्मई के साथ माइंड गेम खेलना और सार्वजनिक रूप से उनका अपमान करना, ताकि वह हताशा में कहें कि उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा को लिंगायत वोट कम संख्या में मिले क्योंकि समुदाय अलग-थलग महसूस कर रहा था। उन्होंने पूछा कि २०२४ के लोकसभा चुनाव में पार्टी की क्या संभावनाएं होंगी? राजनीतिक विश्लेषक बीएस मूर्ति के मुताबकि लिंगायत समुदाय में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष के खिलाफ एक कहानी बनाई जा रही है, जिसमें उन्हें समुदाय के हितों के खिलाफ खड़े होनेवाले व्यक्ति के रूप में दर्शया जा रहा है। इसकी शुरुआत उनके उस वीडियो से हुई जो चुनाव से पहले वायरल हो गया था, जहां उन पर आरोप है कि उन्होंने कहा था कि बीजेपी को लिंगायत समर्थन के बजाय हिंदुत्व वोटों पर अधिक निर्भर रहने की जरूरत है। जगदीश शेट्टर, एमपी रेणुकाचार्य, प्रदीप शेट्टर और अन्य लिंगायत नेताओं के बयानों ने केवल भाजपा और लिंगायतों के बीच विभाजन की धारणा को बढ़ा दिया है। वैसे बोम्मई को पार्टी द्वारा दूर से नियंत्रित व्यक्ति के रूप में देखा जाता है और वह येदियुरप्पा की जगह नहीं ले सकते।

पीके संघ की लीक पर
उत्तर बिहार की २० लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही प्रशांत किशोर की टीम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लीक पर लोगों से सीधा संपर्क बनाने के लिए तीन तरह की रणनीति पर काम कर रही है। ग्रामीण स्तर पर १८ से २० साल के युवाओं को साधने के लिए क्लब बनाया जा रहा है। इसे क्लब कमेटी नाम दिया गया है। इन क्लबों में खेल के सामान रखवाए गए हैं। टेलीविजन की भी व्यवस्था की गई है। २० साल से ऊपर के छात्रों को साधने के लिए युवा कमेटी बनाई गई है, जो विश्वद्यिालय और कॉलेज में सक्रिय हैं। इन कमेटियों को परीक्षा और बेरोजगारी का मुद्दा उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। महिलाओं के बुनियादी मुद्दों को उठाने के लिए ग्राम स्तर पर महिला कमेटी को भी सक्रिय किया गया है। पीके पदयात्रा में महिलाओं को साधने के लिए उनके बच्चों के भविष्य पर ज्यादा बात करते हैं। किशोर की नजर तेजस्वी के युवा और नीतीश के महिला वोटरों पर है। प्रशांत की टीम लगातार उनके भाषण को रील्स के जरिए इंस्टाग्राम पर प्रमोट भी कर रही है। बिहार में ४० साल से कम उम्र के करीब ४.२९ करोड़ मतदाता हैं। इनमें १८ से १९ वर्ष वाले ७१ लाख , २० से २९ वर्ष वाले १.६० करोड़ और ३० से ३९ वर्ष वाले १.९८ करोड़ ९८ मतदाता हैं। प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर ‘जन सुराज’ और ‘बात बिहार की’ पेज के जरिए प्रशांत की बात को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

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