मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : पड़ोस की सड़कें गुजरात से बेहतर

झांकी : पड़ोस की सड़कें गुजरात से बेहतर

अजय भट्टाचार्य

वे दिन हवा हुए समय जब, गुजरात अपनी चिकनी सड़कों के लिए जाना जाता था। आजकल गुजरात की सड़कों की तुलना अक्सर पड़ोसी राज्य राजस्थान और मध्य प्रदेश की `बेहतर गुणवत्ता’ वाली सड़कों से की जाती है। इतना कि भाजपा के विधायक और सांसद भी इसे लेकर हंगामा करने लगे हैं। राजस्थान आने वाले लोग अक्सर यह दावा करते हैं कि राजस्थान में प्रवेश करते ही सड़कों की गुणवत्ता गुजरात से बेहतर है। मामला यह है कि उदयपुर की ओर जाते समय रतनपुर की सीमा राजस्थान से लगती है। दूसरी तरफ दाहोद से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक सड़कों की गुणवत्ता मध्य प्रदेश और गुजरात की सड़कों में भारी अंतर को दर्शाती है। एक भाजपा विधायक यह कहने से खुद को नहीं रोक सके कि राजस्थान की सड़कें हमें शर्मसार करती हैं। समस्या यह है कि न तो कोई सुनता है और न ही किसी को शिकायतों की परवाह है। हमें पीड़ा होती है क्योंकि हमें चुनाव में लोगों का सामना करना पड़ता है।

कैडर का डर
तीन साल पहले जब रामजन्मभूमि मंदिर का अयोध्या में भूमिपूजन किया गया था, तब भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में विश्राम कर रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को आमंत्रित नहीं किया गया था। अब आगामी २२ जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की `प्राण प्रतिष्ठा’ या मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आमंत्रित जिन महत्वपूर्ण लोगों का ब्यौरा सोमवार को जारी किया, उसमें भी उपरोक्त दोनों मार्गदर्शकों का नाम नहीं था। ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने आडवाणी और जोशी के संदर्भ में कहा कि दोनों परिवार के बुजुर्ग हैं और उनकी उम्र को देखते हुए उनसे न आने का अनुरोध किया गया, जिसे दोनों ने स्वीकार कर लिया। मतलब आडवाणी और जोशी को यह मानकर बाहर कर दिया गया, क्योंकि दोनों की आयु ज्यादा है। खबर है राय की टिप्पणियों के बाद गुजरात लॉबी से अलग भाजपा कैडर में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई। इस कैडर का कहना था कि समारोह में जाना एक बात है, लेकिन उन्हें निमंत्रण न भेजना वर्तमान शासन द्वारा संपूर्ण राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने का एक प्रयास है। आज भाजपा वाजपेयी, आडवाणी और जोशी की मेहनत के कारण खड़ी है। इन नेताओं द्वारा विकसित नेतृत्व आज देश पर शासन कर रहा है। इन नेताओं से श्रेय छीनने का प्रयास घटिया राजनीति है। खबर तो यह भी है कि इस कैडर में वह नेता भी शामिल है/था जो कभी बजरंग दल का चेहरा था और बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की टिकट पर अयोध्या से तीन बार लोकसभा पहुंचा था। यह अलग बात है कि गुजरात लॉबी ने २०१४ से पहले ही उन्हें अघोषित तौर पर मार्गदर्शक मंडल में डाल रखा है। बहरहाल, कैडर के डर का नतीजा यह था कि अचानक एक दिन बाद विश्व हिंदू परिषद के मुखिया आलोक कुमार आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं रामलाल और कृष्ण गोपाल के साथ आडवाणी और जोशीजी के दिल्ली स्थित आवास पर नतमस्तक थे और उन्हें अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आने के लिए निमंत्रित कर रहे थे।

चोरी की कार पर विधायक सवार
लखनऊ शिक्षक सीट से जीते भाजपा एमएलसी उमेश द्विवेदी की एसयूवी गाड़ी चोरी की निकली है। वर्कशॉप में एसयूवी ठीक होने के लिए गई थी। सर्वेयर ने क्लेम की जांच की तो गाड़ी चोरी की निकली, जिसके बाद गाड़ी चोरी होने के पूरे मामले का खुलासा हुआ। यहां तक की गाड़ी पर फर्जी चेचिस नंबर दर्ज है। यह गाड़ी मेरठ के एक व्यापारी के नाम पर दर्ज है। द्विवेदी की एसयूवी गाड़ी चिनहट स्थित सर्विस सेंटर पर ठीक होने के लिए गई थी। सर्वेयर ने क्लेम की प्रकिया शुरू की तो वह चोरी की निकली। यह गाड़ी मेरठ निवासी पैâसल के नाम पर दर्ज है। पैâसल के मुताबिक, एसयूवी तो उनके पास ही है। उन्होंने क्लेम के लिए एसयूवी नहीं दी थी। एसयूवी पर भाजपा एमएलसी उमेश द्विवेदी का सचिवालय पास लगा है। रजिस्ट्रेशन से लेकर चेसिस नंबर में खेल किया गया। एमएलसी उमेश द्विवेदी का कहना है कि अमित ने उन्हें ये एसयूवी दी थी, जिनकी कोरोना के दौरान मौत हो गई। अमित की पत्नी डॉ. मृदुला मिश्रा ने पुलिस को तहरीर देकर जांच की मांग की है। गाड़ी का एक पास आशीष वाजपेयी प्रयोग करता है और आशीष वाजपेयी मध्यांचल का बिजली ठेकेदार है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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