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झांकी : अब जजपा की बारी

अजय भट्टाचार्य

तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद हरियाणा की दो महीने पुरानी भाजपा की नायब सिंह सैनी की सरकार को बचाने के लिए जननायक जनता पार्टी को तोड़ने की कोशिश में भाजपा लग चुकी है। जजपा के चार विधायकों ने नायब सैनी से मुलाकात की है। खबर यह भी है कि जजपा के तीन विधायक कांग्रेस की तरफ हैं। इसी साल मार्च में हरियाणा में जेजेपी और भाजपा का गठबंधन टूट गया था। मनोहर लाल खट्टर की सरकार से अलग होने के बाद जजपा नेता दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली के एक फार्महाउस में अपने विधायकों की बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में १० में से केवल पांच विधायक नैना चौटाला, दुष्यंत चौटाला, रामकरण काला, अनूप धानक और अमरजीत धांडा बैठक में शामिल हुए थे। लोकसभा चुनाव प्रचार में जजपा के सात विधायक पार्टी उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार से दूर हैं। हरियाणा की सभी १० सीटों पर चुनाव लड़ रही जजपा के मुखिया दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला जिस उचाना सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उसकी उचाना कलां, उकलाना, नारनौंद और बरवाला विधानसभा सीटों पर जजपा का कब्जा है, लेकिन चुनाव प्रचार केवल दुष्यंत चौटाला कर रहे हैं। बाकी के विधायक प्रचार से गायब हैं। सिरसा से रमेश खटक जजपा उम्मीदवार हैं, लेकिन नरवाना (सुरक्षित) से पार्टी विधायक करामनिवास सुरजाखेड़ा ने भाजपा उम्मीदवार रणजीत सिंह चौटाला को समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

एएसडी का मतलब
गुजरात में लोकसभा चुनाव का मतदान हुए एक सप्ताह बीत चुका है और गांधीनगर के कुछ नौकरशाह इस बात को लेकर परेशान हैं कि मदर ऑफ डेमोक्रेसी का राग अलापने वालों के राज में उनका ही नाम मतदाता सूची से क्यों गायब था? जब वे मतदान केंद्र पर पहुंचे तो मतदान कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि नाम गायब होने के कारण उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एक बाबू ने कहा, ‘वैâसे आना हुआ? मैं यहां १० साल से अधिक समय से रह रहा हूं। मैंने पिछले विधानसभा, लोकसभा चुनावों में इस बूथ से मतदान किया था और अब मेरा नाम इसमें नहीं है। जाहिर है, कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा था कि गायब नाम वाले लोगों का मनोरंजन न करें, चाहे वे कोई भी हों। जब एसीएस स्तर का एक अधिकारी स्पष्टीकरण मांगने वाले मतदान अधिकारियों से नाराज हो गया तो उसे बताया गया, `यह एएसडी होना चाहिए।’ एएसडी का मतलब `अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत’ है। गजब यह है कि जिनके नाम मतदाता सूची से कटे हैं वे न तो अनुपस्थित थे, न स्थानांतरित और न ही मृत यह सचमुच दुखद है!
लगे हैं पप्पू
भले ही कांग्रेस ने पप्पू यादव को न तो टिकट दिया और न ही उनका साथ। इसके बावजूद बिहार में पूर्णिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पप्पू यादव झारखंड के धनबाद में कांग्रेस उम्मीदवार के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। धनबाद से `इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस की अनुपमा सिंह मैदान में हैं। उनके लिए पप्पू यादव पिछले कई दिनों से धनबाद में प्रचार कर रहे हैं। पप्पू यादव ने धनबाद के कई इलाकों में रोड शो किया। इस दौरान पप्पू यादव ने कहा कि यह लोकसभा चुनाव देश के भविष्य का चुनाव है। अपने १० साल के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने देश को अत्याचार और झूठे वादों के सिवाय कुछ नहीं दिया। बोकारो के लोहानचक में रोड शो के दौरान यादव ने कहा कि न केवल धनबाद में नहीं, बल्कि सारे देश में कांग्रेस की लहर बता रही है कि देश में आमजन की यानी आपकी अपनी कांग्रेस की सरकार आ रही है। धनबाद में २५ मई को मतदान होना है। यहां से ढुल्लू महतो भाजपा उम्मीदवार हैं। राहुल गांधी `भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को लेकर धनबाद आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी धनबाद में रोड शो कर चुके हैं। दोनों गठबंधन के लिए धनबाद की सीट प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है। बिहार की पूर्णिया सीट से अपने दम पर पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा है। पूर्णिया में दूसरे चरण में २६ अप्रैल को मतदान हुआ था। मतदान के बाद जहां यह कहा जा रहा है कि पप्पू यादव की स्थिति मजबूत है। वहीं पप्पू यादव और उनके समर्थकों के लिए यह चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण रहा। पहले तो पप्पू यादव ने कांग्रेस से टिकट पाने की चाह में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था, लेकिन जब टिकट देने की बात आई तो पूर्णिया की सीट राजद के पास चली गई। इसके बाद गुस्साए पप्पू यादव निर्दलीय ही मैदान में उतरे। पप्पू यादव का साथ कांग्रेस ने नहीं दिया था। पप्पू यादव को जनता का कितना साथ मिला, इसका पता तो ४ जून को चलेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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