मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: अब ‘भाईसाब’ की बारी, जातीय जनगणना पर सुर बदले 

झांकी: अब ‘भाईसाब’ की बारी, जातीय जनगणना पर सुर बदले 

अजय भट्टाचार्य

अब ‘भाईसाब’ की बारी

मध्य प्रदेश में सौम्य छवि वाले ‘मामाजी’ शिवराज सिंह के बाद अब मोहन ‘भाईसाब’ की बारी है। साल २००५ में शिवराज ने उमा भारती की कुर्सी हासिल कर ली थी, अब उमा के पटुशिष्य ने उन्हें बेदखल करके समय का एक चक्र पूरा कर दिया है। एक समय मोहन यादव उमा भारती के करीबी माने जाते थे। २००३ में उमा भारती के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के विरुद्ध विधानसभा चुनाव लड़ा था। मोहन यादव को उज्जैन जिले के बड़नगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया गया। पर चुनाव के कुछ समय पूर्व उनसे टिकट वापस ले लिया गया और शांतिलाल धबाई को टिकट मिला। कारण, मोहन यादव बड़नगर के स्थानीय नेता नहीं थे और वहां के कार्यकर्ताओं में इस पर आक्रोश था। टिकट लौटाने के बाद मोहन यादव से पत्रकारों ने इसका कारण पूछा तो बोले, ‘हम बिजली के बल्ब हैं, जब संगठन बोले चालू, हम चालू हो जाते हैं, जब संगठन बोले बंद, हम बंद हो जाते हैं!’ धबाई चुनाव जीकर विधायक बने। मोहन यादव को उमा भारती ने उज्जैन विकास प्राधिकरण का चेयरमैन बनाकर उपकृत किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जमीनी-राजनीति से निखरकर आए मोहन दस साल बाद २०१३ में उज्जैन-दक्षिण क्षेत्र से विधायक बने। मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में उनका चयन चाहे जितना चौंकाने वाला हो, भाजपा कैडर में एक लीडर की जो परिभाषा होती है, उस पर वे पूरे खरे उतरते हैं।

जातीय जनगणना पर सुर बदले

देश भर में जातीय जनगणना का दबे स्वरों में विरोध करनेवाली भाजपा नेतृत्व के बिहार पहुंचते ही तेवर बदल जाते हैं। बीते रविवार को पटना में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जातीय गणना के विरोध में नहीं है। भाजपा जब बिहार में सत्तासीन थी, तब पार्टी ने जाति आधारित सर्वेक्षण का समर्थन किया था। मगर, राज्य सरकार की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में कुछ मुद्दे हैं, जिनका समाधान किया जाना चाहिए। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई। उन्होंने दावा किया कि बिहार विशेष राज्य के दर्जे की सभी शर्तों को पूरा करता है। अब तो जाति आधारित गणना में सामने आए गरीबी एवं पिछड़ेपन के आंकड़े भी इसका समर्थन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, हम चाहते थे कि केंद्र सरकार जातीय आधार पर गणना कराए। इस बैठक में झारखंड, उड़ीसा और बंगाल के सीएम को भी शामिल होना था, लेकिन इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की जगह दो-दो मंत्री प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद रहे साथ ही राज्यों के मुख्य सचिव भी। करीब डेढ़ साल बाद नीतीश और अमित शाह एक मंच पर थे।

सीताजी की जन्मस्थली का कायाकल्प

जिनके बिना राम अधूरे हैं उन सीताजी की जन्मस्थली पुनौराधाम के विकास व सौंदर्यीकरण का काम बिहार सरकार शुरू करने जा रही है। यह तब हो रहा है जब केंद्र सरकार पोषित ट्रस्ट अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के उद्घाटन की तैयारी में लगा है। बुधवार १३ सितंबर को मुख्यमंत्री नीतिश कुमार सीतामढ़ी जिला स्थापना दिवस के बहाने सीता जी की जन्मस्थली के कायाकल्प के लिए पुनौरा धाम में विकास कार्य का शिलान्यास करेंगे। योजना के तहत पुनौराधाम को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसमें मंदिर परिसर का सुंदर वास्तुशिल्प से सौंदर्यीकरण, परिक्रमा पथ, सीता वाटिका, लव-कुश वाटिका, जानकी महोत्सव क्षेत्र, मंडप, पार्किंग क्षेत्र, आंतरिक सड़क आदि का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सितंबर २०२३ में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी मिली थी। माना जा रहा है कि बिहार में भाजपा द्वारा रामजन्मभूमि मंदिर को भुनाने की कोशिश की काट के लिए जदयू ने सीताजी के मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण को अमली जमा पहना दिया है।

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