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झांकी: पर्ची वाले की कथा रद्द

अजय भट्टाचार्य

बागेश्वर धाम के पर्चीवाले बाबा की बिहार के गया में आयोजित कथा को रद्द कर दिया गया है। कथा कमेटी का कहना है कि जिला प्रशासन ने कथा करने का आदेश नहीं दिया है। इस फैसले के बाद से कथा कमेटी ने धीरेंद्र नाथ शास्त्री के आयोजन को रद्द करने का फैसला किया है। आयोजकों ने पितृपक्ष मेला के दौरान मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कैंपस में सभा कराने का अनुरोध किया था। जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। यहां अनुमति नहीं मिलने पर आयोजकों ने स्थल बदलकर महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र, बोधगया की मांगी की। इस बारे में गया के जिलाधीश द्वारा आयोजन की प्रशासनिक एवं पुलिसिया समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि पितृपक्ष मेले में कई राज्यों से लाखों तीर्थयात्री आते हैं। पर्ची वाले बाबाजी के आयोजन के कारण विधि व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और तीर्थ यात्रियों के सुगम आवागमन में कठिनाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में पटना में हुए आयोजन में ही बाबाजी ने पितृपक्ष के दौरान गया आने की बात कही थी। जिला प्रशासन के मुताबिक एक साथ दो जगहों की भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल भरा होता।

तेलंगाना में भाजपा पस्त
पिछले साल भाजपा ने हैदराबाद में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का आयोजन कर जोरदार तरीके से तेलंगाना में अपनी पैठ बनाने की शुरुआत की थी। उसने सभी विधानसभाओं में प्रदर्शन रैली आयोजित कर सरकार पर जोरदार तरीके से हमला बोला था, लेकिन चुनाव करीब आते-आते उसकी धार कुंद पड़ गई है। इधर कांग्रेस ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा-बीआरएस के रिश्तों को लेकर जोरदार हमला बोला है। भाजपा ने बंडी संजय कुमार को तेलंगाना में पार्टी की कमान सौंपकर बीआरएस को घेरने की योजना बनाई थी लेकिन चुनाव से पहले पार्टी ने बंडी संजय कुमार को तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष पद से हटाकर जी किशन रेड्डी को पार्टी की कमान सौंप दी। इससे तेलंगाना में उसकी लड़ाई कमजोर पड़ गई है। नए अध्यक्ष उतने प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। पार्टी ने अपनी चुनावी कमान जिस एटला राजेंद्र को सौंपी है, वे भी पूर्व में केसीआर के सबसे विश्वस्त सहयोगियों में रहे हैं। ऐसे मे आम लोगों के बीच तेलंगाना में भाजपा की लड़ाई की प्रतिबद्धता पर प्रश्न खड़े हो गए हैं। तेलंगाना के राजनीतिक पंडित मानते हैं कि भाजपा की पूरी चुनावी लड़ाई सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द सिमटी होती है, लेकिन इस राज्य में उसकी वह रणनीति सफल नहीं हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा है कि तेलंगाना सरकार ने हर धर्म, हर जातियों के लिए विभिन्न योजनाएं बनाकर उनके बीच अपनी विश्वसनीयता मजबूत की है। यही कारण है कि भाजपा का हिंदुत्व का कार्ड यहां अपना असर दिखाता नहीं दिखाई पड़ रहा है। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर वह यहां की लड़ाई में पिछड़ रही है। कर्नाटक का असर यह हुआ कि तेलंगाना में पार्टी से शुरू हुई भगदड़ अब तक नहीं रुकी है।

अमित शाह के स्वागत में जदयू के पोस्टर
बिहार के मधुबनी स्थित झंझारपुर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह की शनिवार को रैली थी। जाहिर है रैली को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह था। श्रोताओं के लिए भव्य पंडाल बनाया गया था। शाह के स्वागत में जदयू द्वारा इस रैली को लेकर जगह-जगह पोस्टर भी लगाए गए थे, जिनमें दरभंगा एम्स सहित कई महत्वपूर्ण सवालों को पूछा गया था। जदयू ने पूछा कि अमित शाह बताएं २०२२ तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ? हर साल २ करोड़ युवाओं को नौकरी देने के वादे का क्या हुआ? कच्चे तेल की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों कम नहीं हुए? उज्ज्वला योजना के फेल होने का जिम्मेवार कौन है? ईडी, सीबीआई के छापे सिर्फ विपक्षी नेताओं पर क्यों पड़ते हैं? देश में सिर्फ अडानी-अंबानी जैसे अमीरों की आमदनी क्यों बढ़ रही है? मणिपुर हिंसा के आरोपियों को स्पीड ट्रायल से सजा क्यों नहीं हो रही है? नमामि गंगे परियोजना में करोड़ों खर्च करने के बाद भी गंगा नदी साफ क्यों नहीं हो रही है? भारत की जमीन को चीन के कब्जे से मुक्त करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए? बहरहाल अपने चार घंटे के प्रवास के दौरान झंझारपुर में रैली को संबोधित करते हुए शाह ने सवालों के जवाब न देना ही उचित समझा। अलबत्ता झंझारपुर के बाद हेलिकॉप्टर से दरभंगा भी पहुंचे। शायद इसी बहाने वे भी दरभंगा का एम्स देखना चाहते थे।

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