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झांकी: पुलिसिया न्याय

अजय भट्टाचार्य
यह तस्वीर कानपुर के हनुमंत विहार थाने से बाहर निकलते दिनेश सिंह भदौरिया की है, जो अपने पैरों पर खड़े होना तो दूर, होशो-हवास खो चुके हैं। भदौरिया को जमीन विवाद और फर्जी एससी / एसटी केस में पूछताछ के लिए हनुमंत विहार चौकी पर बुलाया गया था। चौकी से बाहर निकलने के बाद दिनेश की हालत कुछ ऐसी थी जैसी आप इस तस्वीर में देख रहे हैं, जो आठ सेकेंड के वीडियो का स्क्रीन शॉट है। मृतक दिनेश के पुत्र का कहना है कि स्थानीय पुलिस में एससी/एसटी एक्ट के तहत एक फर्जी शिकायत के आधार पूछताछ के बहाने थाने में इतना प्रताड़ित किया गया कि वे चल बसे। सचेंडी थाना क्षेत्र के सीधी इटारा निवासी दिनेश भदौरिया (४२) ने एक साल पहले गल्ला मंडी सोसायटी में २०० वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था, जिस पर किदवई नगर निवासी प्रीति वर्मा भी अपना मालिकाना हक बता रही थीं। बुधवार दोपहर प्लॉट पर कब्जे को लेकर दोनों पक्ष भिड़ गए। डायल ११२ पर शिकायत हुई तो एसओ हनुमंत विहार फोर्स के साथ पहुंचे और दोनों पक्षों को कागजात के साथ बुलाया। परिजनों का आरोप है कि प्रीति वर्मा ने पुलिस के साथ मिलकर दिनेश और उसके भाई सौरभ और पिता लाखन के खिलाफ मारपीट और एससीएसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में हनुमंत विहार थाना पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की। यहां दिनेश को जमीन पर बैठाकर अपमानित किया गया। वहीं, दूसरे पक्ष को कुर्सी पर बैठाया गया।

राष्ट्र प्रथम पर कुर्सी भारी
बीती १० अगस्त को उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद में भाजपा नेता अनुज चौधरी की गोली मारकर सरेआम दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। घटना वाली शाम अनुज को टहलते वक्त बाइक से आए तीन सवारों ने गोलियों से भून डाला था। अनुज ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन हार गए थे। अब वे वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे थे। हत्या के छठे दिन १६ अगस्त को मुरादाबाद पुलिस ने भाजपा नेता अनुज चौधरी के हत्यारोपी पकड़ लिए। इस हत्याकांड के षड्यंत्र के मामले में एक भाजपा नेत्री एवं ब्लॉक प्रमुख संतोष का बेटा अनिकेत चौधरी और नीरज पाल गिरफ्तार किए गए हैं। हत्या करनेवाले तीन शार्प शूटर फरार हैं। मामला पुरानी चुनावी रंजिश से जुड़ा है, जिसमें ब्लॉक प्रमुख के पति और बेटे ने हत्याकांड की साजिश रची। ३० लाख सुपारी देकर अनुज की हत्या कराई। स्थानीय भाजपा इस मामले पर समाधी की मुद्रा में हैं क्योंकि मृतक और हत्या के सूत्रधार दोनों भाजपा के हैं। अर्थात मात्र कुर्सी के लालच और पद के लिए पार्टी में एक-दूसरे के लिए मरने-मारने की स्थित आ गई है। इस तरह के प्रकरण में ‘राष्ट्र प्रथम’ का उद्घोष खोखला प्रतीत होता है।

चीनी ने लगाया चूना
गुजरात पहुंचकर एक चीनी नागरिक ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक फुटबॉल सट्टेबाजी का ऐप इस्तेमाल कर उत्तरी गुजरात के १,२०० लोगों को फंसाकर लगभग १,४०० करोड़ रुपए ठग लिए। ठगी के इस पूरे खेल को महज नौ दिनों के अंदर अंजाम दिया गया। पुलिस की तहकीकात में चीन के शेनझेन क्षेत्र के रहनेवाले वू उयानबे पर गुजरात के पाटन और बनासकांठा जिले में लोगों को ठगने का आरोप है। सीआईडी को पिछले साल जून में पता चला कि कुछ ठग ‘दानी डेटा’ ऐप के माध्यम से गुजरात और उत्तर प्रदेश में लोगों को निशाना बना रहे थे। आगरा पुलिस ने जांच शुरू की और सीआईडी (क्राइम) टीम ने उत्तरी गुजरात में कई लोगों से लिंक का पता लगाया। जांच के दौरान पता चला कि चीनी नागरिक ने २०२० और २०२२ के बीच पाटन और बनासकांठा में कई स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उन्हें पैसे का लालच दिया। इसके बाद उसने और गुजरात में उसके अन्य साथियों ने मई २०२२ में एक ऐप लॉन्च किया। इसने दांव लगाने के लिए लोगों को आमंत्रण दिया और पर्याप्त रिटर्न का वादा किया। उयानबे प्रति दिन औसतन २०० करोड़ रुपए की ठगी करने में कामयाब रहा, उसने मुख्य रूप से फुटबॉल गेम के माध्यम से १५ से ७५ वर्ष की आयु के लोगों को अपना शिकार बनाया। सीआईडी (अपराध) साइबर सेल ने बाद में मामले से जुड़े नौ लोगों को गिरफ्तार किया, इन लोगों ने कथित तौर पर मुखौटा कंपनियों की स्थापना करके हवाला नेटवर्क के माध्यम से धन जुटाने में उयानबे की मदद की। अगस्त २०२२ में जब तक गुजरात पुलिस हरकत में आई, तब तक साजिशकर्ता गायब हो चुका था। सीआईडी उयानबे के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा नहीं कर सकी और राज्य ने अभी तक उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया है। बाकी और राज्य ने अभी तक उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया है।

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