" /> झांकी…छवि बचाओ अभियान!

झांकी…छवि बचाओ अभियान!

न तो योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी से बड़े नेता हो गए हैं और न नरेंद्र मोदी का करिश्मा घटा या बढ़ा (?) है। फिर क्यों उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही अगुवाई में लड़े जाने की तैयारी भाजपा कर रही है? वजह है छवि बचाओ। जो बनी है वह बनी रहे इसलिए प्रधानसेवक को उप्र में चेहरा न बनाने का फैसला पितृ संगठन ने दिल्ली में बैठकर लिया और दिल्लीशाही को बता भी दिया कि इससे ही इमेज बची रह सकती है। बंगाल के चुनाव परिणामों से यह बात निकलकर आई कि क्षेत्रीय नेताओं के मुकाबले प्रधानसेवक के चेहरे को सामने रखने से उनकी छवि को नुकसान हुआ है। विरोधी बेवजह उन्हें निशाना बनाते हैं। पितृ संगठन किसी भी नेता को अलग करने या नाराजगी के साथ छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अब इस पर योगी को खरा उतरना है। सिर्पâ उप्र ही नहीं बल्कि इसके अलावा और दूसरे पांच राज्यों में होनेवाले चुनावों में अब नरेंद्र मोदी चेहरा नहीं होंगे। पितृ संगठन का मानना है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनाम मोदी की रणनीति से नुकसान हुआ। इसमें चुनाव हारने से ज्यादा अहम यह है कि राजनीतिक विरोधियों को मोदी पर बार-बार हमला करने का मौका मिला। इससे उनकी इमेज को नुकसान होता है। इससे पहले भी बिहार में २०१५ के विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के खिलाफ और फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी इस रणनीति से कोई फायदा नहीं हुआ। यही वजह है कि मिशन उप्र में जुटी पार्टी की उप्र इकाई के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट या पोस्टर से मोदी की फोटो हटाकर योगी की फोटो चेंप दी गई। हटाने की वजह विधानसभा चुनाव योगी के चेहरे के साथ लड़ने का निर्णय ही है। दोनों नेताओं को साथ काम करने और इस छवि को मजबूत करने के लिए कहा गया है। इसलिए अब उप्र में पोस्टर पर योगी आदित्यनाथ के अलावा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा दिखाई देंगे। मतलब यह है कि यदि चुनाव परिणाम प्रतिकूल हुए तो हार का ठीकरा बाबा जी के नाम और अनुकूल हुए तो जीत का हार बड़े बाबा जी के गले में!
बंगाल की उलझन
जब से बंगाल की सत्ता में तृणमूल कांग्रेस की धमाकेदार वापसी हुई है भाजपा के दड़बे से नए परिंदे वापस पुâर्र होने की तैयारी में हैं। इसलिए ममता बनर्जी को नंदीग्राम में चुनावी पटखनी देने वाले सुवेंदु अधिकारी की गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दरबार में हाजिरी हुई और स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जिन लोगों को साथ में पार्टी में लाए हो उन्हें वापस जाने से रोको। दो सांसद अर्जुन सिंह और सौमित्र खान भी फीडबैक और समीक्षा के लिए बुलाई जा रही बैठक में भाग लेने को दिल्‍ली जानेवाले हैं। पार्टी अपनी बंगाल इकाई में गहराते असंतोष से परेशान है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राज्‍य में पार्टी के कई नेताओं ने कड़े सवाल उठाए थे और खुलकर नाराजगी का इजहार किया था। उपाध्‍यक्ष मुकुल रॉय ने राज्‍य पार्टी प्रमुख दिलीप घोष की ओर से कोलकाता में बुलाई गई बैठक से किनारा किया। मुकुल रॉय ने तो चुप्‍पी साध रखी है लेकिन उनके बेटे शुभ्रांशु ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया है। बीते दिनों शुभ्रांशु ने भाजपा को सलाह भी दे डाली थी कि भाजपा को ममता बनर्जी कि आलोचना की बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। इधर तृणमूल ने दावा किया है कि ३५ भाजपा विधायक तृणमूल में वापसी करना चाहते हैं और नेतृत्व के संपर्वâ में हैं। जिन नेताओं पर तृणमूल में वापसी का संदेह है उसमें पूर्व मंत्री रंजीब बनर्जी प्रमुख हैं, जिन्‍होंने दिल्‍ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का झंडा-डंडा थामा था। बनर्जी ने फेसबुक पोस्‍ट में अपनी ‘नई पार्टी’ की ओर से बंगाल में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की धमकी और केंद्र सरकार की ओर से ममता बनर्जी के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव में पार्टी की रणनीति पर राज्‍य के नेताओं की खास नाराजगी विशेष रूप से चुनाव के ठीक पहले ममता को ‘धोखा’ देकर भाजपा में आनेवाले नेताओं के मामले पर थी। स्‍थानीय नेताओं की बजाय बाहर से लाए गए नेताओं को विधानसभा के प्रचार में लगाने पर भी नाराजगी थी/है। इसका ममता बनर्जी को फायदा मिला, जिन्‍होंने चतुराई से चुनाव को ‘ममता बनाम सब’ और ‘तृणमूल बनाम बाहरी’ में तब्‍दील कर दिया।
लौट के बाबा, ढाबा आए!
पिछले साल दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर के बाबा का ढाबा की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो ढाबा चलाने वाले ८० साल के कांताप्रसाद की तकदीर बदल गई। एक फूड ब्लॉगर ने उनका एक वीडियो बनाया, जिसमें ८० साल के बाबा का ढाबा के मालिक कांता प्रसाद रो रहे थे और कह रहे थे कि लोग उनके यहां खाने नहीं आ रहे हैं और उनकी दुकान नहीं चल रही है। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने उनकी खूब मदद की। बाबा के खाते में ४५ लाख रुपए लोगों ने मदद के रूप में भेजे। करीब १ महीने बाद कहानी में तब एक नया मोड़ आया जब बाबा कांताप्रसाद ने उसी फूड ब्लॉगर गौरव वासन पर आरोप लगाया कि उसने पैसों की हेराफेरी की है, धोखाधड़ी की है। यह कहते हुए मालवीय नगर पुलिस थाने में शिकायत दे दी, जिसके चलते फूड ब्लॉगर वासन पर एफआईआर दर्ज हो गई। मदद की रकम में से कुछ पैसे का उन्होंने मकान बना लिया, कुछ पैसा रेस्टोरेंट में खर्च हो गया। अब उनके पास करीब १९ लाख रुपया बैंक अकाउंट में रखा हुआ है। बीते दिसंबर में उन्होंने अपने ढाबे से कुछ ही दूरी पर एक रेस्टोरेंट खोला। मगर दो महीने के भीतर ही यह रेस्टोरेंट बंद हो गया और बाबा कांताप्रसाद वापस अब अपने उसी ढाबे पर आ गए हैं, जहां से उनकी कहानी की शुरुआत हुई थी। रेस्टोरेंट में खर्चा ज्यादा था और आमदनी कम हो रही थी। अब उनको फूड ब्लॉगर गौरव वासन से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा ‘जिसने हमारी इतनी मदद की हम उसके बारे में ऐसे कैसे कह सकते हैं कि उसने हमारे साथ धोखाधड़ी की। हमको बरगलाया गया और हम से कागज पर दस्तखत करवा लिए गए। अगर हमको मालूम होता है कि इनके अंदर क्या लिखा है तो हम कभी दस्तखत नहीं करते। हम तो केवल यह जानना चाह रहे थे कि कितना पैसा अकाउंट में आया है?’
फोटो पर बवाल
करीब ११ महीने बाद कानपुर के विकास दुबे का नाम फिर चर्चा में है। फर्वâ इतना है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता विकास दुबे उर्पâ दीपू की दो साल पहले की एक युवती के साथ आपत्तिजनक फोटो सामने आई है। दीपू कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष के दायरे में १७ जिले आते हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष इन जिलों का प्रभारी होता है। तमाम आरोपों के बाद भी भाजपा के पदाधिकारियों ने विकास को जुलाई-२०१८ में क्षेत्रीय अध्यक्ष बना दिया। विकास दुबे पर छात्र जीवन से ही कई आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। सबसे पहले १९९६ में उनके खिलाफ गोविंद नगर थाने में हत्या का प्रयास, रासुका, आम्र्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद किदवई नगर में २००९ में हत्या के प्रयास की एफआईआर हुई थी। एक दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई तो इसने पुलिस से बचने के लिए राजनीति का सहारा लिया। दो साल पहले विकास नेपाल के काठमांडू में टूर पर गए थे और एक बार में युवती के साथ आपत्तिजनक फोटो खिंचवाई थी। ये फोटो सामने आने के बाद विकास दुबे ने सफाई दी है कि ये मेरी निजी जिंदगी है। इसको पार्टी से न जोड़ा जाए। मैं भारतीय जनता पार्टी का सच्चा सिपाही हूं। मेरा शौक है। पर्सनल लाइफ में मैं नाच रहा हूं, गा रहा हूं। इससे क्या लेना देना है? विकास दुबे, नारायण सिंह भदौरिया और क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संदीप ठाकुर की दोस्ती काफी चर्चित रही है। हालांकि अब तीनों में फूट पड़ गई है। हाल ही में नारायण के जन्मदिन पार्टी में पुलिस की छापेमारी हुई थी। आरोप है कि ये छापेमारी संदीप के इशारे पर ही हुई थी। इसके बाद नारायण गुट ने संदीप की पोल खोलनी शुरू कर दी। मालूम चला कि संदीप ने सत्ता में धमक के सहारे अपने ऊपर लगे सभी आपराधिक मुकदमें खत्म करवा दिया। यहां तक कि हिस्ट्रीशीट भी खत्म हो गई। अब विकास दुबे की तस्वीरें सामने आ गर्इं हैं। विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के कई नेताओं ने भी दबे जुबान से विकास दुबे पर कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)